मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में, सतना जिला प्रशासन ने संभावित अतिवर्षा एवं बाढ़ की आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कमर कस ली है। किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित सूचनाओं के आदान-प्रदान और समय रहते राहत कार्य पहुँचाने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय पर एक समर्पित 'जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष' (कंट्रोल रूम) की स्थापना की गई है। यह कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट भवन के प्रथम तल पर स्थित कक्ष क्रमांक एफ-19 में संचालित होगा।
कंट्रोल रूम का संचालन और समय-सीमा
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कंट्रोल रूम आगामी 15 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 तक बिना किसी अवकाश के (24x7) निरंतर कार्यशील रहेगा। यह व्यवस्था मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार की गई है। नागरिकों और विभागीय अधिकारियों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम का दूरभाष क्रमांक 07672-223211 निर्धारित किया गया है।
प्रशासनिक टीम और उत्तरदायित्व
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के मार्गदर्शन में इस कंट्रोल रूम की कमान अनुभवी अधिकारियों के हाथों में सौंपी गई है। प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित नियुक्तियां की गई हैं:
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प्रभारी अधिकारी: डिप्टी कलेक्टर लक्ष्यराम जांगड़े (मोबाइल: 9993754244) को राहत शाखा के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
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सहायक अधिकारी: तहसीलदार लालमणि पाण्डेय को कंट्रोल रूम का सहायक अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रशासन ने 24 घंटे की ड्यूटी को तीन पालियों में विभाजित किया है:
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प्रथम पाली (प्रातः 6:00 से दोपहर 2:00): कैलाशनाथ वर्मा, बाबूलाल कोल और विजय गौतम।
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द्वितीय पाली (दोपहर 2:00 से रात्रि 10:00): ऋषि कुमार पटेल, राजेश कुमार तिवारी और सूरज प्रसाद वर्मा।
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तृतीय पाली (रात्रि 10:00 से प्रातः 6:00): हरिमोहन शुक्ल, अर्जुन सतनामी और प्रमोद कुमार पाण्डेय।
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रिजर्व टीम: इसके अतिरिक्त रामकलेश तिवारी और शिवपूजन द्विवेदी को रिजर्व में रखा गया है।
कार्यप्रणाली और प्रोटोकॉल
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कंट्रोल रूम में तैनात प्रत्येक कर्मचारी को अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कंट्रोल रूम के लिए निर्धारित कार्यप्रणाली इस प्रकार है:
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सूचना का अंकन: प्राप्त होने वाली प्रत्येक सूचना का विस्तृत विवरण, जैसे सूचनाकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर, समय, प्रभावित क्षेत्र (ग्राम/वार्ड/तहसील), बाढ़ का स्वरूप और घटना का विवरण रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाएगा।
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त्वरित संवाद: जानकारी प्राप्त होते ही संबंधित क्षेत्र के प्रमुख अधिकारी से तत्काल संपर्क कर उन्हें अवगत कराया जाएगा, ताकि वे तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर सकें।
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दैनिक रिपोर्टिंग: कंट्रोल रूम के प्रभारी अधिकारी को प्राप्त सभी सूचनाओं और उन पर की गई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी प्रतिदिन राहत शाखा को सौंपनी होगी।
जनहित में प्रशासन का संकल्प
सतना प्रशासन ने इस कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन को और अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है। मानसून सत्र के दौरान संभावित बाढ़ या अतिवर्षा के मामलों में यह कंट्रोल रूम न केवल सूचना केंद्र के रूप में कार्य करेगा, बल्कि प्रभावित लोगों तक मदद पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आदेश मिलते ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। रिजर्व में नियुक्त कर्मचारियों को भी कार्यालय समय पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी और राहत शाखा के निरंतर संपर्क में रहना होगा।
यह जिला प्रशासन की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के समय जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी आपातकालीन स्थिति की जानकारी तत्काल दिए गए दूरभाष नंबर पर साझा करें ताकि समय रहते सहायता पहुँच सके।
Image Source : gemini ai

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