सतना जिले में आगामी खरीफ सीजन के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले की कृषि रणनीति को अंतिम रूप दिया गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल पारंपरिक खेती को सुदृढ़ करना है, बल्कि किसानों को नई तकनीक और सहायक कृषि गतिविधियों के प्रति प्रोत्साहित करना भी है।

जिले के कृषि विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए 2 लाख 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह योजना जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार की गई है।

सतना जिले में उन्नत कृषि तकनीक और खाद की उपलब्धता

बैठक के दौरान कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में शिक्षित किया जाए। प्रशासन का जोर कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी सहायक गतिविधियों को अपनाने पर है, ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकें।

खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • डीएपी खाद का वितरण: जिले में डीएपी खाद का वितरण विशेष रूप से पैक्स (PACS) सोसायटियों के माध्यम से ही किया जाएगा।

  • अन्य उर्वरकों की उपलब्धता: यूरिया, फास्फेटिक और अन्य खाद को डबल लॉक के विक्रय केंद्रों पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • प्राथमिकता: खाद के भंडारण और उपलब्धता सुनिश्चित करने में पैक्स समितियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सतना: फसल विविधीकरण और धान के रकबे पर विशेष ध्यान

कृषि उप संचालक आशीष पाण्डेय ने बताया कि जिले में 2 लाख 30 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य में से 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल ली जानी है। हालांकि, जिला प्रशासन और कृषि विभाग का विशेष ध्यान 'फसल विविधीकरण' (Crop Diversification) पर है।

शासन के निर्देशों के अनुरूप, धान के रकबे को नियंत्रित कर किसानों को दलहन और तिलहन फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत अरहर, मूंग, उड़द और सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

कोदो-कुटकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

सतना जिले में इस वर्ष मोटे अनाजों (Millets) के उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया है। पिछले वर्ष जिले के मात्र 393 किसानों ने कोदो-कुटकी की फसल ली थी, लेकिन इस वर्ष का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 6 हजार हेक्टेयर तक ले जाने का है।

इसके साथ ही, सतत और टिकाऊ खेती के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में जिले के 16 अलग-अलग क्लस्टरों में 2 हजार किसान पूरी तरह से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। प्रशासन इसे और अधिक विस्तारित करने के लिए प्रयासरत है।

कृषि यंत्रों का आधुनिकीकरण और नरवाई प्रबंधन

कृषि अभियांत्रिकी विभाग के संभागीय यंत्री विष्णु सनोढिया ने जानकारी दी कि नरवाई प्रबंधन (Stubble Management) को लेकर जिला पूरी तरह तैयार है। जिले में वर्तमान में 176 सुपर सीडर और हैप्पी सीडर मशीनें उपलब्ध हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए और अधिक आधुनिक यंत्रों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है:

  • 150 सुपर सीडर

  • 10 हैप्पी सीडर

  • 10 स्मार्ट सीडर

  • 20 बेलर

इन मशीनों का उपयोग पराली जलाने की समस्या को रोकने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होगा। इसके अतिरिक्त, धान की बुआई के लिए किसानों को डीएसआर (DSR - Direct Seeded Rice) पद्धति अपनाने की सलाह दी जा रही है, जो जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वित्तीय सहायता और केसीसी (KCC) की स्थिति

सतना जिले की कृषि अर्थव्यवस्थता के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कुल 1 लाख 92 हजार 248 पंजीकृत किसान हैं। किसानों की वित्तीय सुगमता के लिए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) को एक मजबूत आधार माना गया है। वर्तमान में जिले के 1 लाख से अधिक किसानों के पास सक्रिय और वैध केसीसी मौजूद है, जिससे वे समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि इनपुट आसानी से प्राप्त कर पा रहे हैं।

भविष्य की राह और समन्वय

बैठक में उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की प्रगति का ब्योरा प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

यह समीक्षा बैठक न केवल खरीफ की तैयारियों का लेखा-जोखा है, बल्कि यह जिले में कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। सतना जिला प्रशासन का यह नवाचारी दृष्टिकोण किसानों को पारंपरिक खेती के चक्र से बाहर निकालकर उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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