राजस्व विभाग किसी भी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का आधार स्तंभ होता है। नागरिकों के भूमि संबंधी अधिकारों, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरणों का समय पर निपटारा करना सुशासन की निशानी है। सतना जिले में राजस्व कार्यों की गति और पारदर्शिता को लेकर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में आयोजित राजस्व अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सीमांकन जैसे संवेदनशील प्रकरणों को लंबित रखने की प्रवृत्ति पर तत्काल लगाम लगाई जाए। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को चेतावनी दी है कि किसी भी स्थिति में 3 माह से अधिक समय तक कोई भी सीमांकन प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए.

सीमांकन और आरसीएमएस पोर्टल की समीक्षा

कलेक्टर ने राजस्व न्यायालयवार आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल पर दर्ज और निराकृत प्रकरणों की गहन समीक्षा की। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल पर दर्ज कुल प्रकरणों का निराकरण प्रतिशत वर्तमान में 52.7% है, जो संतोषजनक नहीं है. उन्होंने अधिकारियों को इसमें और अधिक सुधार लाने के लिए निर्देशित किया।

सीमांकन के मामलों पर विशेष जोर देते हुए जानकारी दी गई कि:

  • आरसीएमएस पोर्टल पर सीमांकन के कुल 4483 प्रकरण दर्ज हुए थे.

  • इनमें से 3202 प्रकरणों का निराकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है.

  • वर्तमान में 1281 सीमांकन प्रकरण अभी भी लंबित हैं, जिन्हें कलेक्टर ने 15 जून तक अनिवार्य रूप से निराकृत करने का लक्ष्य दिया है.

इसके अतिरिक्त, लोक सेवा गारंटी के तहत सीमांकन के 262, नामांतरण के 21, अभिलेख दुरुस्ती के 31 और बंटवारा के 15 प्रकरण भी पोर्टल पर लंबित पाए गए, जिन्हें भी इसी समय सीमा के भीतर निपटाने का आदेश दिया गया है.

फार्मर रजिस्ट्री: सतना जिले की चिंताजनक प्रगति

फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry) के कार्य की समीक्षा के दौरान जिले की स्थिति काफी पीछे पाई गई, जिस पर कलेक्टर ने गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की है। जिले के आंकड़े दर्शाते हैं कि:

  • जिले में कुल 8,09,213 भूस्वामी हैं, जिनमें से अब तक मात्र 2,11,987 भूस्वामियों की फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण हो पाई है.

  • सतना जिले की औसत प्रगति 26.20% है, जबकि राज्य की औसत प्रगति 35.36% है.

  • फार्मर रजिस्ट्री के मामले में सतना जिला राज्य में 'बॉटम' से चौथे स्थान पर है, जो कि अत्यंत खेदजनक है.

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ई-विकास पोर्टल के माध्यम से भविष्य में होने वाले खाद वितरण में फार्मर रजिस्ट्री की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। अतः खरीफ सीजन की तैयारियों के साथ-साथ इस कार्य को शत-प्रतिशत पूर्ण करना सुनिश्चित करें. कोटर (36%) और नागौद (31%) तहसीलों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक है, विशेषकर रघुराजनगर नगरीय तहसील में प्रगति मात्र 12% रही है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अधिकारी रणनीति बनाकर कार्य करें और प्रतिदिन इसकी समीक्षा करें ताकि जिले को टॉप 10 से 20वें स्थान तक लाया जा सके.

अन्य राजस्व बिंदुओं पर चर्चा

बैठक में केवल सीमांकन और फार्मर रजिस्ट्री ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई:

  • स्वामित्व योजना: जिले में चल रही स्वामित्व योजना की प्रगति का जायजा लिया गया.

  • मानसून की तैयारी: आगामी मानसून सत्र को देखते हुए राजस्व अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए.

  • नक्शा विहीन ग्राम: एसएलआर एलएम पाण्डेय ने बताया कि जिले के 89 ग्रामों के नक्शे ऑनलाइन अपलोड हो चुके हैं, जबकि शेष 14 नक्शों की प्रक्रिया जारी है.

  • न्यायालयीन प्रकरण: विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लंबित राहत प्रकरणों और अन्य राजस्व संबंधी मामलों की स्थिति की समीक्षा की गई.

प्रशासनिक संकल्प और उत्तरदायित्व

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि कार्य में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट्स में पिछड़ना जिले के लिए शर्मनाक है। उन्होंने एसडीएम स्तर के अधिकारियों को स्वयं फील्ड में उतरकर और पटवारी हल्का स्तर तक प्रगति की मॉनिटरिंग करने को कहा है.

बैठक में सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह, विभिन्न तहसीलों के एसडीएम और तहसीलदार सहित राजस्व विभाग का पूरा अमला उपस्थित रहा. इन निर्देशों के बाद उम्मीद है कि सतना जिले के राजस्व कार्यों में अब तेजी आएगी और नागरिकों को अपने भूमि संबंधी कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

राजस्व विभाग का यह अभियान आम जनता के हित में है। यदि सीमांकन और रजिस्ट्री का कार्य समय पर होता है, तो भूमि विवादों में कमी आएगी और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में सुगमता होगी। अब देखना यह होगा कि 15 जून की निर्धारित डेडलाइन तक अधिकारी अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं या नहीं।

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