वन विभाग की जमीन पर रास्ता बनाकर शिवा कार्पोरेशन का खेल! प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा अवैध उत्खनन

विकासखंड सेवढ़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत खमरोली के मजरा डांगकछार में अवैध रेत उत्खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सेवढ़ा मौ रोड से जेल के सामने से लगभग 3 किलोमीटर अंदर वन विभाग की सीमा में पेड़-पौधों को काटकर अवैध रूप से रास्ता तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से रेत माफिया खुलेआम अवैध उत्खनन कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की नाक के नीचे संचालित हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल चुप्पी दिखाई दे रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र में जेसीबी,एल एन टी और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार हो रही है। पेड़ों की कटाई कर रास्ता तैयार किया गया, जिससे रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली,डम्फर आसानी से निकल सकें। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में ही नहीं बल्कि दिनदहाड़े भी रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन वन विभाग, राजस्व विभाग और खनिज विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब वन विभाग की भूमि पर बिना अनुमति रास्ता तैयार कर दिया गया, पेड़ काट दिए गए और भारी वाहन लगातार निकल रहे हैं, तो क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इससे साफ प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदारों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं हो सकता।
बताया जा रहा है कि अवैध उत्खनन के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वन क्षेत्र में रास्ता बनने से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और वन्यजीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। वहीं रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं रह गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर वन भूमि पर बनाए गए अवैध रास्ते को तत्काल बंद कराया जाए, पेड़ काटने वालों पर वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई हो तथा अवैध रेत उत्खनन में शामिल माफियाओं और संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों की लूट इसी तरह जारी रहेगी।