आमला। नगर पालिका परिषद आमला में स्ट्रीट लाइट, बिजली के पोल और केबल से जुड़े कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निरीक्षण और जांच के दौरान कार्य में अनियमितताओं की बात सामने आई थी, लेकिन आज तक न तो मौके पर लगी सामग्री बदली गई और न ही जिम्मेदारों के विरुद्ध किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई।
लोगों का कहना है कि यदि जांच में पोल, केबल और स्ट्रीट लाइट कार्य में खामियां पाई गई थीं, तो संबंधित ठेकेदार, अधिकारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? वहीं यदि जांच में सब कुछ सही पाया गया था, तो अनियमितताओं के आरोपों और निरीक्षण के निष्कर्षों का आधार क्या था? इस पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार निरीक्षण के दौरान 9 मीटर के पोल की माप को लेकर भी विवाद सामने आया था। यदि माप में त्रुटि थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय हुई? क्या किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई की गई? इस संबंध में भी अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि जिन पोल, केबल और स्ट्रीट लाइट सामग्री में कथित रूप से खामियां बताई गई थीं, वही सामग्री आज भी मौके पर लगी हुई दिखाई दे रही है। इससे जांच की निष्पक्षता और उसके परिणामों पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि सामग्री मानक के अनुरूप नहीं थी, तो उसे बदला क्यों नहीं गया, और यदि वह पूरी तरह मानक के अनुरूप थी, तो फिर जांच में खामियां मिलने की बात क्यों कही गई?
इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद के सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि जनहित से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले पर जनप्रतिनिधियों को जनता के सामने अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए और जांच का अंतिम परिणाम सार्वजनिक करना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि अनियमितताएं पाई गई हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन सभी तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जनता के बीच व्याप्त भ्रम समाप्त हो सके।
जनता का सीधा सवाल है— यदि जांच में गड़बड़ियां मिली थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कोई गड़बड़ी नहीं थी तो फिर जांच में उठे सवालों का सच क्या है? नागरिकों का कहना है कि उन्हें दिखावटी जांच नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेह प्रशासन और जांच के आधार पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए।
जनता का एक और सवाल है: यदि जांच में जिस सामग्री पर आपत्ति जताई गई थी, वही सामग्री आज भी उपयोग में है, तो क्या जांच केवल औपचारिकता थी या फिर जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अमल नहीं किया गया? प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
*इनका कहना है।*
आप आफिस टाइम पर आ जाइए में बता दूंगा
*योगेश आनेरव उपयंत्री नगर पालिका आमला*
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