विदिशा जिले के लटेरी विकासखंड में आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से किसानों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार देखा जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम सेमरी सिकंदराबाद के एक प्रगतिशील किसान मांगीलाल सहरिया की सफलता की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। सीमित जल संसाधनों और पथरीली भूमि जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का लाभ उठाकर न केवल अपनी खेती के तरीके को बदला है, बल्कि अपनी आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह कहानी उन लाखों किसानों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खेती को घाटे का सौदा मान बैठे हैं।

भौगोलिक चुनौतियां और खेती का संघर्ष

कृषक मांगीलाल सहरिया के पास कुल 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है। उनकी इस भूमि की सबसे बड़ी चुनौती इसकी प्रकृति रही है। मिट्टी का लाल और पथरीली होना फसलों की उपज के लिए एक बड़ी बाधा थी। पथरीली भूमि होने के कारण मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता अत्यंत कम थी। इसका सीधा प्रभाव फसल की वृद्धि पर पड़ता था—फसल बोने के कुछ दिनों बाद ही नमी खत्म हो जाती थी, जिससे पौधों का विकास रुक जाता था। साथ ही, सिंचाई के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता भी काफी सीमित थी। पानी की कमी के कारण वे अपनी पूरी फसल को समय पर पानी नहीं दे पाते थे, जिसका असर सीधे तौर पर पैदावार पर पड़ता था। पूर्व में गेहूं जैसी फसलों की सिंचाई के लिए उनके पास पर्याप्त पानी नहीं होता था, जिससे उत्पादन का स्तर काफी कम बना रहता था।

कृषि विभाग का मार्गदर्शन और योजना का चयन

जब मांगीलाल सहरिया ने अपनी इस समस्या को स्थानीय कृषि विभाग के समक्ष रखा, तो कृषि विस्तार अधिकारी ने उन्हें आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने किसान को 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के अंतर्गत मिलने वाले लाभों और स्प्रिंकलर सेट (फव्वारा सिंचाई) के बारे में विस्तार से समझाया। किसान को बताया गया कि कैसे यह तकनीक कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई कर सकती है। विभाग के मार्गदर्शन में मांगीलाल सहरिया ने पूरी तत्परता के साथ ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूर्ण की। उनकी मेहनत और विभाग के प्रयासों का परिणाम यह रहा कि उनका नाम चयन सूची में शामिल हो गया। सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने विभाग द्वारा पंजीकृत डीलर से आधुनिक स्प्रिंकलर सेट प्राप्त किया।

सरकारी अनुदान: एक बड़ा आर्थिक संबल

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इस पर मिलने वाला सरकारी अनुदान है। किसान को स्प्रिंकलर सेट की खरीद पर लगभग 50 से 55 प्रतिशत तक का अनुदान प्राप्त हुआ। इतने भारी अनुदान ने किसान के ऊपर से वित्तीय बोझ को काफी कम कर दिया। मांगीलाल को इस योजना के तहत 30 पाइप और 5 नोजल वाला एक उच्च गुणवत्तायुक्त स्प्रिंकलर सेट मिला। इस अनुदान ने एक छोटे किसान के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाना आसान बना दिया, अन्यथा इतनी महंगी तकनीक में निवेश करना उनके जैसे छोटे किसान के लिए कठिन था।

स्प्रिंकलर सिंचाई के अद्भुत परिणाम

स्प्रिंकलर सेट लगाने के बाद मांगीलाल की खेती में क्रांतिकारी बदलाव आया। इस पद्धति के उपयोग के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • पानी का समान वितरण: खेत में पानी अब पाइपों के माध्यम से नोजल के जरिए बारिश की तरह बरसता है, जिससे खेत के हर हिस्से में पानी समान रूप से पहुंचता है।

  • पानी की बचत: पहले जो पानी खुले बहाव के रूप में व्यर्थ हो जाता था, अब उस पर पूर्णतः रोक लग गई है। इस तकनीक से लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है, जो सीमित जल वाले क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

  • सिंचाई क्षमता में वृद्धि: पहले जहां पानी की कमी के कारण गेहूं की फसल में केवल एक ही सिंचाई संभव हो पाती थी, अब स्प्रिंकलर पद्धति से वे आसानी से दो से तीन बार सिंचाई कर पा रहे हैं।

  • समय और मजदूरी की बचत: फव्वारा सिंचाई से सिंचाई कार्य में लगने वाले समय में भी कमी आई है और मजदूरों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचा है।

उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि

तकनीक अपनाने का सबसे सुखद परिणाम उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है। मांगीलाल सहरिया के अनुसार, इस स्प्रिंकलर पद्धति के उपयोग से उनकी गेहूं की फसल का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पहले जो फसल पानी की कमी के कारण कमजोर रह जाती थी, वह अब स्प्रिंकलर से नियमित नमी मिलने के कारण स्वस्थ और परिपक्व हो रही है। उत्पादन बढ़ने से किसान की आय में भी सीधा इजाफा हुआ है, जिससे उनका परिवार अब आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहा है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत

मांगीलाल सहरिया की सफलता केवल एक किसान की व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि कैसे सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। आज उनके गांव और आसपास के अन्य क्षेत्रों के किसान भी उनसे प्रेरित होकर कृषि विभाग के पास स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई तकनीक की जानकारी लेने आ रहे हैं। मांगीलाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर सीमित संसाधनों में भी बेहतर खेती संभव है। उन्होंने कृषि विभाग और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं ने उनके जीवन को एक नई दिशा प्रदान की है।

यह कहानी स्पष्ट करती है कि यदि किसान नई तकनीक को स्वीकार करें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सफलता पाई जा सकती है। विदिशा जिले के लटेरी क्षेत्र में मांगीलाल जैसे किसानों का उत्साह अन्य लोगों के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य कर रहा है।

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