विदिशा। जल है तो कल है, इसी मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए विदिशा जिले में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में विदिशा जिले के ग्राम धामनोद में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद की पहल पर एक विशेष 'कुआं-बावड़ी पूजन' कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल परंपराओं के निर्वहन का प्रतीक बना, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ।
पारंपरिक जल स्रोतों का सम्मान और पुनरुद्धार
कार्यक्रम का आयोजन नवांकुर संस्था 'आत्मनिर्भर सेवा समिति गुंजरी', 'जन जागरण समिति सेक्टर हैदरगढ़' तथा 'ग्राम धामनोद प्रस्फुटन समिति' के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हमारे पूर्वजों द्वारा निर्मित और संरक्षित पारंपरिक जल संरचनाओं के महत्व को आज की पीढ़ी के समक्ष पुनः स्थापित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:
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विधि-विधान से पूजन: ग्राम में स्थित कुआं और बावड़ी के समीप रंगोली सजाई गई और दीप प्रज्वलित कर विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।
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सामूहिक संकल्प: कार्यक्रम में उपस्थित सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर जल संरक्षण के महत्व को स्वीकार किया और जल स्रोतों को साफ-सुथरा रखने तथा उनके संरक्षण हेतु निरंतर प्रयासरत रहने का सामूहिक संकल्प लिया।
जल संरक्षण: आने वाली पीढ़ी के लिए एक निवेश
कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक समन्वयक श्री स्वदेश आचार्य ने जल की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती जल समस्या को देखते हुए अब केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को 'जल योद्धा' बनना होगा। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि यदि आज हमने अपने जल स्रोतों (कुआं, बावड़ी, तालाब) की सुरक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल का संकट विकराल हो जाएगा।
आयोजन में प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष एवं सहयोगी श्री जितेंद्र अहिरवार, श्री महेश कुमार बैरागी तथा संस्था अध्यक्ष श्री दिनेश मालवीय ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के सरल उपायों के बारे में जानकारी दी और अपने घरों के आसपास सोख्ता गड्ढे बनाने व जल की बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित किया।
जन-भागीदारी से बढ़ेगा अभियान का प्रभाव
इस आयोजन में धामनोद गांव के निवासियों की उपस्थिति और उत्साह यह दर्शाता है कि ग्रामीण अंचल जल संरक्षण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश स्पष्ट था—हमें जल स्रोतों को केवल इस्तेमाल की वस्तु नहीं, बल्कि जीवनदायिनी धरोहर के रूप में देखना चाहिए।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों से जब जल संरक्षण को जोड़ा जाता है, तो ग्रामीणजन इसे भावनात्मक रूप से अपनाते हैं और परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने आने वाले समय में अपने गांव की सभी जल संरचनाओं की सफाई और उनके पुनर्जीवन के लिए मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया।
सुशासन और जल सुरक्षा की दिशा में एक कदम
विदिशा जिले में चलाया जा रहा यह अभियान सरकार की 'जल गंगा संवर्धन' नीति के प्रति प्रशासन और जन संस्थाओं की तत्परता को दर्शाता है। कुआं-बावड़ी जैसे पारंपरिक स्रोतों का जीर्णोद्धार न केवल भू-जल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि यह आने वाले ग्रीष्मकाल में जल संकट से निपटने में भी सहायक सिद्ध होगा। विदिशा जिले के अन्य गांवों के लिए भी ग्राम धामनोद का यह प्रयास एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।
Image Source: https://vidisha.mpinfo.org
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