ग्वालियर नगर निगम में भ्रष्टाचार की गंगोत्री ऊपर से बहती है। अर्थात सबसे पहले आते हैं वो जनप्रतिनिधि और नेता जिन्हें आपने अपने शहर को सुंदर स्वच्छ और सुविधा युक्त बनाने के लिए चुना है उन्हें अपना वोट दिया है उनमें विश्वास जताया है। लेकिन क्या ये नेता आपके भरोसे को कायम रख पाए हैं। बता दें कि नगर निगम के अधिकांश पार्षद और जनप्रतिनिधि अपने रिश्तेदारों और चेले चपाटों के नाम से निगम के विकास कार्यों का ठेका लेकर मलाई खाने में जुटे हैं इसका खुलासा समय समय पर होता रहा है। निगम में अंदर तक व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल तब खड़े होते हैं जब नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर जारी होने के बाद निगम के उपनेता ठेकेदार को केवल इसलिए काम नहीं करने‌ देते कि उस ठेकेदार ने उनकी सेवा नहीं की, उनके भूमिपूजन का खर्च नहीं उठाया। ग्वालियर के सैफ अली जो कि पेशे से सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं उन्होंने वार्ड नंबर 53 में नाले के निर्माण का टेंडर लिया है। उनका‌‌ आरोप है कि स्थानीय पार्षद और निगम के उपनेता मंगल यादव ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें काम नहीं करने दिया। जबकि वे सब इंजीनियर द्वारा साइट निरीक्षण करने के लिए अपने पिता के साथ पहुंचे थे। उपनेता मंगल यादव और उनके समर्थकों द्वारा ठेकेदार के साथ बहस का वीडियो भी सामने आया है जिसमें मंगल यादव के समर्थक उनका पक्ष लेते नजर आ रहे हैं।  ठेकेदार सैफ अली ने निगम कमिश्नर संघप्रिय से न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि इस मामले में मंगल यादव का कहना है कि मैंने ठेकेदार को भूमिपूजन के लिए कहा था। मैं चाहता था कि यह बड़ा काम है और मेरे क्षेत्र की जनता के सामने भूमिपूजन होना चाहिए लेकिन ठेकेदार ने मना कर दिया और कहा कि मैं आपके हिसाब से काम नहीं करा पाऊंगा। हालांकि ग्वालियर नगर निगम कर्मचारियों और नेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत उनके एक खासमखास जोनल ऑफिसर बृजेश राजपूत के ठेकेदार सैफ अली को किए गए फोन रिकॉर्डिंग ने कर दी जिसमें साफ तौर पर नेता जी को संतुष्ट करने की बात की जा रही है सुनिए क्या कहा नगर निगम के जेडओ बृजेश राजपूत ने।
ग्वालियर नगर निगम में किए जा रहे भ्रष्टाचार की ठेकेदार द्वारा मामले की शिकायत करने पर निगमायुक्त संघप्रिय ने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर एफआईआर भी करेंगे। लेकिन क्या ये ऐसा कर पाएँगे‌ क्योंकि इस भ्रष्टाचार के हमाम में सब नंगे नजर आते हैं निगमायुक्त भले ही कितने भी ईमानदार हों लेकिन सालों बाद सत्ता पक्ष में बमुश्किल आई कांग्रेस और विपक्षी में बैठी भाजपा दोनों ही एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हों तो बेचारे अकेले कमिश्नर क्या कर लेंगे आखिर वे भी इस सिस्टम का हिस्सा जो हैं।