देवरी में अवैध कॉलोनियों का खेल बेनकाब: ग्राम पंचायत के खुलासे से प्रशासन पर उठे सवाल

झुनकू पंचायत ने कलेक्टर को लिखा पत्र, बिना अनुमति बस रहीं कॉलोनियां; पूर्व मंत्री हर्ष यादव भी उठा चुके हैं मामला

सतीष सेन | देवरी, सागर

देवरी नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अवैध कॉलोनियों का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देवरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत झुनकू ने भी इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों पर तत्काल रोक लगाने तथा संबंधित कॉलोनाइजरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत द्वारा 1 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम झुनकू एवं रजौला क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से कृषि भूमि पर नियमों की अनदेखी करते हुए प्लॉटिंग कर कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। पंचायत का दावा है कि किसी भी कॉलोनाइजर को पंचायत की ओर से न तो अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया गया और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति दी गई। इसके बावजूद खुलेआम प्लॉट बेचकर कॉलोनियां बसाई जा रही हैं।
पंचायत के अनुसार शवगृह के सामने रजौला तिराहा स्थित संजय नगर सहित कई स्थानों पर बिना नाम से कथित अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में अनियोजित विकास और राजस्व नियमों के उल्लंघन की आशंका बढ़ गई है।
विस्थापित परिवार भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नौरादेही अभयारण्य से विस्थापित लगभग 50 परिवार इन कॉलोनियों में निवास कर रहे हैं, लेकिन सड़क, जल निकासी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व मंत्री हर्ष यादव पहले ही उठा चुके हैं मामला
अवैध कॉलोनियों का मुद्दा इससे पहले भी राजनीतिक स्तर पर उठ चुका है। पूर्व मंत्री हर्ष यादव लगातार इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में कृषि योग्य भूमि तेजी से समाप्त होती जाएगी और अवैध प्लॉटिंग का दायरा और बढ़ेगा।
'नोटिस-नोटिस' का खेल, कार्रवाई कब?
क्षेत्र में चर्चा है कि प्रशासन केवल नोटिस जारी करने तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि कथित अवैध कॉलोनियों का निर्माण और प्लॉटों की बिक्री जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ग्राम पंचायत स्वयं लिखित रूप से बिना अनुमति कॉलोनियों के निर्माण की जानकारी दे रही है, तो संबंधित विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए हैं।
प्रशासन के सामने बड़े सवाल
बिना ग्राम पंचायत की अनुमति के कॉलोनियां कैसे विकसित हो गईं?
कृषि भूमि पर प्लॉटिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई?
बिना मूलभूत सुविधाओं के प्लॉट बेचने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
नोटिस जारी होने के बाद भी कथित अवैध निर्माण क्यों नहीं रुके?
ग्राम पंचायत ने अपने पत्र की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत देवरी तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवरी को भी भेजी है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहता है या फिर कथित अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
लक्ष्मण कुर्मी, सचिव, ग्राम पंचायत झुनकू
"मेरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में 8 से 10 कॉलोनियां कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति के संचालित की जा रही हैं। ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी कॉलोनाइजर को एनओसी जारी नहीं की गई है। शवगृह के सामने रजौला तिराहा स्थित संजय नगर सहित कई स्थानों पर बिना अनुमति प्लॉटिंग की जानकारी जिला कलेक्टर, एसडीएम देवरी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र के माध्यम से भेज दी गई है।"
हर्ष यादव, पूर्व मंत्री
"अवैध कॉलोनियों का मामला मेरे संज्ञान में अखबारों के माध्यम से आया था, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया पर भी उठाया। यदि इसी प्रकार अवैध कॉलोनियां विकसित होती रहीं तो भविष्य में कृषि योग्य भूमि नहीं बचेगी। प्रशासन को तत्काल ऐसे कॉलोनाइजरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।"