*धनपुरी, शहडोल* 
धनपुरी नगर पालिका और महारत्न कंपनी SECL ने मिलकर एक अनोखी योजना शुरू की है — **'हर घर कीचड़, हर द्वार दलदल'**। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत शहर की मुख्य सड़कों को आधुनिक कीचड़ तालाबों में तब्दील कर दिया गया है। 

योजना की खास बातें:
मिट्टी से विकास: डामर-गिट्टी पुराने जमाने की बात है। SECL और नगर पालिका के इंजीनियरों ने साबित कर दिया कि गड्ढे भरने के लिए सबसे सस्ता और टिकाऊ माल कच्ची मिट्टी है। एक बारिश में ही सड़क, नाला और खेत एक हो जाते हैं — 3 इन 1 पैकेज।
एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा: स्कूल से सिर्फ 100 मीटर दूर स्थित इस सड़क पर अब बच्चों को रोज 'मड रेस' की फ्री ट्रेनिंग मिल रही है। जो बच्चा बिना फिसले स्कूल पहुंच जाए, उसे नगर पालिका की तरफ से 'बैलेंस मास्टर' का सर्टिफिकेट मिलना चाहिए।
दोहरी जिम्मेदारी, दोहरी लापरवाही: आधा इलाका SECL का, आधा नगर पालिका का। दोनों विभागों में इतना गजब का तालमेल है कि काम के वक्त एक-दूसरे को ऐसे देखते हैं जैसे दूल्हा-दुल्हन पहली बार मिले हों। नतीजा — जनता रोज कीचड़ में बारात निकाल रही है।

SECL से 3 मासूम सवाल:
CSR मतलब 'कोल साइड रिसर्च'? करोड़ों का मुनाफा कमाने वाली कंपनी CSR फंड से सड़क नहीं बना सकती, तो क्या वो पैसा 'कीचड़ कैसे टिकाऊ बनाएं' पर रिसर्च में जा रहा है?
भारी वाहन तुम्हारे, सड़क जनता की? कोयला ढोने वाले 50 टन के डंपर से सड़क टूटे तो मिट्टी डाल देना, और किसी की बाइक फंसे तो वो 'ड्राइविंग सीखो'। गजब का न्याय है।
सुरक्षा मानक या सुरक्षा मजाक? माइंस एरिया में फिसलन से हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन — कीचड़, बारिश, या वो कर्मचारी जो हेलमेट पहनकर दलदल में ड्यूटी करने आया था?

नगर पालिका से 3 भोले सवाल:
टैक्स का नाम 'हफ्ता वसूली' रख दो? हाउस टैक्स, वॉटर टैक्स, स्वच्छता टैक्स — सब टाइम पर चाहिए। बदले में सड़क मांगो तो कहते हैं 'बरसात के बाद देखेंगे'। मतलब टैक्स 12 महीने, सड़क 2 महीने?
इंजीनियरिंग की नई ब्रांच — 'मिट्टी विज्ञान'? जिस अफसर ने गड्ढों में मिट्टी डलवाई, उसे IIT में लेक्चर देना चाहिए। इतना इनोवेटिव आइडिया कि एक बारिश में ही पूरी सड़क 'नेचुरल स्विमिंग पूल' बन गई।
मानसून प्लान फाइलों में ही बह गया? हर साल बजट पास होता है — नाली-सड़क मरम्मत का। इस बार लगता है कागज पर ही डामर बिछा दिया और फोटो खिंचाकर 'काम पूर्ण' लिख दिया।

जनता की 'नाजायज' मांगें:
लीपापोती बंद, डामर शुरू: कीचड़ हटाकर मुरम डालना तो 'फर्स्ट एड' है। हमें 'सर्जरी' चाहिए — 15 दिन में डामरीकरण शुरू हो। 
जिम्मेदार का फोटो चौराहे पर: जिसने मिट्टी डालने का आदेश दिया, उसका नाम-पद सार्वजनिक हो। जनता भी तो जाने कि 'विकास पुरुष' कौन है।
CSR का हिसाब-किताब: SECL बताए, पिछले 3 साल में धनपुरी की सड़कों पर कितने करोड़ बहाए — कीचड़ में या कागज पर?

आखिरी बात: 
धनपुरी गांव नहीं, नगर पालिका है। SECL कोई कबाड़ी की दुकान नहीं, महारत्न कंपनी है। फिर भी यहां सड़कें ऐसी कि आदिवासी इलाके के लोग भी कह दें — 'भैया, हमारे कच्चे रास्ते इससे बेहतर हैं'। 

ये विकास नहीं, जनता के जख्मों पर कीचड़-मिट्टी का नमक है। साहब, या तो सड़क बनवा दो, या फिर नगर पालिका का नाम बदलकर 'धनपुरी कीचड़ विकास प्राधिकरण' रख दो। कम से कम बोर्ड तो सच बोलेगा।


 *एक कीचड़-त्रस्त नागरिक की कलम से*