कान्हा के जंगलों में 'ऑपरेशन मानसून' : बाघों और वन्यजीवों की सुरक्षा का बड़ा अभियान

ऐंकर: मानसून की शुरुआत के साथ ही कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन मानसून' नामक एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। इस दौरान जंगल के मुख्य क्षेत्र (कोर एरिया) में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा, जबकि बफर जोन में केवल नियमों का पालन करके ही आने की अनुमति होगी।

तीन महीने तक चलेगा सख्त पहरा...

इस अभियान के अंतर्गत जंगल की सुरक्षा को और भी मजबूत किया गया है। पूरे क्षेत्र में 182 पेट्रोलिंग कैंप सक्रिय कर दिए गए हैं, जिनमें करीब एक हजार वन अधिकारी और कर्मचारी लगातार ड्यूटी पर रहेंगे।

  • बारिश के कारण रास्ते खराब हो जाते हैं, इसलिए पैदल गश्त के साथ 16 हाथियों की मदद ली जाएगी।
  • हाथी उन इलाकों में आसानी से पहुंच सकेंगे जहां गाड़ी नहीं जा सकती।
  • कान्हा, किसली, मुक्की और सूपखार के हाथी शिविरों को तैयार रखा गया है।

वन विभाग ने जंगल के 589 महत्वपूर्ण स्थानों को चिन्हित किया है, जहां अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जंगल के अंदर बने 1,204 किलोमीटर लंबे रास्तों और पगडंडियों पर रोज गश्त होगी। जरूरत पड़ने पर नए अस्थायी कैंप भी बनाए जाएंगे।

सुरक्षा की आवश्यकता:

मानसून के समय जंगल में जानवर ज्यादा घूमते हैं, जिससे शिकारियों के आने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस अभियान का उद्देश्य अवैध शिकार और अन्य गलत गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखना है। इससे कान्हा के बाघ और अन्य वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे।

रवींद्र मणि त्रिपाठी, फील्ड डायरेक्टर, कान्हा टाइगर रिजर्व ने कहा, "सभी अधिकारियों को हर रोज गश्त की रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही बारिश में काम कर रहे कर्मचारियों की सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे।"

निष्कर्ष:

कान्हा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में से एक है। यहां की जैव विविधता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। 'ऑपरेशन मानसून' से न केवल बाघ सुरक्षित रहेंगे, बल्कि पूरा जंगल भी स्वस्थ रहेगा।