MPPSC आयोग के बाहर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन: 10 सूत्रीय मांगों पर आंदोलन जारी
इंदौर: नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के बैनर तले छात्रों ने MPPSC आयोग के बाहर अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन को 'न्याय यात्रा 2.0' का नाम दिया गया है, जो 27 जनवरी तक जारी रहेगा।
संयोजक राधे जाट ने बताया कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर छात्रों ने धरना स्थल पर संविधान का पाठ किया और आज सुबह झंडा वंदन भी किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो धरना अनिश्चितकालीन जारी रहेगा।
पुलिस से तनावपूर्ण स्थिति
पुलिस के निर्देशों के बावजूद, जब छात्रों की संख्या बढ़ी, तो वे गार्डन और फुटपाथ से सड़कों पर आ गए, जिससे पुलिस के साथ बहस हो गई। पुलिस ने छात्रों को यातायात बाधित न करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, छात्रों ने दावा किया कि वे पुलिस की निगरानी में धरना दे रहे हैं और किसी को असुविधा नहीं होने दे रहे हैं।
पिछले अनुभवों से सबक
जाट ने बताया कि इससे पहले मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आश्वासन मिला था, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं। इस बार हाईकोर्ट से अनुमति लेकर आंदोलन किया जा रहा है, ताकि पिछली बार की तरह विश्वासघात न हो।
कोचिंग संचालकों की भूमिका
जाट ने आरोप लगाया कि कोचिंग संचालकों ने जानबूझकर छात्रों के टेस्ट रखे हैं, ताकि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। बावजूद इसके, छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अभ्यर्थियों का अनुभव
रणजीत किसानवंशी, एक MPPSC अभ्यर्थी, ने बताया कि पिछली बार आंदोलन के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। सरकार से भरोसा टूटने पर इस बार छात्रों ने जेल जाने और केस दर्ज होने की संभावनाओं के बावजूद अपनी मांगें पूरी कराने का संकल्प लिया है।
हाईकोर्ट से मिली शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति
इस बार अभ्यर्थियों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय से अनुमति प्राप्त की है। एनईवाययू के संयोजक राधे जाट ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने रिट याचिका संख्या WP-3025-2026 के माध्यम से अनुच्छेद 19 के तहत इस आंदोलन को मंजूरी प्रदान की है। इस अनुमति के बाद प्रदेश भर के कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और छात्र संगठनों से जुड़े युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए इंदौर पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए पूरी शालीनता से अपनी बात शासन तक पहुंचाएंगे।
ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आयोग परिसर के बाहर डेरा डाल रखा है और अलाव जलाकर रातें वहीं बिता रहे हैं।
छात्रों का यह आंदोलन उनकी मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता के खिलाफ एक सशक्त संदेश है, जो जल्द ही किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।
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