आलोट। नगर परिषद आलोट द्वारा श्री आनंदी कल्पेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में लगभग 28 लाख रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे 'अमृत-2' उद्यान (नमो उपवन) का निर्माण कार्य शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है। जिस उद्यान को नगर की सुंदरता और नागरिकों के मनोरंजन के लिए एक प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा था, वह पहली ही बारिश में तालाब में तब्दील हो गया। निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों की अनदेखी और जिम्मेदार अधिकारियों की संदिग्ध कार्यप्रणाली ने लाखों रुपये के इस प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है।
शिकायतों को किया नजरअंदाज, पार्षद की चेतावनी सच साबित
वार्ड क्रमांक 10 की पार्षद श्रीमती पुष्पा बालकृष्ण कुवाड़िया ने निर्माण में हो रही अनियमितताओं को लेकर दो बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों ने उन पर कोई कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया।
18 दिसंबर 2025 की पहली शिकायत में पार्षद ने स्पष्ट आरोप लगाया था कि ठेकेदार और नगर परिषद के इंजीनियर की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और निर्धारित जाली की जगह कमजोर सरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
16 अप्रैल 2026 की दूसरी शिकायत में बगीचे में काली मिट्टी के स्थान पर मोहरम भरने, घटिया गुणवत्ता के झूले, चकरी एवं फिसलपट्टी लगाने तथा पेवर ब्लॉक और उद्यान का ढलान गलत होने से भारी जलभराव की आशंका जताई गई थी।
पहली ही बारिश ने पार्षद की इन तमाम आशंकाओं को सही साबित कर दिया। पूरे उद्यान परिसर में पानी भर गया और लाखों की लागत से लगाई गई घास और पौधे जलमग्न हो गए।
इंजीनियर और ठेकेदार की सांठ-गांठ, भुगतान की साज़िश?
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नगर परिषद की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पार्षद का आरोप है कि नगर परिषद के इंजीनियर शकील खान, पीआईयू (PIU)/पीडीएमसी (PDMC) के इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत से शासकीय धन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। अब मामले को लीपापोती करने के लिए किसी निजी संस्था से खानापूर्ति वाली जांच कराकर ठेकेदार को चुपचाप भुगतान करने की तैयारी की जा रही है।
जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने की मांग
पार्षद ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की किसी सक्षम शासकीय तकनीकी संस्था से निष्पक्ष जांच कराई जाए। जब तक जांच की रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक ठेकेदार का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उद्घाटन से पहले ही गार्डन की यह दुर्दशा यह बताने के लिए काफी है कि इसमें कितना बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
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