बीमारी के बाद योग मजबूरी, स्वस्थ रहते योग करना समझदारीः योग गुरु सोनी
पानसेमल में खरबूजा बाजार में लोगों को सिखाए योगासन, बोले- नकारात्मक लोगों से दूरी भी जरूरी
बड़वानी -रोग लगने के बाद योग करना मजबूरी बन जाती है, लेकिन स्वस्थ रहते हुए योग करना समझदारी है। यह बात योग गुरु कृष्ण कांत सोनी ने पानसेमल के खरबूजा बाजार में लोगों को निशुल्क योग सिखाते हुए कही। इस दौरान उन्होंने खरबूजे बेचने और खरीदने पहुंचे लोगों को स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के महत्व के बारे में बताया। योग गुरु सोनी ने कहा कि आज लोग ब्लड प्रेशर के डर से नमक और शुगर के डर से मीठा खाना छोड़ देते हैं, लेकिन भगवान के डर से चुगली करना, दूसरों को धोखा देना और मुफ्त में खाना नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि जीवन में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और नैतिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने लोगों को समझाया कि कुछ लोग ऐसी नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं, जिनके संपर्क में आने से मन भारी होने लगता है, अचानक थकान और बेचैनी महसूस होती है।
जो व्यक्ति हमेशा गुस्से, डर, जलन और नफरत में जीता है, उसकी नकारात्मकता आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती है। वहीं सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ बैठने से मन शांत और ऊर्जा से भर जाता है। योग गुरु ने कहा कि हर व्यक्ति केवल शब्द ही नहीं, बल्कि अपना प्रभाव और ऊर्जा भी फैलाता
है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखने के लिए नकारात्मक लोगों से दूरी रखना भी जरूरी है। इस दौरान उन्होंने लोगों को एक पैर पर संतुलन बनाने वाला योगासन भी कराया और बताया कि इससे व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता और बढ़ती उम्र की स्थिति का अंदाजा लगा सकता है। उन्होंने कहा कि 65 वर्ष का व्यक्ति
यदि 5 सेकंड, 55 वर्ष का 10 सेकंड, 45 वर्ष का 20 सेकंड और 30 वर्ष का व्यक्ति 30 सेकंड तक संतुलन बना लेता है तो उसकी शारीरिक क्षमता अच्छी मानी जाती है। बाजार में योग प्रदर्शन को देखने लोगों की भीड़ जुटी रही। इस दौरान एक खरबूजा विक्रेता ने भी संतुलन आसन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

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