उमरिया: कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जिला अध्यक्ष कीर्ति कुमार सोनी ने (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं दिल्ली सांसद के श्री प्रवीन खंडेलवाल के हवाले से बताया कि आज सरकार से ई-कॉमर्स एवं क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई करने की मांग की।
कैट ने संसद द्वारा पारित *जन विश्वास विधेयक 2.0* का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह कदम विश्वास-आधारित शासन और व्यापार सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
कैट के राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रवीण खंडेलवाल गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के व्यापारिक वातावरण को असंतुलित कर रही हैं और देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर रही हैं, जो देश की आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार का प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने कहा कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, अत्यधिक छूट (डीप डिस्काउंटिंग), डार्क पैटर्न्स, मार्केटप्लेस के नाम पर इन्वेंट्री आधारित मॉडल, चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता और डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार—ये सभी प्रथाएं न केवल प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी हैं।
कैट के प्रदेश सचिव अशोक दौलतानी का कहना है कि ऐसी कंपनियों को भारत में मनमानी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
ऑफलाइन और ऑनलाइन व्यापार के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना देश की संतुलित और स्थायी आर्थिक वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कैट ने *राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद* के गठन की मांग करते हुए कहा कि इससे नीतियां अधिक व्यवहारिक, प्रभावी और जमीनी हकीकत के अनुरूप बन सकेंगी।
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