आगामी 3-4 दिनों में खंड वर्षा की संभावना, किसान फसलों की निराई-गुड़ाई एवं कीटों की नियमित निगरानी करें

दित्यपाल राजपूत 

टीकमगढ़ कृषि विज्ञानियों ने जिले के किसानों को आगामी 3-4 दिनों के मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए खरीफ फसलों की नियमित देखभाल एवं कीट-रोग प्रबंधन के लिए आवश्यक सलाह दी है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 3-4 दिनों के दौरान जिले में खंड वर्षा होने तथा आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। हवा की औसत गति 3 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है।
किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए सोयाबीन, मूंग, उड़द, तिल एवं मूंगफली सहित खरीफ फसलों में समय पर निराई-गुड़ाई कर खरपतवार नियंत्रण करें तथा फसलों में कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी रखें।
सोयाबीन एवं उड़द की फसल में बुआई के 15 से 25 दिन बाद, खेत में पर्याप्त नमी होने पर खरपतवार नियंत्रण के लिए इमाजेथापायर 10 एसएल अथवा क्विजालोफॉप एथिल ईसी दवा का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं 20 से 25 दिन पुरानी मूंगफली की फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु इमाजेथापायर 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट फैन (कट) नोजल से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
कद्दूवर्गीय सब्जियों की बेलों को सहारा देकर ऊपर चढ़ाने की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है, जिससे वर्षा के दौरान लताएं गलने से बच सकें। साथ ही फल मक्खी की रोकथाम के लिए गुड़ अथवा चीनी के साथ क्विनालफॉस 25 ईसी का घोल बनाकर छोटे पात्रों में खुले मौसम के दौरान खेत के विभिन्न स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।
बैंगन एवं भिंडी की फसल में फल एवं तना छेदक कीट के प्रकोप से बचाव के लिए फ्लुबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूडीजी का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने तथा छिड़काव के बाद सात दिन तक सब्जियों की तुड़ाई नहीं करने की सलाह दी गई है। वहीं मिर्च एवं टमाटर की फसल में विषाणुजनित रोग की संभावना को देखते हुए किसानों से संक्रमित पौधों को उखाड़कर सुरक्षित रूप से मिट्टी में दबाने तथा खेत की नियमित निगरानी करने का आग्रह किया गया है।
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि बकरियों में फड़किया (एंटरोटॉक्सीमिया) रोग की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण कराएं तथा पशुओं को अत्यधिक हरी घास खिलाने से बचें, जिससे अफरा जैसी समस्या की संभावना कम हो सके।