कहीं धूप तो कहीं छांव कोलकाता के व्यापारियों के लिए अलग नियम
उमरिया में कोलकाता, पश्चिम बंगाल से राखी के त्यौहार के अवसर पर वर्षों से आकर व्यापार करने वाले व्यापारियों की निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति/अभिमत को लेकर अब मामला तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। व्यापारियों ने प्रशासन एवं नगर पालिका परिषद उमरिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगातार आवेदन कर रहे हैं, लेकिन बार-बार आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद उनकी मांग पर अब तक स्पष्ट और लिखित निर्णय सामने नहीं आया है। व्यापारियों का कहना है कि जिस भूमि पर वे अस्थाई दुकानें संचालित करना चाहते हैं, वह निजी भूमि है और वे संबंधित भूमि पर निर्धारित अवधि के लिए व्यापार करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे प्रशासन एवं नगर पालिका द्वारा निर्धारित सभी आवश्यक नियमों, शर्तों और वैधानिक औपचारिकताओं का पालन करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद उन्हें अनुमति/अभिमत के संबंध में स्पष्ट स्थिति नहीं बताई जा रही है।
*प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल*
व्यापारियों का कहना है कि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानों के संचालन की अनुमति/अभिमत को लेकर नगर पालिका परिषद उमरिया के समक्ष भी बार-बार आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें स्पष्ट लिखित जवाब नहीं मिला है। व्यापारियों का सवाल है कि यदि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने में कोई वैधानिक, प्रशासनिक अथवा स्थानीय स्तर की बाधा है तो उसे स्पष्ट रूप से लिखित में बताया जाए। व्यापारियों का कहना है कि यदि नगर पालिका क्षेत्र में निजी भूमि पर अस्थाई दुकानों के संचालन के लिए कोई नियम, शर्तें या प्रतिबंध निर्धारित हैं तो वे सभी व्यापारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उनका कहना है कि अन्य बाहर से आए व्यापारियों को समान परिस्थितियों में दुकानें संचालित करने का अवसर मिलने की बात सामने आती है, जबकि कोलकाता से आए व्यापारियों को अनुमति के लिए बार-बार आवेदन करना पड़ रहा है। ऐसे में नगर पालिका परिषद उमरिया की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। मामला निजी भूमि पर अस्थाई दुकानों के संचालन की अनुमति/अभिमत से जुड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि वे लंबे समय से उमरिया में आकर व्यापार करते रहे हैं और इस बार भी नियमानुसार अपनी दुकानें संचालित करना चाहते हैं।
*25 वर्षों से उमरिया आ रहे हैं कोलकाता के व्यापारी और कर रहे व्यापार*
कोलकाता, पश्चिम बंगाल के व्यापारियों ने बताया कि वे 25 वर्षों से अधिक समय से राखी के त्यौहार के अवसर पर उमरिया आकर व्यापार करते रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार इतने लंबे समय में उन्हें कभी इस तरह की परेशानी और अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ा।व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से उनका उमरिया से व्यापारिक संबंध रहा है। वे निर्धारित अवधि के लिए यहां आते हैं, व्यापार करते हैं और त्यौहार समाप्त होने के बाद वापस चले जाते हैं। ऐसे में इस बार निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति को लेकर उत्पन्न स्थिति ने उनके सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
*कोलकाता के व्यापारियों से उमरिया के ग्रामीणों को भी लाभ*
उमरिया नगरवासियों का कहना है कि उनका व्यापार केवल उमरिया नगर तक सीमित नहीं रहता। उमरिया नगर के आसपास के अनेक गांवों के रहवासी भी राखी और सावन के त्यौहार के अवसर पर कपड़े, राखी तथा अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने उमरिया पहुंचते हैं।व्यापारियों के अनुसार उनके आने से स्थानीय लोगों को विभिन्न प्रकार की सामग्री उचित और प्रतिस्पर्धी दामों पर उपलब्ध होती है। इससे ग्रामीण एवं आम उपभोक्ताओं को भी आर्थिक रूप से राहत मिलती है और त्यौहार की खरीदारी उनके लिए सुविधाजनक होती है।
*कहीं धूप तो कहीं छांव आधे गांव देवारी तो आधे गांव फाग*
व्यापारियों ने प्रशासन और संबंधित स्थानीय निकाय की कथित कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थिति कहीं धूप तो कहीं छांव, आधे गांव देवारी तो आधे गांव फाग जैसी दिखाई दे रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि अस्थाई दुकानें लगाने के लिए कोई नियम, शर्तें अथवा प्रतिबंध निर्धारित हैं, तो वे सभी व्यापारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उनका आरोप है कि एक ओर कोलकाता से आए व्यापारियों को निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति के लिए लगातार आवेदन करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उमरिया में अन्य बाहर से आए व्यापारियों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर दुकानें संचालित किए जाने की बात सामने आ रही है।व्यापारियों ने कृष्णा रेस्टोरेंट के बगल में तथा सिंधी धर्मशाला सहित अन्य स्थानों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया है कि यदि समान परिस्थितियों में अन्य व्यापारियों को दुकान संचालन का अवसर मिल रहा है, तो उनके मामले में अलग मापदंड क्यों दिखाई दे रहे हैं?
*बार-बार आवेदन, फिर भी स्पष्ट जवाब का इंतजार*
व्यापारियों का कहना है कि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानों के संचालन की अनुमति/अभिमत के संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अभी तक ऐसा स्पष्ट लिखित जवाब नहीं मिला है, जिससे यह पता चल सके कि उनकी दुकानों के संचालन में वास्तविक कानूनी अथवा प्रशासनिक बाधा क्या है। व्यापारियों की मांग है कि यदि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति देने में कोई वैधानिक बाधा है तो संबंधित नियम, आदेश और कारण लिखित रूप से बताए जाएं। वहीं यदि कोई वैधानिक रोक नहीं है तो नियमानुसार अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
*भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत व्यापार करने की है स्वतंत्रता-देश के किसी भी राज्य में कर सकते हैं व्यापार*
व्यापारियों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d), 19(1)(e) और 19(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को भारत में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने, देश के किसी भी हिस्से में रहने तथा विधि के अधीन व्यापार एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।व्यापारियों का कहना है कि वे पश्चिम बंगाल से उमरिया में व्यापार करने आए हैं और केवल दूसरे राज्य से आने के आधार पर उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। यदि निजी भूमि पर व्यापार संचालन के लिए कोई वैधानिक नियम, अनुमति या आवश्यक औपचारिकता निर्धारित है तो वे उसका पालन करने के लिए तैयार हैं।व्यापारियों ने कहा कि पहचान-पत्र, पुलिस सत्यापन तथा अन्य आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि नियम स्पष्ट हों और समान परिस्थितियों में सभी व्यापारियों पर समान रूप से लागू किए जाएं।
*व्यापारियों का सीधा सवाल आखिर अलग मापदंड क्यों?*
व्यापारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी स्थानीय अथवा बाहर से आए व्यापारी का विरोध करना नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि सभी व्यापारियों के लिए नियम समान, स्पष्ट और पारदर्शी हों। व्यापारियों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि अन्य बाहर से आए व्यापारियों को समान परिस्थितियों में व्यापार करने की अनुमति दी जा सकती है, तो 25 वर्षों से उमरिया में व्यापार करने वाले कोलकाता के व्यापारियों के मामले में इतनी अनिश्चितता क्यों है?व्यापारियों का कहना है कि वे प्रशासन के सभी नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति क्यों रोकी जा रही है और किस नियम के तहत रोक लगाई गई है।
*प्रशासन से निर्णय और नगर पालिका से स्पष्ट जवाब की मांग*
व्यापारियों ने मांग की है कि यदि निजी भूमि पर अस्थाई दुकानों के संचालन की अनुमति नियमानुसार दी जा सकती है तो आवश्यक अभिमत/अनुमति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। यदि किसी वैधानिक कारण से अनुमति संभव नहीं है तो प्रशासन द्वारा संबंधित नियम-कानून, आपत्ति का कारण तथा सक्षम प्राधिकारी का स्पष्ट लिखित आदेश उपलब्ध कराया जाए, ताकि व्यापारी नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकें। साथ ही व्यापारियों ने नगर पालिका परिषद उमरिया से भी उनके आवेदनों पर की गई कार्रवाई, आपत्ति अथवा अनुमति से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके आवेदन पर क्या निर्णय लिया गया और यदि कोई कमी या आपत्ति है तो उसे लिखित रूप से बताया जाए।
*25 वर्षों के व्यापारिक संबंध के बाद इस बार असमंजस*
व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से उमरिया में आकर व्यापार करते रहे हैं और उनके व्यापार से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी त्यौहार की खरीदारी में सुविधा मिलती रही है। ऐसे में निजी भूमि पर अस्थाई दुकानें संचालित करने की अनुमति को लेकर उत्पन्न समस्या पर प्रशासन और नगर पालिका परिषद को स्पष्ट और पारदर्शी निर्णय लेना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि वे नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं और किसी भी वैधानिक प्रक्रिया से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि उनके साथ भी वही नियम लागू किए जाएं जो समान परिस्थितियों में अन्य व्यापारियों पर लागू होते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन व्यापारियों की मांग और लगातार प्रस्तुत किए जा रहे आवेदनों पर क्या निर्णय लेता है तथा नगर पालिका परिषद उमरिया इस मामले में क्या स्पष्ट जवाब देती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यापारियों के लिए अलग-अलग स्थिति क्यों दिखाई दे रही है। व्यापारियों की मांग स्पष्ट है—नियम सभी के लिए समान हों, निजी भूमि पर व्यापार की अनुमति के संबंध में स्पष्ट निर्णय लिया जाए, निर्णय पारदर्शी हो और यदि अनुमति नहीं दी जानी है तो उसका कारण लिखित रूप से बताया जाए।
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