*कोलकाता के कपड़ा कारोबारियों का ही विरोध क्यों-राकेश सिंह?*

रक्षाबंधन के मौके पर हर वर्ष कोलकाता से आने वाले कपड़ा कारोबारियों के विरोध पर जिला व्यापारी संघ के जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने सोशल मीडिया पर बड़ा बयान जारी कर व्यापारिक संगठनों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।उन्होंने कहा कि हर वर्ष कुछ व्यापारी और एक संगठन केवल कोलकाता से आने वाले कपड़ा कारोबारियों का विरोध करते हैं,जबकि शहर में अन्य बाहरी व्यापारी भी खुलेआम कारोबार कर रहे हैं।राकेश सिंह ने अपने बयान में कहा कि मुख्यालय स्थित सिंधी धर्मशाला,कान्हा होटल के समीप अक्सर अस्थायी दुकानें लगती हैं,लेकिन इनका कभी विरोध नहीं किया जाता।उन्होंने सवाल किया कि यदि बाहरी व्यापारियों का विरोध करना ही उद्देश्य है,तो फिर यह विरोध सभी के लिए समान क्यों नहीं है।उन्होंने कहा कि छोटे शहर में केवल सोमवार को दुकानें बंद कर देना और हर साल सिर्फ कोलकाता से आने वाले व्यापारियों का विरोध करना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।उनका दावा है कि शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बड़ी संख्या में लोग ऐसे अस्थायी बाजारों से खरीदारी करते हैं और सस्ता सामान मिलने की वजह से इन दुकानों का राखी से पहले इंतजार भी करते हैं।राकेश सिंह ने कहा कि यदि व्यापारिक संगठन वास्तव में स्थानीय व्यापारियों के हितों की लड़ाई लड़ना चाहते हैं,तो उन्हें किसी एक वर्ग विशेष को निशाना बनाने के बजाय सभी बाहरी प्रदर्शनियों,मेलों और अस्थायी दुकानों के संबंध में एक समान नीति अपनानी चाहिए।तभी यह संदेश जाएगा कि संगठन सभी व्यापारियों के हितों के लिए निष्पक्ष रूप से कार्य कर रहा है।उन्होंने अंत में कहा कि व्यापार के मुद्दे पर भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी द्रष्टिकोण से न्यायोचित नहीं है।