आमला में गुड़ फैक्ट्रियों का प्रदूषण: पर्यावरण को गंभीर खतरा

बैतूल के आमला में गुड़ फैक्ट्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है, और फैक्ट्री मालिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक गुड़ फैक्ट्रियां बिना किसी अनुमति के चल रही हैं। गन्ना पिराई के बाद निकलने वाले अवशेषों को जलाकर इन फैक्ट्रियों की चिमनियों से उठने वाला घना धुआं स्थानीय वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इस धुएं के कारण कई लोगों को सांस लेने में समस्याएँ हो रही हैं और कुछ लोगों को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों की चिंता

  • गुड़ फैक्ट्री संचालकों के पास पंचायत या संबंधित विभाग की अनुमति नहीं है।
  • हानिकारक रासायनिक पदार्थों का उपयोग गुड़ के रंग को साफ दिखाने के लिए किया जा रहा है।
  • डॉक्टरों के अनुसार, इन रासायनिक पदार्थों से गंभीर रोग होने की आशंका है।

प्रशासन की उदासीनता

जिला खाद्य विभाग द्वारा इन फैक्ट्रियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे संचालकों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार बाहरी राज्यों से आए इन लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया है।

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की चेतावनी

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने जिले में नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें लोगों से कहा गया है कि बिना पुलिस वेरिफिकेशन के बाहरी लोगों को मकान, जमीन या दुकान किराए पर ना दें। बावजूद इसके, नियमों को नजरअंदाज कर गुड़ का अवैध निर्माण जारी है।

जिले में बढ़ते प्रदूषण के खतरे को देखते हुए स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे इन अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की जा सके।