जतारा एसडीएम और तहसील कार्यालय में जमकर भ्रष्टाचार, हितग्राही से बाबू ने लिए 10 हजार काम नहीं होने पर पीड़ित  ने मांगे वापिस तो बाबू ने की गाली-गलौज और लाठी लेकर मारने दौड़ा।

- एसडीएम कार्यालय में प्राइवेट व्यक्ति कर रहे शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़, कई फाइलें गायब


टीकमगढ़ - जिले के राजस्व अनुभाग जतारा में अधिकारियों - कर्मचारियों की खुली लूट और लापरवाही देखने को मिल रही है, जहां अधिकारी- कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते है और बगैर रिश्वत के कोई काम नहीं किया जाता है, जिससे किसान दिन भर अधिकारियों- कर्मचारियों का इंतजार करते रहते है और शाम होते ही निराश होकर घर लौट जाते है। जब कोई हितग्राही काम के पहले दी गई रिश्वत काम नहीं होने पर जब वापिस मांगता है तो उसे गालियां और लाठियां मिलती है, जिसकी ताजा उदाहरण आज जतारा तहसील में देखने को मिला है। जहां वर्माताल निवासी पीड़ित मनोज केवट की मां का करीब 9 माह पहले मकान गिरने से मौत हो गई थी, जिसे शासन द्वारा 4 लाख की राशि प्रदान की जानी थी, जिस फाइल को दिगौड़ा तहसीलदार ने स्वीकृत कर जतारा तहसील में पैसे डालने के लिए भेज दिया था, जहां जतारा तहसील में पदस्थ बाबू महेश तिवारी ने राशि डालने के पहले हितग्राही से 20 हजार रुपए की मांग की और हितग्राही से 10 हजार रुपए ले लिए, जिसके बाद भी हितग्राही करीब 9 माह से परेशान हो रहा है, बाबू के द्वारा कभी उसे जतारा तहसील तो कभी कलेक्ट्रेट कार्यालय बुलाया जाता, जब आज 23 जून को हितग्राही जतारा तहसील पहुंचा और उसने महेश तिवारी से काम नहीं होने पर अपने पैसे वापिस मांगे तो बाबू के द्वारा उल्टा हितग्राही को मां - बहिन की गालियां दी, साथ ही हितग्राही को धक्के मारकर कमरे से बाहर कर दिया, जब इसके बाद भी बाबू का गुस्सा कम नहीं हुआ तो डंडा उठाकर हितग्राही को मारने का प्रयास किया, जिसे दूसरे कर्मचारी ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसके बाद पीड़ित डरा - सहमा वहां से वापिस लौट गया, और थाने में शिकायत की बात कहने लगा। 

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समय से नहीं पहुंचते अधिकारी - कर्मचारी 

अगर जतारा एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय की बात की जाए तो यहां के कर्मचारी कभी भी समय से नहीं पहुंचते है, जब आज पत्रकारों की टीम एसडीएम कार्यालय पहुंची तो सुबह 11: 15 पर केवल चपरासी मौजूद था, जिसके बाद करीब 12 से 1 बजे तक कोई भी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद नहीं था, जबकि आज मंगलवार होने के कारण जनसुनवाई का आयोजन किया जाना था, जिससे सुबह से ही कई किसान अपनी पेशी और कई पीड़ित अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे, जो अधिकारियों - कर्मचारियों की आस में लेटे और बैठे थे और अधिकारियों का इंतजार करते रहे।

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जन सुनबाई बनी मजाक

एक ओर शासन जिला मुख्यालय से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक जनसुनवाई का आयोजन कर रहा है कि आवेदकों को उनके नजदीक स्थान पर ही उनकी समस्याओं का निराकार किया जा सके, लेकिन आज जतारा एसडीएम और तहसील कार्यालय में दिन भर आवेदक अपने आवेदन लेकर बैठे रहे लेकिन उनकी समस्याएं सुनने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, और जब कर्मचारी पहुंचे तो वह भी दोपहर 2 बजे के बाद आवेदक निराश होकर लौट चुके थे, ये कोई एक दिन का हाल नहीं है, जतारा एसडीएम और तहसील कार्यालय का अधिकारियों - कर्मचारियों का प्रतिदिन का नियम है।

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एसडीएम नहीं पहुंचते समय पर

अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे आवेदकों ने आरोप लगाते हुए बताया कि एसडीएम संजय दुबे कभी भी जतारा कार्यालय समय पर नहीं आए है, वह हमेशा जतारा रेस्ट हाउस पर या फिर अपने टीकमगढ़ स्थित बंगले पर फाइलें लेकर काम करते थे, जिसमें अधिकांश निजी व्यक्तियों का हस्तक्षेप रहता था, जिनके माध्यम से फाइलें निपटाई जाती थी, अब संजय दुबे का ट्रांसफर हो गया है, जिससे लोगों ने कहा कि यहां एक अच्छे ईमानदार और जनता से जुड़े अफसर की जरूरत है जो लोगों की समस्याएं सुने और समय पर उनका निराकरण किया जा सके।

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प्राइवेट व्यक्ति कार्यालय में घुसकर करते है फाइलों से छेड़छाड़ 

मंगलवार को जब पत्रकार एसडीएम कार्यालय पहुंचे तो यहां एक प्राइवेट व्यक्ति फाइलों में हस्तक्षेप करते नजर आया, जिसका नाम लोगों ने टिंकू तिवारी बताया जो शासकीय कर्मचारियों के पास जाकर बैठ जाता है और कार्यालय में अंदर घुसकर फाइलों को इधर - उधर करता रहता है, फाइलों पर सील भी वह स्वयं लगाया है, सूत्रों ने बताया कि यह प्राइवेट व्यक्ति साहब का बहुत नजदीकी व्यक्ति रहा है और अधिकांश फाइलें इन्हीं की सेटिंग से निपटाई जाती थी, सूत्रों ने तो यह भी बताया कि कार्यालय से करीब 4 महत्वपूर्ण फाइलें गायब बनी हुई है, जो इन्हीं प्राइवेट व्यक्तियों के हस्तक्षेप से गायब होना बताई जा रही है, जिस पर लोगों ने कड़ी कार्यवाही की मांग की है। 

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इनका कहना हैं 

जब इस मामले में कलेक्टर से बात की तो उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, अगर कर्मचारी ने किसी आवेदक के साथ मारपीट की है तो यह गलत है उस पर कार्यवाही की जाएगी, साथ ही अगर एसडीएम कार्यालय में कोई प्राइवेट व्यक्ति फाइलों से छेड़छाड़ करता है तो यह गंभीर अपराध है, जिस पर भी कार्यवाही की जाएगी।
     विवेक श्रोतिय
     कलेक्टर टीकमगढ़।