बालाघाट जिले में कानून के प्रति आमजन, विशेषकर युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालाघाट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है। इसी कड़ी में मंगलवार को शासकीय आईटीआई बुढ़ी परिसर में एक भव्य विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों से परिचित कराना था, बल्कि बदलते दौर की चुनौतियों, जैसे साइबर अपराध और सोशल मीडिया के खतरों से भी उन्हें सावधान करना था। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्राणेष कुमार प्राण के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसने उपस्थित छात्र-छात्राओं के ज्ञान में वृद्धि के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई दिशा प्रदान की।
विधिक अधिकारों और सुरक्षा कानूनों की दी विस्तृत जानकारी
शिविर को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालाघाट के सचिव सतीष शर्मा ने छात्रों को प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम' यानी पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि किस तरह यह कानून बच्चों और किशोरों को यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।
शिविर के दौरान सचिव सतीष शर्मा द्वारा रेखांकित किए गए प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
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नालसा की योजनाएं: उन्होंने नालसा की "बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं एवं उनका संरक्षण योजना-2015" के बारे में छात्रों को अवगत कराया, जिसका उद्देश्य बच्चों के लिए न्याय व्यवस्था को सुलभ और संवेदनशील बनाना है।
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अधिकारों के प्रति सजगता: उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कानूनी जानकारी का होना आज के समय में हर किशोर के लिए अनिवार्य है। जब छात्र अपने अधिकारों को जानेंगे, तभी वे किसी भी प्रकार के शोषण या अनैतिक दबाव के खिलाफ आवाज उठा सकेंगे।
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सुरक्षित भविष्य की नींव: उन्होंने युवाओं को परामर्श दिया कि वे कानून को केवल नियमों की किताब न समझें, बल्कि इसे अपने व्यक्तिगत सुरक्षा कवच के रूप में देखें।
साइबर अपराधों से बचाव और डिजिटल सतर्कता का पाठ
आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है, जहाँ एक ओर अवसर हैं तो दूसरी ओर साइबर खतरों का जाल भी फैला हुआ है। इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सहायता अधिकारी जीतेन्द्र मोहन धुर्वे ने छात्रों को साइबर सुरक्षा के प्रति गहन जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, साइबर स्टॉकिंग और सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ निजी जानकारी साझा करने से होने वाले नुकसानों के बारे में आगाह किया।
जीतेन्द्र मोहन धुर्वे ने अपने संबोधन में छात्रों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी:
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ऑनलाइन ठगी से बचाव: उन्होंने बताया कि कभी भी अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी।
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सोशल मीडिया का सही उपयोग: सोशल मीडिया पर अपनी गोपनीयता (Privacy) सेटिंग्स को मजबूत रखने और किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार से बचने का आग्रह किया।
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कानूनी संहिता का ज्ञान: उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, मोटरयान अधिनियम और लोकोपयोगी सेवाओं के लोक अदालत के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी, ताकि छात्र भविष्य में छोटी-मोटी समस्याओं के कानूनी समाधान से अवगत रहें।
सामाजिक जागरूकता और नैतिक मार्गदर्शन
शिविर में केवल कानून तक ही सीमित चर्चा नहीं रही, बल्कि इसमें नैतिक मूल्यों और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान 'गुड टच-बैड टच' जैसे संवेदनशील विषय पर छात्रों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित कर सकें। इसके अतिरिक्त, युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन और उसके कारण होने वाले शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक दुष्प्रभावों पर भी व्यापक चर्चा हुई।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि युवा किसी भी देश की वास्तविक शक्ति हैं। यदि वे गलत दिशा में कदम रखेंगे, तो समाज के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करना व्यर्थ है। अतः, समय-समय पर ऐसे मार्गदर्शन सत्रों का आयोजन करना समाज की जिम्मेदारी है।
छात्रों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीद
इस आयोजन में शासकीय आईटीआई बुढ़ी के प्राचार्य, संस्थान का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पूरे उत्साह के साथ सम्मिलित हुए। अंत में, छात्रों ने इस जानकारी को अपने जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कई विद्यार्थियों ने माना कि उन्हें पहले कई कानूनों के बारे में पता ही नहीं था, लेकिन इस शिविर के माध्यम से उनके भ्रम दूर हुए हैं। छात्रों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मांग की कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएं ताकि उन्हें समय-समय पर नई कानूनी जानकारी मिलती रहे।
यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि बालाघाट प्रशासन और न्यायपालिका मिलकर समाज के युवाओं को न केवल शिक्षित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
Image Source: https://balaghat.mpinfo.org

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