डॉ आकृति को मिला पीएचडी अवार्ड
उचेहरा - नगर की निवासी एवं बर्तमान में बिलासपुर जिले के रतनपुर की बेटी डॉ. आकृति ताम्रकार ने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर से वानिकी, वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान विषय में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त कर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। डॉ आकृति हरिकुमार ताम्रकार एवं श्रीमती निशा ताम्रकार की सुपुत्री हैं।
डॉ. आकृति का शोध विषय - उत्तर बस्तर, कोंडागांव जिले के आदिवासी, समुदायों की आजीविका सुरक्षा पर लघु वनोपजों का प्रभाव था। यह शोध कार्य बस्तर के कोर आदिवासी अंचलों एवं घने जंगलों में रहकर किया गया, जहां उन्होंने आदिवासी समुदायों के जीवन, जंगलों पर उनकी निर्भरता तथा लघु वनोपजों की भूमिका का विस्तृत अध्ययन किया। अपने शोध में डॉ. आकृति ताम्रकार ने महुआ के सतत संग्रहण (सस्टेनेबल हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि महुआ फूल संग्रहण के दौरान जंगलों में आग लगाने की परंपरा वन, वन्यजीव एवं जैव विविधता के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने पेड़ों के नीचे नेट (जाल) बिछाकर महुआ संग्रहण की तकनीक सुझाई, जिससे महुआ फूल आसानी से एकत्रित किए जा सकें तथा जंगलों को आग से बचाया जा सके। इसके साथ ही शोध में महुआ, तेंदूपत्ता एवं अन्य लघु वनोपजों के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने के उपायों पर भी विशेष कार्य किया गया। शोध में यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि लघु वनोपजों का सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए तो जंगलों का संरक्षण करते हुए आदिवासी समुदायों की आजीविका को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। पिछले एक दशक में अध्ययन क्षेत्र में घने वनों के क्षेत्रफल में लगभग 4.82% की कमी दर्ज की गई, जबकि कृषि क्षेत्र में 4.08% की वृद्धि देखी गई। यह परिवर्तन क्षेत्र में भूमि उपयोग एवं भू-आवरण (Land Use and Land Cover) में हो रहे बदलावों को दर्शाता है, जो वन संसाधनों, जैव विविधता तथा आदिवासी समुदायों की पारंपरिक आजीविका पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल रहे हैं। डॉ. आकृति ताम्रकार इससे पूर्व भी अपनी सामाजिक व शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित हो चुकी हैं। उन्हें विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम महिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक (First Female Chancellor Gold Medal) भी प्राप्त हो चुका है, जो उनकी प्रतिभा और निरंतर उत्कृष्टता का प्रमाण है। उनकी शोध मार्गदर्शक डॉ.भावना दीक्षित, एसोसिएट प्रोफेसर, वानिकी, वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर रहीं। उनके मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। विश्वविद्यालय में आयोजित खुली मौखिकी परीक्षा में डॉ. आकृति ने सफलतापूर्वक अपने शोध का प्रस्तुतिकरण किया, जिसके उपरांत उन्हें पीएच.डी. उपाधि प्रदान किए जाने की अनुशंसा की गई। डॉ. आकृति ताम्रकार की इस उपलब्धि पर उनके परिवार, मार्गदर्शकों और मित्रों के साथ ही रानू सहाय, कोमिला शर्मा और विनय वर्मा ने उन्हें अपनी शुभकामनाएँ दी हैं, और इसे अत्यंत गर्व का विषय बताया है।
डॉ आकृति को पी एच डी की उपाधि
हुआ नगर का नाम रोशन
Continue With Google
Comments (0)