मध्य प्रदेश के कटनी जिले स्थित शासकीय महाविद्यालय बरही में हाल ही में 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) अभियान के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपनी दैनिक जीवनशैली में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना था।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. त्रिपाठी के कुशल मार्गदर्शन, प्रभारी डॉ. एस. एस. धुर्वे के निर्देशन और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई एवं इको क्लब के प्रभारी डॉ. अरविंद सिंह के नेतृत्व में यह आयोजन पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने न केवल छात्र-छात्राओं को बल्कि उपस्थित सभी बुद्धिजीवियों को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने का संदेश दिया।
पर्यावरण संरक्षण: एक नैतिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का महत्व
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं इको क्लब प्रभारी डॉ. अरविंद सिंह ने 'मिशन लाइफ' की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण एवं प्रकृति को संरक्षित और सुरक्षित रखना हम सभी का न केवल प्रथम दायित्व है, बल्कि यह हमारी एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है; इसके लिए जनभागीदारी अत्यंत अनिवार्य है।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले छोटे-छोटे मगर प्रभावशाली बदलावों के बारे में विस्तार से समझाया:
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संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग: पानी, बिजली, गैस तथा अन्य प्राकृतिक ईंधनों का कम से कम और आवश्यकतानुसार ही प्रयोग करना।
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सतत परिवहन: व्यक्तिगत वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।
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प्लास्टिक मुक्त जीवन: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से त्यागकर कपड़ों या जूट से बने थैलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना।
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वृक्षारोपण और देखभाल: न केवल पेड़ लगाना, बल्कि उनकी उचित देखभाल करना ताकि वे बड़े होकर एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन सकें।
पारिस्थितिकी तंत्र में वन्यजीवों की भूमिका
डॉ. अरविंद सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर प्राणी का जीवन अनमोल है और प्रकृति में हर जीव का अपना एक विशेष महत्व है। उन्होंने समझाया कि विभिन्न जीव-जंतु और पेड़-पौधे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के अभिन्न अंग हैं। आहार श्रृंखला (Food Chain) की स्थिरता बनाए रखने के लिए हर प्राणी का अस्तित्व अत्यंत आवश्यक है। हमें उनके प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है और हमें उनके आवास तथा भोजन की रक्षा व संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। यह संदेश केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने वन्यजीवों के संरक्षण पर भी गहरा प्रभाव डाला।
नागरिकों की सहभागिता पर विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम में महाविद्यालय के अन्य वरिष्ठ प्राध्यापकों ने भी अपने विचार साझा किए:
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डॉ. रश्मि त्रिपाठी: उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय निकायों के साथ-साथ हर आम नागरिक की सक्रिय सहभागिता जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम पर्यावरण को नुकसान होते देख मूकदर्शक बने रहेंगे, तो हमें इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने होंगे, जो किसी भी देश या समाज के भविष्य के लिए घातक सिद्ध होंगे।
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डॉ. सुनीता सिंह: उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए हमें इन दोनों दिशाओं में साथ मिलकर काम करना होगा।
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डॉ. के. के. विश्वकर्मा: उन्होंने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल कानूनी कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और प्रकृति के बीच सदियों से चले आ रहे सामंजस्य को बनाए रखने की एक संयुक्त जिम्मेदारी है।
शपथ और भविष्य की राह
कार्यक्रम के अंतिम चरण में, उपस्थित सभी प्राध्यापकों, स्टाफ सदस्यों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं पर्यावरण के प्रति जागरूक रहेंगे, बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी इस अभियान से जोड़ेंगे।
इस सार्थक कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राकेश दुबे द्वारा किया गया और अंत में आभार प्रदर्शन सुश्री प्रियंका तोमर ने किया। आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. त्रिपाठी सहित डॉ. अरविन्द सिंह, डॉ. रश्मि त्रिपाठी, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. के. के. विश्वकर्मा, डॉ. राकेश दुबे, मनोज चौधरी, सौरभ तिवारी, अब्दुल बारी, सुनील कुमार कहार, डॉ. के. के. निगम, डॉ. रूपा शर्मा, डॉ. अरविन्द शुक्ला, पवन दुबे, दीपक मिश्रा, डॉ. चंद्रभान विश्वकर्मा, शंकर सिंह, महिमा तिवारी, आशीष तिवारी, अजय सेन, गणेश प्रजापति, राजेश्वरी मिश्रा एवं महाविद्यालय का अन्य स्टाफ तथा रा. से. यो. के स्वयंसेवक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह जागरूकता कार्यक्रम बरही महाविद्यालय में पर्यावरण के प्रति एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत का प्रतीक है। शिक्षा के केंद्रों से शुरू हुई यह पहल निश्चित रूप से समाज में एक बड़ी क्रांति ला सकती है, जहाँ प्रकृति का सम्मान करना जीवन का मुख्य हिस्सा बन जाए।
image source: https://katni.mpinfo.org
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