उमरिया: उमरिया जिले के जिला शिक्षा केंद्र में सहायक परियोजना समन्वयक मोबिलाइजेशन एवं वित्त शाखा की व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला कार्यालय के कुछ तथाकथित विभागीय मठाधीशों ने इस व्यवस्था को चुनौती दी है, जिससे विभागीय छवि पर संकट उत्पन्न हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, मीडिया में भ्रामक जानकारी देकर कार्यालय की बागडोर अपने हाथों में रखने का प्रयास किया जा रहा है। विभागीय गुप्त जानकारियों को मीडिया में लीक कर विभाग की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रकरण की वास्तविकता
जांच में यह सामने आया है कि सहायक परियोजना समन्वयक मोबिलाइजेशन का पद पिछले दो वर्षों से रिक्त था। इसे भरने के लिए कार्यालय के अन्य सहायक परियोजना समन्वयक को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। हालाँकि, उनके पास दिव्यांग हॉस्टल का भी प्रभार था, जिससे कार्य प्रभावित हो रहे थे।
इस स्थिति के समाधान के लिए, पूर्व में जनपद शिक्षा केंद्र करकेली में पदस्थ रहे बीएसी की सहमति एवं अनुभव के आधार पर एक अनुभवी व्यक्ति को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया। तत्कालीन कलेक्टर श्री जैन द्वारा सत्र समाप्ति के बाद आदेश जारी करने को कहा गया था। नवीन सत्र के आरंभ पर, फाइल पुनः प्रस्तुत की गई और अनुमोदन प्राप्त हुआ।
वित्त शाखा का प्रभार
सहायक परियोजना समन्वयक वित्त का अतिरिक्त प्रभार श्री संतोष कुमार गौतम के आकस्मिक निधन के बाद कार्यालय के सहायक परियोजना समन्वयक इ&आर को दिया गया। पूर्व में स्वर्गीय श्री गौतम को भी यह प्रभार व्यवस्था के रूप में ही सौंपा गया था।
लेखापाल पर लगे आरोप निराधार
मीडिया रिपोर्ट्स में लेखापाल पर जेम पोर्टल से खरीदी के आरोप लगाए गए हैं, जो कि निराधार हैं। सभी खरीदारी एम.आई.एस शाखा के अधीन है। छात्रावास के लेखापाल के प्रभार को राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के निर्देशानुसार ही किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि मीडिया में प्रकाशित खबरें पूर्णतः भ्रामक हैं और कार्यालय के ही अपडाउनर कर्मचारी द्वारा पूर्व की भांति विभाग की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया है।
निष्कर्ष: उमरिया जिला शिक्षा केंद्र में चल रहे विवाद का उद्देश्य विभागीय कार्यों को बाधित करना प्रतीत होता है। विभागीय अधिकारियों को इस मामले में सजग रहकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

Continue With Google
Comments (0)