आमला। शहर में मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से किए जा रहे डिवाइडर एवं सेंटर लाइट निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। पहले डिवाइडर निर्माण और सेंटर लाइट पोल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे, वहीं अब सेंटर लाइट के लिए बिछाई जा रही विद्युत केबल में भी स्वीकृत तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा स्वीकृत डीपीआर (DPR) में सेंटर लाइट व्यवस्था के लिए 4-कोर, 25 वर्ग मिमी (25 Sq.mm) आर्मर्ड विद्युत केबल का उपयोग प्रस्तावित किया गया था। आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा इसके स्थान पर 3.5-कोर केबल बिछाई जा रही है, जो स्वीकृत तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप नहीं है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो भविष्य में विद्युत आपूर्ति, रखरखाव, लोड क्षमता और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

*स्वीकृत मानकों से समझौते का आरोप*

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण एजेंसी ने डीपीआर के विपरीत सामग्री का उपयोग किया है तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि परियोजना में उपयोग की गई केबल, सेंटर लाइट पोल एवं अन्य सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी एवं लैब जांच कराई जाए और पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

*पहले पोल और डिवाइडर, अब केबल पर भी उठे सवाल*

इस परियोजना को लेकर इससे पहले भी सेंटर लाइट पोल की गुणवत्ता तथा डिवाइडर निर्माण में कथित रूप से मानकों से कम सामग्री उपयोग किए जाने के आरोप सामने आ चुके हैं। कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। अब केबल संबंधी शिकायत सामने आने से परियोजना एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है।

*लाखों की परियोजना, फिर भी गुणवत्ता पर सवाल*

शहरवासी नितिन एवं अमित का कहना है कि सरकार नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि स्वीकृत मानकों से हटकर सामग्री का उपयोग किया जा रहा है तो यह जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

*अधिकारियों की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल*

निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी नगर पालिका और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की है। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद अब तक विस्तृत जांच रिपोर्ट या सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आने से लोगों में असंतोष है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो भविष्य में इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।

*इनका कहना*

"संबंधित ठेकेदार को केबल बदलने के निर्देश दिए गए हैं।"

*— योगेश आनेराव, उपयंत्री, नगर पालिका आमला*