आमला। आमला के चर्चित रंजिता यादव आत्महत्या प्रकरण में ससुराल पक्ष को बड़ा झटका लगा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) संतोष चौहान की अदालत ने मृतका के ससुर सुरेंद्र यादव, सास पुष्पा यादव और देवरानी मुस्कान यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए तीनों आरोपियों को अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया।
रंजिता यादव 3 जुलाई को अपने घर के बाथरूम में फंदे पर लटकी मिली थीं। परिजनों द्वारा अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। घटना के बाद मायके पक्ष ने ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। पुलिस जांच के बाद 8 जुलाई को आमला थाने में अपराध क्रमांक 287/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 एवं 3(5) में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला दर्ज किया गया।
*बचाव पक्ष ने मानसिक बीमारी का दिया हवाला*
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि रंजिता लंबे समय से डिप्रेशन, एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग जैसी मानसिक समस्याओं से पीड़ित थीं तथा उनका इलाज इंदौर और नागपुर में चल रहा था। बचाव पक्ष का कहना था कि ससुराल पक्ष ने कभी प्रताड़ित नहीं किया और आत्महत्या उनकी मानसिक स्थिति के कारण हुई।
*अभियोजन की दलीलों से सहमत दिखी अदालत*
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मामला गंभीर है और आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी गिरफ्तारी से बच रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
*एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं, लोगों में चर्चा*
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 8 जुलाई को एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी? थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर का कहना है कि आरोपी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि, अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि जब आरोपियों को न्यायालय से राहत नहीं मिली, तो उनकी गिरफ्तारी कब तक होगी। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है।
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