बालाघाट जिले में सुशासन और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने 9 जून को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) के अंतर्गत राजस्व विभाग से संबंधित उन शिकायतों की व्यक्तिगत सुनवाई की गई, जो 250 दिनों से अधिक समय से लंबित थीं। इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से अटके हुए प्रकरणों का न केवल त्वरित निराकरण करना था, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करना था।

बैठक के दौरान अपर कलेक्टर श्री डी.पी. बर्मन एवं अधीक्षक भू-अभिलेख श्री कृष्णा नायर की उपस्थिति में कलेक्टर ने एक-एक शिकायतकर्ता का पक्ष सुना। उन्होंने राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमों के दायरे में रहकर शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करें और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें।

लंबित शिकायतों का विस्तृत विवरण और प्रशासनिक कार्रवाई

कलेक्टर मृणाल मीना द्वारा ली गई इस समक्ष सुनवाई में विभिन्न तहसीलों से आए प्रकरणों पर गहन चर्चा हुई। प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाइयों का विवरण निम्नलिखित है:

  • खैरलांजी तहसील (ग्राम मिरगपुर): संतोष मेश्राम ने आबादी भूमि का सर्वे ठीक से न होने की शिकायत की थी। यह शिकायत 410 दिनों से लंबित थी। सुनवाई के दौरान पटवारी और राजस्व निरीक्षक से वस्तुस्थिति की जानकारी ली गई, जिसके बाद शिकायत को बंद करने के निर्देश दिए गए।

  • बालाघाट तहसील (ग्राम टेकाडी): नवींद्र सिंह ठाकुर की भूमि सीमांकन की शिकायत 364 दिनों से लंबित थी। जांच में पाया गया कि पटवारी द्वारा सीमांकन पहले ही किया जा चुका है, लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत बंद नहीं की जा रही थी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब दोबारा सीमांकन नहीं होगा, जिसके बाद शिकायत को बंद कर दिया गया।

  • लांजी तहसील (ग्राम बिरनपुर): घनश्याम चौधरी ने अपनी भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाने की शिकायत की थी, जो 324 दिनों से लंबित थी। इस मामले में पटवारी और राजस्व निरीक्षक द्वारा गंभीर लापरवाही बरतने पर उनकी एक-एक वेतनवृद्धि (Increment) रोकने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए और शिकायत का निपटारा किया गया।

  • लालबर्रा तहसील (ग्राम सोनेवानी): ललिता कुमरे द्वारा विस्थापन प्रक्रिया में मुआवजा न मिलने की 300 दिन पुरानी शिकायत दर्ज थी। जांच में पाया गया कि विस्थापन की पात्रता तिथि से पूर्व ही उनका विवाह दूसरे जिले में हो चुका था, इसलिए वे अपात्र पाई गईं। उन्हें स्थिति से अवगत कराकर शिकायत बंद कर दी गई।

अन्य तहसीलों में त्वरित निराकरण

सुनवाई के दौरान बैहर तहसील के ग्राम गढ़ी के रमेश राज झारिया एवं लामता के मनीष की 'किसान सम्मान निधि' से संबंधित शिकायतों का समाधान किया गया। इसके अतिरिक्त कटंगी के लेखराम डहरवाल की ऋण पुस्तिका में खसरा नंबर न जुड़ने और किरनापुर के कमल बाहे की जमीन पर कब्जा न मिलने संबंधी प्रकरणों को भी अधिकारियों की मौजूदगी में निपटाकर बंद कराया गया।

सुशासन और जवाबदेही की ओर कदम

बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना की यह पहल प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक उदाहरण है। अक्सर देखा गया है कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतें महीनों तक फाइलों में दबी रहती हैं। ऐसे में कलेक्टर का स्वयं व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करना और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना (जैसा कि लांजी के मामले में देखा गया), यह दर्शाता है कि बालाघाट जिला प्रशासन नागरिकों की समस्याओं को लेकर अत्यंत संवेदनशील है।

निष्कर्ष

बैठक में यह संदेश स्पष्ट दिया गया कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाना होगा। सीएम हेल्पलाइन केवल एक पोर्टल नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए शासन से जुड़ने का एक माध्यम है। लंबित शिकायतों को बंद करने की यह प्रक्रिया जिला प्रशासन की कार्यकुशलता और पारदर्शिता को प्रदर्शित करती है। आने वाले समय में भी ऐसी समीक्षा बैठकों का दौर जारी रहेगा ताकि जिले में जनता को न्याय और राहत मिल सके।

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