बालाघाट। न्याय तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बालाघाट जिला जेल में “लीगल एड हेल्प डेस्क” का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह पहल राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली तथा म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (MPSLSA), जबलपुर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्रियान्वित की गई है।

23 मई 2026 का दिन बालाघाट के न्यायिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब इस हेल्प डेस्क का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालाघाट, प्राणेष कुमार प्राण के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल जेल प्रशासन और न्यायपालिका के बीच समन्वय को मजबूत किया है, बल्कि बंदियों और उनके परिवारों के लिए न्याय के द्वार और अधिक सुगम बना दिए हैं।

हेल्प डेस्क का उद्देश्य और महत्व

कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्राणेष कुमार प्राण ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि इस हेल्प डेस्क की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बंदियों के परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि जेल में बंद व्यक्ति के परिजन अपने प्रियजनों के प्रकरणों की स्थिति जानने के लिए भटकते रहते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में वे परेशान होते हैं। अब इस हेल्प डेस्क के माध्यम से उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त होगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब परिजन यदि अपने बंदी के मामले की अद्यतन जानकारी (Status) से अनभिज्ञ हैं, तो उन्हें इधर-उधर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह हेल्प डेस्क उन्हें उनके मामले से संबंधित सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगी। इस डेस्क पर डिफेंस काउंसल (Defence Counsel) और पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) की स्थायी ड्यूटी लगाई गई है, जो आने वाले परिवारजनों को न केवल विधिक सलाह देंगे, बल्कि आवश्यक विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी उनका मार्गदर्शन करेंगे।

जेल परिसर में सघन निरीक्षण और संवाद

हेल्प डेस्क के उद्घाटन के उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिला जेल बालाघाट का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और बंदियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बंदियों के परिजनों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की। प्रधान जिला न्यायाधीश ने बहुत ही संवेदनशील तरीके से परिजनों से उनके प्रकरणों के बारे में जानकारी ली और उन्हें होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से पूछा।

परिजनों से सीधे संवाद ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि न्यायपालिका उनके साथ है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बंदियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

विधिक जागरूकता शिविर: बंदियों के लिए एक मार्गदर्शिका

हेल्प डेस्क के उद्घाटन के साथ ही जिला जेल बालाघाट में एक वृहद “विधिक जागरूकता शिविर” का भी आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

शिविर में विशेषज्ञों द्वारा निम्नलिखित विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई:

  1. निशुल्क विधिक सहायता अधिवक्ता योजना: पात्र बंदियों को शासन द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया।

  2. प्ली बार्गेनिंग (Plea Bargaining): कम गंभीर अपराधों में सौदेबाजी के माध्यम से मामलों का शीघ्र निराकरण।

  3. बंदियों के अधिकार: जेल में रहने के दौरान मिलने वाले मानवाधिकार और कानूनी संरक्षण।

  4. नालसा नशा पीड़ितों के लिए विधिक सहायता योजना: नशीले पदार्थों के सेवन से प्रभावित व्यक्तियों के लिए विशेष विधिक प्रावधान।

  5. जेल लीगल एड क्लीनिक: जेल के भीतर ही उपलब्ध कानूनी परामर्श केंद्र की कार्यप्रणाली।

  6. अपील संबंधी प्रावधान: निचली अदालत के फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय में अपील करने की प्रक्रिया और समय-सीमा।

कार्यक्रम की गरिमा और उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर न्यायिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रथम जिला न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह, जिला विधिक सहायता अधिकारी जीतेन्द्र मोहन धुर्वे, जेल अधीक्षक रामलाल सहलाम और चीफ एलएडीसीएस (LADCS) बसंत डहाके ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त, न्यायालय, जेल और विधिक सेवा प्राधिकरण का समस्त स्टाफ तथा पैरालीगल वॉलंटियर्स भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल हुए।

सभी ने इस हेल्प डेस्क को सफल बनाने और आम जनता तक न्याय पहुंचाने का संकल्प लिया।

निष्कर्ष

बालाघाट जिला जेल में इस “लीगल एड हेल्प डेस्क” की स्थापना न्याय सुलभता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह केंद्र न केवल कानूनी जटिलताओं को कम करेगा, बल्कि बंदियों के परिजनों में कानून के प्रति विश्वास भी बढ़ाएगा। यह प्रयास स्पष्ट करता है कि न्याय केवल न्यायालय के कक्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

यह डेस्क आने वाले समय में बंदियों के शीघ्र न्याय और उनके परिवारों को कानूनी तनाव से मुक्ति दिलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधिक सेवा प्राधिकरण का यह प्रयास बालाघाट के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो अब बिना किसी झिझक या डर के विधिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

Image Source: https://balaghat.mpinfo.org