बालाघाट। बालाघाट जिले के विभिन्न सरकारी संस्थानों को आत्मनिर्भर और ऊर्जा कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 26 शासकीय भवनों पर रेस्को (RESCO) मॉडल के माध्यम से सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना के कार्यान्वयन हेतु गुरुवार, 18 जून को कलेक्टर श्री मृणाल मीना की उपस्थिति में एक औपचारिक अनुबंध संपन्न हुआ। यह समझौता संबंधित विभागीय अधिकारियों, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम और सोलर पैनल स्थापित करने वाली अधिकृत कंपनी के मध्य किया गया है।

लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं

इस बैठक के दौरान कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने परियोजना की व्यापक रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिले में सोलर पैनल की स्थापना के लिए कुल 78 शासकीय भवनों को चिन्हित किया गया है। वर्तमान में 26 भवनों के साथ अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शेष 52 भवनों पर भी सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना है।

अनुबंध की प्रमुख शर्तें और उत्तरदायित्व

सोलर पैनल स्थापना से संबंधित इस अनुबंध में रखरखाव को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं, जो सरकारी विभागों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे:

  • दीर्घकालिक रखरखाव: अनुबंधित कंपनी द्वारा आगामी 25 वर्षों तक इन सोलर पैनलों के संचालन और उनके पूर्ण रख-रखाव (Maintenance) की जिम्मेदारी निभाई जाएगी।

  • प्रमुख भवन: जिन 26 सरकारी भवनों को प्रथम चरण में शामिल किया गया है, उनमें जिला चिकित्सालय, पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सांदीपनि विद्यालय, जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास और आईटीआई भवन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान प्रमुख हैं।

वित्तीय लाभ और ऊर्जा संरक्षण का आधार

सोलर पैनल की स्थापना से सरकारी विभागों को बिजली बिलों के भुगतान में बड़ी राहत मिलेगी। इस प्रणाली की कार्यप्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • बिजली बिल में समायोजन: सौर ऊर्जा से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में प्रवाहित किया जाएगा। इसके उपरांत, उत्पादित बिजली के मूल्य का समायोजन संबंधित भवनों के वास्तविक बिजली बिलों में किया जाएगा, जिससे विभागों के ऊर्जा व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

  • पर्यावरण संरक्षण: यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टि से बचत का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के सरकारी संकल्प को भी मजबूत करेगी।

  • स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन: नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से सरकारी संस्थानों की ऊर्जा लागत में कमी आएगी और जिले को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायता मिलेगी।

निष्कर्ष

बालाघाट जिला प्रशासन की यह अनूठी पहल शासकीय भवनों को ऊर्जा के क्षेत्र में सक्षम बनाने और जनता के पैसे (बिजली बिल पर होने वाला व्यय) को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। कलेक्टर श्री मृणाल मीना के दिशा-निर्देशों में चल रही यह परियोजना आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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