मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड स्थित ग्राम टेकाड़ी-म के एक प्रगतिशील कृषक फत्तेराज क्षीरसागर ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर एक नई मिसाल पेश की है। आज के दौर में जब खेती में मजदूरी और समय का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, तब फत्तेराज ने नवाचार करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म और उन्नत मशीनीकरण का सहारा लिया है। उन्होंने अपनी 5.5 एकड़ भूमि पर डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) पद्धति का उपयोग करते हुए सुपर सीडर मशीन के माध्यम से धान की बुवाई की है, जो पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

डिजिटल क्रांति: जे-फार्म ऐप का सफल उपयोग

फत्तेराज क्षीरसागर की इस सफलता के पीछे एक प्रमुख कारक 'जे-फार्म' (J-Farm) ऐप का प्रभावी उपयोग है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और किसानों तक तकनीकी सहायता पहुँचाने के लिए विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्होंने अपना पंजीयन कराया और सुपर सीडर मशीन की ऑनलाइन बुकिंग सुनिश्चित की।

  • आसान बुकिंग: ऐप के माध्यम से बुकिंग करने पर मशीन मालिक द्वारा त्वरित स्वीकृति दी गई।

  • समयबद्ध सुविधा: बुकिंग स्वीकृत होने के बाद निर्धारित समय पर मशीन सीधे फत्तेराज के खेत तक पहुँच गई।

  • मार्गदर्शन की भूमिका: इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री वंदना धुर्वे ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर फत्तेराज को सुपर सीडर के संचालन और डीएसआर पद्धति के लाभों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

डीएसआर पद्धति: लागत और श्रम में भारी बचत

परंपरागत धान की रोपाई पद्धति की तुलना में फत्तेराज द्वारा अपनाई गई डीएसआर (Direct Seeded Rice) पद्धति के कई बहुआयामी लाभ सामने आए हैं। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक ने खेती को न केवल आसान बनाया है, बल्कि उनके मुनाफे में भी वृद्धि की है।

  1. मजदूरी में कमी: परंपरागत रोपाई में श्रमिकों की अत्यधिक आवश्यकता होती थी, जो कि अब न्यूनतम हो गई है।

  2. समय की बचत: सुपर सीडर मशीन के उपयोग से 5.5 एकड़ के पूरे क्षेत्र में बुवाई का कार्य बहुत ही कम समय में संपन्न हो गया।

  3. लागत में उल्लेखनीय गिरावट: चूंकि मजदूरों पर होने वाला खर्च और समय का अपव्यय कम हुआ, इसलिए कुल कृषि लागत में भारी कमी दर्ज की गई है।

कृषि विशेषज्ञों की राय: क्यों बेहतर है यह तकनीक?

बालाघाट के कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डीएसआर पद्धति धान उत्पादन की एक अत्यंत उन्नत और वैज्ञानिक तकनीक है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • संसाधन संरक्षण: इस पद्धति से पानी की काफी बचत होती है, जो पर्यावरण और भविष्य की खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  • उत्पादन में वृद्धि: फसल की बेहतर बढ़वार और मिट्टी की संरचना के अनुकूल होने के कारण अधिक उत्पादन की प्रबल संभावनाएं बनी रहती हैं।

  • खेती का आधुनिकीकरण: यह पद्धति किसानों को परंपरागत खेती के झंझटों से मुक्त कर वैज्ञानिक खेती की ओर ले जाती है।

आधुनिक तकनीक का संदेश: किसानों के लिए प्रेरणा

फत्तेराज क्षीरसागर का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही तालमेल बिठा लें, तो खेती का व्यवसाय निश्चित रूप से लाभकारी बन सकता है। डिजिटल इंडिया और कृषि यंत्रीकरण के मिशन को धरातल पर उतारते हुए, फत्तेराज ने बालाघाट जिले में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है।

उनका कहना है कि जे-फार्म जैसे प्लेटफॉर्म ने मशीनों की उपलब्धता को बहुत सरल कर दिया है। अब किसानों को कृषि यंत्रों के लिए दर-दर भटकने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक क्लिक के माध्यम से वे अपनी सुविधा के अनुसार यंत्र प्राप्त कर रहे हैं। फत्तेराज की इस पहल को कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा भी जिले के अन्य किसानों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

भविष्य की कृषि की ओर कदम

बालाघाट जिले में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में टेकाड़ी-म के इस किसान की पहल एक मील का पत्थर साबित हो रही है। आज जब जलवायु परिवर्तन और बदलती कृषि परिस्थितियों के बीच उत्पादकता बनाए रखना कठिन होता जा रहा है, तब सुपर सीडर और डीएसआर पद्धति जैसे विकल्प ही खेती को बचाने का जरिया हैं। फत्तेराज क्षीरसागर जैसे प्रगतिशील कृषक आज उस 'नए भारत' की तस्वीर हैं, जो आत्मनिर्भरता और नवाचार के साथ अपने खेतों को सींच रहे हैं।

उनकी यह सफलता न केवल उनके आर्थिक स्तर में सुधार लाएगी, बल्कि आसपास के अन्य किसानों को भी तकनीक के प्रति जागरूक करेगी, जिससे पूरे कटंगी क्षेत्र और बालाघाट जिले की कृषि समृद्धि में गुणात्मक वृद्धि संभव है।

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