बालाघाट जिला प्रशासन ने किसानों के हितों की रक्षा और कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त कदम उठाया है। बुधवार को लालबर्रा क्षेत्र में की गई औचक छापामार कार्रवाई के दौरान तीन प्रमुख कृषि केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। एसडीएम वारासिवनी श्री कार्तिकेय जायसवाल के नेतृत्व में राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने इन केंद्रों के अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण किया, जिसके बाद प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

किन केंद्रों पर हुई कार्रवाई और क्या पाई गई खामियां?

प्रशासनिक टीम ने लालबर्रा क्षेत्र के प्रमुख कृषि प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान तीन संस्थानों में नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया:

  1. मेसर्स केशव बीज भंडार, मानपुर: जाँच में पाया गया कि केंद्र की स्टॉक पंजी पूरी तरह से अधूरी थी। साथ ही, संस्थान द्वारा बिना वैध लाइसेंस के सब्जी बीजों का क्रय-विक्रय किया जा रहा था, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।

  2. मेसर्स महामाया कृषि केंद्र, लालबर्रा: इस केंद्र पर व्यवसाय का संचालन करने के लिए आवश्यक 'अतिरिक्त विक्रेता प्रमाण-पत्र' का पंजीयन ही नहीं कराया गया था। इसके अतिरिक्त, केंद्र पर न तो स्टॉक पंजी का संधारण किया गया था और न ही अन्य अनिवार्य अभिलेख मौके पर उपलब्ध पाए गए।

  3. मेसर्स बिसेन कृषि केंद्र, लालबर्रा: इस प्रतिष्ठान पर सबसे बड़ी खामी यह थी कि विक्रय स्थल पर बीजों के स्टॉक और उनकी निर्धारित बिक्री दर (रेट लिस्ट) का प्रदर्शन ही नहीं किया गया था, जिससे किसानों को गुमराह किए जाने की आशंका बनी रहती है।

कानूनी प्रावधान और प्रशासन की सख्ती

प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन तीनों प्रतिष्ठानों द्वारा की गई अनियमितताएं सीड एक्ट, 1966 तथा सीड (कंट्रोल) ऑर्डर, 1983 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। इन अधिनियमों के तहत यह अनिवार्य है कि कृषि केंद्र अपने पास स्टॉक, लाइसेंस, बिल बुक और रेट लिस्ट जैसी सभी जरूरी जानकारियां पारदर्शी तरीके से रखें।

एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल ने कहा कि जाँच में सामने आई इन गंभीर त्रुटियों के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार की औचक जांच का सिलसिला जारी रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक ही प्राप्त हों।

निरीक्षण दल की भूमिका और प्रशासनिक मुस्तैदी

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण अभियान में प्रशासनिक एवं विभागीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय टीम शामिल थी। इसमें मुख्य रूप से:

  • एसडीएम श्री कार्तिकेय जायसवाल

  • तहसीलदार श्री कन्हैयालाल टेकाम

  • बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक निरीक्षक सुश्री प्रीति पंद्राम

  • कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती प्रतिभा रंगारे एवं श्री उत्तम रंगारे

  • संबंधित क्षेत्र के पटवारी

इस टीम ने मौके पर जाकर बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों के भंडारण, लाइसेंस, बिल बुक और डिलीवरी चालान की एक-एक फाइल का बारीकी से परीक्षण किया। अधिकारियों का यह सम्मिलित प्रयास बालाघाट जिले में कृषि आदानों के व्यापार को स्वच्छ और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

किसानों के लिए संदेश: गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर

कृषि प्रधान जिले होने के नाते, बालाघाट में किसानों का हित सर्वोपरि है। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी किसानों से अपील की है कि वे किसी भी केंद्र से खरीदारी करते समय बिल अवश्य लें और यदि उन्हें स्टॉक या मूल्य को लेकर कोई संदेह हो, तो तत्काल कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

यह कार्रवाई जिले के अन्य कृषि विक्रेताओं के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है। यदि कोई व्यापारी किसानों को घटिया बीज या उर्वरक बेचते हुए या नियमों के विपरीत व्यापार करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उसके लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। जिला प्रशासन की इस मुहिम से स्पष्ट है कि किसानों की मेहनत की कमाई और उनकी फसल के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

निष्कर्ष

लालबर्रा की यह कार्रवाई बालाघाट प्रशासन की सतर्कता और किसानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। औचक निरीक्षण की यह प्रक्रिया न केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाती है, बल्कि बाजार में एक स्वस्थ और पारदर्शी प्रतिस्पर्धा का वातावरण भी सुनिश्चित करती है। आने वाले समय में भी प्रशासन की यह सक्रियता जारी रहने की उम्मीद है, ताकि हर किसान को सही सामग्री मिले और खेती-किसानी का काम सुरक्षित व लाभप्रद बना रहे।

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