मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कृषि को एक नया और वैज्ञानिक स्वरूप देने के प्रयास निरंतर जारी हैं। विशेष रूप से लालबर्रा विकासखंड में कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों की मुहिम अब धरातल पर रंग ला रही है। जिले में जल संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित 'खेत बचाओ अभियान' और 'धरती माता बचाओ अभियान' के अंतर्गत किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस यानी धान की सीधी बुवाई) पद्धति के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 10 जून को लालबर्रा विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से बड़े पैमाने पर धान की बुवाई का प्रदर्शन किया गया, जिसे स्थानीय किसानों का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ है।

डीएसआर पद्धति: आधुनिक कृषि का भविष्य डीएसआर (Direct Seeded Rice) पद्धति वर्तमान समय में धान की खेती का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका माना जा रहा है। उप संचालक कृषि, श्री फूलसिंह मालवीय के नेतृत्व में कृषि विभाग लगातार किसानों को इस तकनीक की बारीकियां समझा रहा है। इस पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नर्सरी तैयार करने, पौधों की रोपाई करने जैसे श्रमसाध्य कार्यों की आवश्यकता नहीं होती। इससे जल की भारी बचत होती है, श्रमिकों पर होने वाला खर्च कम होता है और धान की फसल समय से पहले पककर तैयार हो जाती है।

लालबर्रा विकासखंड में व्यापक प्रदर्शन 10 जून को लालबर्रा विकासखंड के तीन प्रमुख ग्रामों में सुपर सीडर मशीन का सफल प्रदर्शन किया गया, जहाँ कुल 15 एकड़ क्षेत्र में धान की बुवाई की गई:

  • ग्राम पंचायत बल्हारपुर: यहाँ प्रगतिशील कृषक श्री सुखचंद बिसेन के खेतों में 4 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर तकनीक से बुवाई की गई।

  • ग्राम पाथरी: यहाँ चार किसानों—सुनील ठाकरे, राधेश्याम सहारे, यशवंत पटले एवं संपता बाई के खेतों में 6 एकड़ के बड़े भूभाग पर बुवाई का प्रदर्शन किया गया।

  • ग्राम पंचायत पांढरवानी: यहाँ कृषकों को प्रोत्साहित करते हुए श्रीमती पवनरेखा वासनिक के 5 एकड़ के खेत में सुपर सीडर मशीन की सहायता से धान की बुवाई कराई गई।

प्रशिक्षण और जागरूकता के आयाम बुवाई के साथ-साथ आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभाग के अधिकारियों ने केवल तकनीकी जानकारी नहीं दी, बल्कि किसानों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं को भी समझा। चर्चा के मुख्य बिंदु रहे:

  1. उर्वरकों का संतुलित उपयोग: मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद का विवेकपूर्ण इस्तेमाल।

  2. पराली प्रबंधन: खेतों में पराली जलाने से होने वाले नुकसानों से किसानों को आगाह करना और सुपर सीडर जैसी मशीनों के माध्यम से फसल अवशेषों को खाद में बदलने की प्रक्रिया बताना।

  3. पर्यावरण संरक्षण: जलवायु परिवर्तन के दौर में कम पानी वाली फसलों और तकनीकों की ओर झुकाव बढ़ाना।

'धरती माता बचाओ अभियान' का संकल्प कृषि विभाग के अधिकारियों ने 'धरती माता बचाओ अभियान' के तहत किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि को रासायनिक जहर से मुक्त करें। उन्होंने बताया कि निरंतर रसायनों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता गिर रही है, जिसे जैविक और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से ही पुनः जीवित किया जा सकता है। किसानों ने भी इस तकनीक में रुचि दिखाई और माना कि सुपर सीडर मशीन के उपयोग से न केवल उनका खर्च बच रहा है, बल्कि खेत की जुताई और बुवाई एक ही बार में संपन्न हो रही है, जिससे समय की बड़ी बचत हो रही है।

कृषि विभाग की भविष्य की कार्ययोजना उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने किसानों को आश्वस्त किया कि विभाग जिले भर में इस पद्धति को एक आंदोलन की तरह आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि हर किसान डीएसआर पद्धति की उपयोगिता समझे। इसके लिए हम प्रदर्शनों के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करा रहे हैं।" विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती ही किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती है।

किसानों का उत्साह कार्यक्रम के अंत में किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। पाथरी और बल्हारपुर के किसानों ने बताया कि वे इस तकनीक को देखकर आश्चर्यचकित हैं कि कितनी सरलता से धान की बुवाई की जा सकती है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी नई तकनीकों के प्रदर्शन से उन्हें खेती में नया आत्मविश्वास मिला है।

यह पहल न केवल लालबर्रा विकासखंड के लिए एक मिसाल है, बल्कि पूरे बालाघाट जिले के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही है। आने वाले खरीफ सीजन में इस तकनीक के माध्यम से जिले की उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि होने की प्रबल संभावना है, जो किसानों की खुशहाली का नया मार्ग प्रशस्त करेगी।

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