बालाघाट। आज के दौर में जब युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरलांजी के एक युवा किसान ने कृषि के क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिखी है। एम.टेक (M.Tech) की उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पंकज कुमार ठाकरे ने पारंपरिक खेती की लीक से हटकर आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय से खेती को एक लाभकारी और आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
शिक्षित युवाओं के लिए प्रेरणा बना पंकज का कृषि मॉडल
हाल ही में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हरिचंद डहरिया और कृषि विस्तार अधिकारी वंदना धुर्वे ने पंकज ठाकरे के कृषि फार्म का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जब खेत में ककड़ी, उड़द, तिल और मेढ़ों पर लगे फलों के बाग देखे, तो वे भी दंग रह गए। अधिकारियों ने एकमत से माना कि पंकज द्वारा अपनाई गई पद्धतियां वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी हैं। पंकज का मानना है कि यदि कृषि में तकनीक का सही प्रयोग किया जाए, तो यह किसी भी कॉर्पोरेट नौकरी से अधिक संतोषजनक और मुनाफे वाला व्यवसाय हो सकता है।
सरकारी योजनाओं का सही और सटीक उपयोग
पंकज की सफलता के पीछे कृषि विभाग की योजनाओं का सही मार्गदर्शन और उनका प्रभावी क्रियान्वयन एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद जब उन्होंने पूर्णकालिक किसान बनने का फैसला किया, तो उनके सामने सिंचाई की सबसे बड़ी चुनौती थी। कृषि विभाग की योजनाओं के तहत उन्हें वर्ष 2025-26 में 'बलराम तालाब' निर्माण के लिए 80 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस तालाब ने उनके खेत के लिए जीवनदायिनी का काम किया। अब वे वर्ष के बारह महीने सिंचाई करने में सक्षम हैं, जिससे फसल चक्र को व्यवस्थित करना आसान हो गया है।
फसल विविधीकरण: जोखिम कम और मुनाफ़ा ज़्यादा
पंकज कुमार ठाकरे ने केवल एक या दो फसलों पर निर्भर रहने के बजाय 'फसल विविधीकरण' (Crop Diversification) को अपनाया है। उनके खेतों में वर्तमान में निम्नलिखित फसलें लहलहा रही हैं:
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नकदी फसल: ककड़ी की खेती, जिसमें ड्रिप सिंचाई का उपयोग हो रहा है।
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दलहन एवं तिलहन: उड़द और तिल (वीसीपी अंतर्गत) की खेती, जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक है।
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बागवानी (Horticulture): खेत की मेढ़ों पर आम, चीकू और नींबू के पौधे लगाए गए हैं। यह दीर्घकालिक निवेश के रूप में भविष्य में अतिरिक्त आय का बड़ा जरिया बनेंगे।
आधुनिक तकनीक का बेजोड़ संगम
पंकज के खेत की सबसे बड़ी विशेषता वहां इस्तेमाल हो रही तकनीकें हैं, जिन्होंने कृषि लागत को न्यूनतम कर दिया है:
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ड्रिप सिंचाई प्रणाली: ककड़ी की खेती में ड्रिप सिस्टम का उपयोग करने से पानी की भारी बचत हो रही है और उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँच रहे हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार आया है।
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सोलर पम्प का उपयोग: खेत में सोलर पम्प स्थापित कर उन्होंने ऊर्जा पर होने वाले खर्च को शून्य कर दिया है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिचालन लागत भी कम हुई है।
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वैज्ञानिक पद्धति: पारंपरिक कीटनाशकों के स्थान पर वे कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई तकनीकी सलाह का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित है।
कृषि विभाग का मार्गदर्शन और भविष्य की राह
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंकज जैसे किसान 'कृषि दूत' की भूमिका निभा रहे हैं। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हरिचंद डहरिया ने स्पष्ट किया कि विभाग का लक्ष्य प्रत्येक किसान को पारंपरिक खेती से निकालकर आधुनिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। पंकज कुमार ठाकरे का मॉडल यह सिद्ध करता है कि यदि किसान शिक्षित हो और सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर ले, तो कृषि घाटे का सौदा नहीं बल्कि समृद्धि का मार्ग है।
खैरलांजी के इस युवा किसान की सफलता आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। वे अपने खेत को एक 'स्मार्ट फार्म' की तरह चला रहे हैं। उनके कार्य को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब फसल विविधीकरण और आधुनिक उपकरणों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पंकज कुमार ठाकरे का यह सफर यह संदेश देता है कि आधुनिक कृषि केवल मेहनत का काम नहीं है, बल्कि यह एक कौशल और विज्ञान है। यदि सही नियोजन के साथ आगे बढ़ा जाए, तो बालाघाट का किसान भी वैश्विक स्तर की उत्पादकता प्राप्त कर सकता है।
Image Source: https://balaghat.mpinfo.org
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