बैतूल जिले में खरीफ मौसम 2026 के लिए फसलों को प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षित करने हेतु फसल बीमा अभियान का शुभारंभ किया गया है। कृषि विभाग और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के संयुक्त तत्वावधान में 1 जुलाई से "फसल बीमा माह" की शुरुआत हुई है, जो 31 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। जिला स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, बीमा कंपनी के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल बीमा के लाभों के प्रति जागरूक करना और उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है।

फसल बीमा के लिए निर्धारित प्रीमियम दरें (प्रति हेक्टेयर)

योजना के तहत खरीफ मौसम 2026 में अधिसूचित मुख्य फसलों के लिए प्रीमियम राशि का निर्धारण किया गया है, जो इस प्रकार है:

  • सोयाबीन: 850 रुपए प्रति हेक्टेयर

  • मक्का: 722 रुपए प्रति हेक्टेयर

  • धान (सिंचित): 838 रुपए प्रति हेक्टेयर

  • धान (असिंचित): 660 रुपए प्रति हेक्टेयर

  • अरहर: 740 रुपए प्रति हेक्टेयर

आवेदन कैसे करें?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अऋणी किसान (जिन्होंने बैंक से ऋण नहीं लिया है) नीचे दिए गए माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:

  • निकटतम बैंक शाखा या सहकारी समिति के माध्यम से।

  • अधिकृत चैनल या जन सेवा केंद्र (सीएससी) पर जाकर।

  • ऑनलाइन पोर्टल: कृषक स्वयं भी राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल www.pmfby.gov.in पर लॉग-इन कर आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवश्यक दस्तावेज

अऋणी किसानों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है:

  1. बैंक पासबुक की छायाप्रति।

  2. फसल बुवाई प्रमाण पत्र

  3. आधार कार्ड

  4. भूमि की बही

  5. शपथ पत्र: बटाईदार किसान या किराए पर ली गई भूमि के लिए संबंधित भूमि मालिक द्वारा शपथ पत्र देना अनिवार्य है।

जिला प्रशासन की अपील: जनभागीदारी से सुरक्षा

जिला प्रबंधक, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस ने बताया कि यह "फसल बीमा माह" जिले की समस्त तहसीलों और ग्राम पंचायत स्तरों पर आयोजित किया जाएगा। इस दौरान कृषि विस्तार अधिकारी घर-घर और खेत-खेत तक पहुँचकर किसानों को फसल बीमा के हित लाभों की जानकारी देंगे।

कलेक्टर एवं कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से आह्वान किया है कि वे 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें और अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना अपना बीमा समय रहते सुनिश्चित करें। यह योजना न केवल प्राकृतिक आपदाओं, जैसे अत्यधिक वर्षा या सूखे की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि कृषि में होने वाले अनिश्चित जोखिमों को भी कम करती है।

image source : https://betul.mpinfo.org