महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बालाघाट जिले में संचालित 'वन स्टॉप सेंटर' (One Stop Centre) में एस.एम. देव होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सरदार पटेल कैंपस के बीएचएमएस (BHMS) द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल 'फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी' (Forensic Medicine & Toxicology) विषय के व्यावहारिक अध्ययन और प्रायोगिक ज्ञान को मजबूत करने के उद्देश्य से संपन्न हुआ। वर्तमान समय में चिकित्सा के छात्रों के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक वास्तविकताओं, कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक सहायता प्रणालियों का जमीनी स्तर पर ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में यह भ्रमण मेडिकल छात्रों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिससे उन्हें समाज के संवेदनशील पहलुओं को नजदीक से जानने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली और समेकित सहायता प्रणाली

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वन स्टॉप सेंटर की संपूर्ण कार्यप्रणाली, कार्यालयीन प्रक्रियाओं तथा हिंसा या संकट से पीड़ित महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली समेकित (Integrated) सहायता के बारे में बेहद बारीकी से जानकारी दी गई। केंद्र के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि किस प्रकार संकट में फंसी महिलाओं को एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की सहायताएं पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ प्रदान की जाती हैं।

छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित प्रमुख सेवाओं और सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया गया:

  • मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counseling): घरेलू हिंसा, प्रताड़ना या किसी भी प्रकार के गंभीर मानसिक आघात से गुजर रही महिलाओं को भावनात्मक संबल प्रदान करने, उनके तनाव को कम करने और उनकी काउंसलिंग करने की पूरी प्रक्रिया।

  • कानूनी सहायता (Legal Aid): पीड़ित महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा अधिनियमों के प्रति जागरूक करना तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क कानूनी सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराना ताकि वे न्याय प्राप्त कर सकें।

  • चिकित्सकीय सेवाएं (Medical Support): पीड़ित महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण, प्राथमिक उपचार, चिकित्सीय देखरेख और आवश्यक मेडिकल लीगल औपचारिकताओं के लिए नजदीकी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करना।

  • पुलिस समन्वय (Police Coordination): सुरक्षा और थानों से संबंधित औपचारिकताओं के लिए पुलिस विभाग के साथ त्वरित तालमेल बिठाकर पीड़ित महिला की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना।

  • अस्थाई आश्रय (Temporary Shelter): संकटग्रस्त महिलाओं और उनके साथ आने वाले आश्रित बच्चों को सुरक्षित रूप से कुछ समय के लिए ठहरने, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने हेतु सुरक्षित आश्रय गृह की व्यवस्था।

विभिन्न महिला कल्याणकारी योजनाओं और हेल्पलाइंस की जानकारी

इस शैक्षणिक भ्रमण के अवसर पर विद्यार्थियों को महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं तथा आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों के बारे में भी व्यापक जानकारी प्रदान की गई। आधुनिक दौर में महिलाओं को त्वरित मदद पहुँचाने के लिए सरकार द्वारा कई मंच तैयार किए गए हैं, जिनकी जानकारी हर नागरिक और विशेषकर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को होना अनिवार्य है।

इस दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं और योजनाओं पर विशेष प्रकाश डाला गया:

  • वन स्टॉप सेंटर की बहुआयामी भूमिका: संकटग्रस्त महिलाओं को तात्कालिक राहत, चिकित्सा, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता पहुँचाने में केंद्र की कार्यशैली और इसके सफल परिणामों के बारे में बताया गया।

  • महिला हेल्पलाइन-181 (Women Helpline 181): आपातकालीन या संकट की स्थिति में देश या प्रदेश की किसी भी महिला द्वारा तुरंत सहायता प्राप्त करने के लिए इस 24x7 टोल-फ्री नंबर के उपयोग और इसके कार्य करने के तरीके की विस्तृत जानकारी दी गई।

  • जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन (DHEW): महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में इस जिला हब के उद्देश्यों, योजनाओं और उनके समग्र कल्याण में योगदान को समझाया गया।

प्रकरण पंजीयन से लेकर फॉलो-अप तक की पूरी प्रक्रिया

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को यह बहुत ही बारीकी और चरणबद्ध तरीके से समझाया गया कि किसी पीड़ित महिला का मामला प्राप्त होने से लेकर उसकी पूरी प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है। इस संपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक चक्र में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

  1. प्रकरण प्राप्ति एवं पंजीयन (Registration): पीड़ित महिला के केंद्र तक पहुँचने पर उसकी शिकायत या समस्या का पूरी संवेदनशीलता के साथ विधिवत पंजीयन किया जाता है।

  2. आवश्यक सेवाओं से जोड़ना (Service Linkage): महिला की तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार उसे स्वास्थ्य टीम, कानूनी सलाहकार या मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता से जोड़ा जाता है।

  3. विभागीय समन्वय (Inter-Departmental Coordination): विभिन्न संबंधित विभागों (जैसे महिला एवं बाल विकास, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, और न्यायपालिका) के साथ मिलकर सामूहिक और प्रभावी प्रयास किए जाते हैं।

  4. फॉलो-अप प्रक्रिया (Follow-up): सहायता प्रदान करने और प्रकरण के निराकरण के बाद भी महिला की स्थिति की नियमित निगरानी (Follow-up) की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अब पूरी तरह सुरक्षित है और समाज में सम्मानजनक जीवन जी रही है।

विद्यार्थियों की जिज्ञासाएं और विशेषज्ञों द्वारा समाधान

भ्रमण के अंत में एक अत्यंत रोचक और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें एस.एम. देव होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के बीएचएमएस के विद्यार्थियों ने महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा, लैंगिक अपराधों (Gender Crimes), पीड़ित सहायता तंत्र तथा वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक प्रश्न पूछे। केंद्र के विषय विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों के सभी संशयों का संतोषजनक और विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस चर्चा से विद्यार्थियों को न केवल उनके पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों को समझने में मदद मिली, बल्कि उनमें समाज सेवा और मानवीय दृष्टिकोण की भावना भी मजबूत हुई।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

बालाघाट जिले के वन स्टॉप सेंटर में आयोजित एस.एम. देव होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों का यह शैक्षणिक भ्रमण बेहद सफल, प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित हुआ है। इस व्यावहारिक अनुभव से विद्यार्थियों को न केवल उनके पाठ्यक्रम 'फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी' को समझने में बड़ी मदद मिली, बल्कि उनमें सामाजिक संवेदनाओं, महिला सुरक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कानूनी उत्तरदायित्वों की गहरी समझ भी विकसित हुई। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण भविष्य के चिकित्सा पेशेवरों को अधिक संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो कल को समाज के स्वास्थ्य और कल्याण में अपना उत्कृष्ट योगदान देंगे।

image source: https://balaghat.mpinfo.org