1. प्रस्तावना और मुख्य उद्देश्य

सुशासन, पारदर्शिता और आम नागरिकों को समय पर सरकारी सेवाओं का लाभ दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी मंशा के तहत पन्ना जिले में नागरिकों को समय सीमा में शासकीय सेवाओं का लाभ प्रदान करने के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। कलेक्टर एवं द्वितीय अपीलीय अधिकारी लोक सेवा गारंटी, ऊषा परमार द्वारा म.प्र. लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए एक बड़ी कार्रवाई की गई है। जिन अधिकारियों ने नागरिकों के आवेदनों का समय सीमा के भीतर निराकरण करने में लापरवाही बरती है, उन पर आर्थिक दंड (शास्ति) अधिरोपित किया गया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक अमले में जवाबदेही तय करने और भविष्य में कार्यों में कोताही न बरतने का एक कड़ा संदेश है।

2. अधिनियम के उल्लंघन पर अर्थदण्ड की कार्रवाई

पन्ना जिले में नागरिकों द्वारा विभिन्न लोक सेवाओं के लिए दिए गए आवेदनों के समय सीमा में निराकरण न होने के मामलों को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। कलेक्टर एवं द्वितीय अपीलीय अधिकारी लोक सेवा गारंटी ऊषा परमार ने म.प्र. लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 के तहत निर्धारित समय सीमा में नागरिक सेवाओं का लाभ प्रदान न करने वाले कुल 13 लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की है। इन सभी संबंधित अधिकारियों पर कुल 23 हजार 500 रूपए की शास्ति (अर्थदण्ड) अधिरोपित करने की औपचारिकता पूरी की गई है। प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि लोक कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं के वितरण में किसी भी प्रकार की हीला-हिला बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

3. पूर्व चेतावनी और प्रशासनिक समीक्षा

यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है, बल्कि इससे पहले भी प्रशासन स्तर पर पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। पूर्व में सभी संबंधित पदाभिहित अधिकारियों को समय सीमा बाह्य लंबित पड़े आवेदनों के त्वरित निराकरण के लिए कई माध्यमों से सचेत किया गया था। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के दौरान भी इन लंबित मामलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी और इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी नियमित रूप से सभी संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया था कि वे अपने स्तर पर लंबित आवेदनों का समय पर निपटारा करें। इसके बावजूद भी कई अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और म.प्र. लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 की धारा 5(2) का स्पष्ट उल्लंघन किया। इसी के परिणामस्वरूप इन अधिकारियों के विरूद्ध यह अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।

4. चेतावनी और वेतन से वसूली की प्रक्रिया

लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध की गई इस दंडात्मक कार्रवाई के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि शास्ति की यह राशि उनके निजी खातों से सीधे वसूल की जाए। संबंधित अधिकारियों के आगामी वेतन से कुल 23 हजार 500 रूपए की शास्ति राशि की कटौती की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से यह कड़ी चेतावनी भी जारी की गई है कि यदि भविष्य में कार्यों के प्रति इसी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बरती गई, तो उनके विरुद्ध और अधिक कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस प्रकार के सख्त रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और अधिकारी अपने कार्यों के प्रति अब अधिक सतर्क नजर आ रहे हैं।

5. अर्थदण्डित अधिकारियों की विस्तृत सूची और विवरण

कलेक्टर एवं द्वितीय अपीलीय अधिकारी लोक सेवा गारंटी ऊषा परमार द्वारा पन्ना जिले के जिन 13 अधिकारियों पर अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है, उनका पूरा विवरण पदानुसार इस प्रकार है:

  • सुरेन्द्र कुमार अहिरवार (तहसीलदार अजयगढ़): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • कोमल सिंह (तहसीलदार शाहनगर): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • रामनरेश सोनी (नायब तहसीलदार हरदुआ पटेल, तहसील रैपुरा): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • आशीष कुमार रूसिया (नायब तहसीलदार सुनवानीकलां): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • रामकृपाल सिंह राठौर (सचिव ग्राम पंचायत मगरपुरा पवई): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • अमीन खान (सचिव ग्राम पंचायत गौरा पन्ना): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • शैलेश कुमार रावत (सचिव ग्राम पंचायत हिनौती गुनौर): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • नवीन कुमार जैन (सचिव ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर पन्ना): 1 लंबित प्रकरण में 500 रूपए का अर्थदण्ड।

  • रत्नराशि पाण्डेय (तहसीलदार पवई): 2 लंबित प्रकरणों में 1-1 हजार रूपए (कुल 2000 रूपए) का अर्थदण्ड।

  • डडवरिया पन्ना के पंचायत सचिव: 2 लंबित प्रकरणों में 1-1 हजार रूपए (कुल 2000 रूपए) का अर्थदण्ड।

  • संतोष कुमार अरिहा (तहसीलदार गुनौर): 8 लंबित प्रकरणों में कुल 4 हजार रूपए का अर्थदण्ड।

  • श्रृद्धा श्रीवास्तव (बाल विकास परियोजना अधिकारी पवई): 10 लंबित प्रकरणों में कुल 5 हजार रूपए का अर्थदण्ड।

  • रागिनी तिवारी (विकासखंड शिक्षा अधिकारी शाहनगर): 17 प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण न करने पर कुल 8500 रूपए का अर्थदण्ड।

6. निष्कर्ष और प्रशासनिक सुव्यवस्था

"लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नागरिकों को समय पर सेवाएं देना अधिकारियों का दायित्व है, और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही पाए जाने पर पन्ना प्रशासन द्वारा इसी प्रकार की सख्त अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।"

पन्ना जिले में कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा की गई यह कार्रवाई उन तमाम अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो शासकीय कार्यों और आम जनता की फाइलों को लंबित रखते हैं। इस पूरी कार्रवाई से यह सुनिश्चित होता है कि पन्ना जिले में शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक बिना किसी अनावश्यक विलंब के पहुंचेगा। प्रशासनिक कसावट के इस दौर से न केवल विभागीय कामकाज में सुधार आएगा, बल्कि आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।

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