मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बेहद सराहनीय पहल की गई है। पन्ना विकासखंड के अंतर्गत मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से "घर-घर गणेश, हर घर गणेश, विराजे माटी गणेश" अभियान के तहत एक विशेष माटी गणेश प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना तथा गणेश उत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों के दुष्प्रभावों से बचाते हुए प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की स्थापना के लिए प्रेरित करना है। इस प्रशिक्षण में युवाओं और छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

छात्रों की सक्रिय भागीदारी और मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व विकास पाठ्यक्रम

इस भव्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व एवं क्षमता विकास पाठ्यक्रम (Master of Social Work / Development courses) में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं की इस सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति न केवल जागरूक है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह तत्पर भी है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने कुशल मार्गदर्शकों के मार्गदर्शन में अपने हाथों से पर्यावरण के अनुकूल सुंदर और कलात्मक मिट्टी की मूर्तियाँ (माटी के गणेश) बनाईं। इस प्रक्रिया के दौरान छात्रों ने मिट्टी को आकार देने के पारंपरिक कौशल को भी सीखा और पर्यावरण सुरक्षा के महत्व को व्यावहारिक रूप से समझा।

पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता का संकल्प

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों, छात्र-छात्राओं और उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में यह शपथ ली कि वे अपने-अपने आस-पास के लोगों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों के स्थान पर केवल शुद्ध मिट्टी (माटी) से बने गणेश जी की स्थापना करने के लिए प्रेरित करेंगे।

आयोजकों का मानना है कि त्योहारों के समय जल स्रोतों और पर्यावरण को जो भारी नुकसान पहुँचता है, उसे केवल जन-सहयोग और जन-जागरूकता के माध्यम से ही रोका जा सकता है। यह अभियान समाज में "माटी गणेश, सिद्ध गणेश" का पावन संदेश घर-घर तक पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है।

अभियान का मूल उद्देश्य और पर्यावरणीय महत्व

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और समन्वयकों ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल मूर्ति निर्माण सिखाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा वैचारिक और पर्यावरणीय लक्ष्य छिपा है।

  • प्रदूषण रोकथाम: गणेश उत्सव के समापन पर विसर्जन के दौरान पीओपी (POP) पानी में घुलती नहीं है और इससे जल स्त्रोत गंभीर रूप से प्रदूषित होते हैं। मिट्टी के गणेश पूरी तरह घुलनशील होते हैं।

  • पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा: पारंपरिक रूप से प्राकृतिक मिट्टी से मूर्तियाँ बनाने की हमारी प्राचीन संस्कृति को पुनर्जीवित करना।

  • सामुदायिक सहभागिता: जनमानस में पूज्यता और पर्यावरण प्रेम का संदेश एक साथ प्रसारित करना ताकि त्योहारों की पवित्रता के साथ प्रकृति की रक्षा भी हो सके।

गरिमामयी उपस्थिति और कार्यक्रम के मुख्य बिंदु

इस सफल और प्रेरणादायक आयोजन में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक, स्थानीय नवांकुर संस्था के समर्पित सदस्य, विभिन्न परामर्शदाता (कंसल्टेंट) तथा पन्ना विकासखंड के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया और इस प्रकार के आयोजनों को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने पर जोर दिया। इस प्रकार पन्ना जिले में आयोजित यह माटी गणेश प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

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