आमला।सरकार की महत्वाकांक्षी निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना है, लेकिन आमला विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल छवाल में यह योजना पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई। गुरुवार को छात्राओं को वितरित की गई नई साइकिलें स्कूल से निकलते ही जवाब दे गईं। किसी साइकिल की चेन उतर गई, किसी का पैडल जाम हो गया तो कई साइकिलों के टायरों में हवा तक नहीं थी। हालात ऐसे बने कि मासूम छात्राओं को नई साइकिलों को करीब 3 किलोमीटर तक पैदल खींचकर अपने घर ले जाना पड़ा।

नई साइकिल मिलने पर छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे थे, लेकिन कुछ ही देर बाद वही खुशी मायूसी में बदल गई। जिन साइकिलों से उन्हें रोज स्कूल आना-जाना था, वे पहले ही दिन चलने लायक नहीं निकलीं।

*स्कूल से घर तक पैदल ले जानी पड़ी साइकिल*

छात्राओं ने बताया कि जैसे ही उन्होंने साइकिल चलाना शुरू किया, किसी की चेन उतर गई, किसी का पैडल जाम हो गया और कई साइकिलें आगे बढ़ ही नहीं सकीं। मजबूरी में उन्हें साइकिलों को पैदल धकेलते हुए घर तक ले जाना पड़ा। किसी छात्रा का घर दो किलोमीटर दूर था तो किसी का तीन किलोमीटर।

*प्राचार्य बोलीं- जैसी साइकिलें मिलीं, वैसी ही बांट दीं*

मामले में स्कूल की प्राचार्य किरण खोबरे ने कहा कि विभाग से जैसी साइकिलें प्राप्त हुई थीं, वैसी ही विद्यार्थियों को वितरित कर दी गईं। वहीं विकासखंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र साहू ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यदि साइकिलों में तकनीकी खराबी है तो संबंधित संस्था से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।

*कांग्रेस ने साधा निशाना*

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष विजेंद्र भवसार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता की अनदेखी और भ्रष्टाचार अब आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि सरकार विद्यार्थियों के खातों में साइकिल की राशि जमा कर देती तो वे अपनी पसंद और अच्छी गुणवत्ता की साइकिल खरीद सकते थे। घटिया साइकिलें बांटकर सरकार ने अपनी ही योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

*गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल*

साइकिलें बीईओ और बीआरसी कार्यालय के माध्यम से स्कूलों तक पहुंचाई जाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वितरण से पहले उनकी गुणवत्ता और फिटनेस की जांच क्यों नहीं की गई। यदि पहले ही निरीक्षण कर खराब साइकिलों को बदल दिया जाता तो छात्राओं को पहले ही दिन परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

*योजना का उद्देश्य*

प्रदेश सरकार वर्ष 2004-05 से निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना संचालित कर रही है। इसके तहत कक्षा 6 और 9 में अध्ययनरत उन विद्यार्थियों को साइकिल दी जाती है, जिनके घर से स्कूल की दूरी दो किलोमीटर या उससे अधिक होती है। इस वर्ष प्रदेशभर में लगभग 4.30 लाख विद्यार्थियों को साइकिल वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नई साइकिलें पहले ही दिन जवाब दे गईं, तो आखिर इनकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है? क्या दोषी एजेंसी पर कार्रवाई होगी या फिर मासूम छात्राओं की परेशानी को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?