बुधवार, 12 अगस्त 2026 को कटनी जिले के प्रतिष्ठित शासकीय कन्या महाविद्यालय में एक अत्यंत गरिमामय और बौद्धिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। यह अवसर था भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान (Library and Information Science) के महान जनक माने जाने वाले प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती का। इस अवसर को पूरे राष्ट्र में 'राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस' (National Librarian's Day) के रूप में अत्यंत सम्मान और कृतज्ञता के साथ मनाया जाता है। इसी परिप्रेक्ष्य में कटनी के शासकीय कन्या महाविद्यालय में भी इस महत्वपूर्ण दिवस को एक भव्य अकादमिक उत्सव के रूप में मनाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकों की दुनिया से गहराई से जोड़ना, उनकी अध्ययन आदतों को परिष्कृत करना और उनके बौद्धिक क्षितिज का विस्तार करना था। यह गरिमामय आयोजन महाविद्यालय की ऊर्जावान प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के कुशल संरक्षण एवं मार्गदर्शन में अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने छात्राओं के मन में पठन-पाठन के प्रति एक नई अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण एवं कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ भारतीय ज्ञान परंपरा में किसी भी ज्ञानवर्धक कार्य की शुरुआत ईश्वरीय वंदना और प्रकाश के आह्वान से होती है। इसी शाश्वत संस्कृति का निर्वहन करते हुए कटनी के इस महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक वातावरण में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर अज्ञान के अंधकार को नष्ट करने की प्रार्थना की गई। दीप प्रज्वलन के पश्चात्, मां सरस्वती तथा पुस्तकालय विज्ञान के पुरोधा डॉ. एस. आर. रंगनाथन के सुसज्जित शैलचित्र पर महाविद्यालय परिवार द्वारा अत्यंत श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पण किया गया। यह माल्यार्पण केवल एक रस्म नहीं थी, बल्कि ज्ञान के उन महान उपासकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक थी, जिन्होंने समाज को बौद्धिक रूप से उन्नत बनाने की दिशा में अपना संपूर्ण जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर दिया।
प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात का सारगर्भित एवं प्रेरणादायी उद्बोधन इस वैचारिक कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक था महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात का अत्यंत सारगर्भित और प्रेरणादायी उद्बोधन। उन्होंने उपस्थित विशाल छात्रा समूह को संबोधित करते हुए विद्यार्थी काल में पुस्तकालय के असीम महत्व पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
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पुस्तकालय को बताया ज्ञान का अद्वितीय केंद्र: प्राचार्य महोदया ने स्पष्ट किया कि महाविद्यालय का पुस्तकालय केवल निर्जीव पुस्तकों को सहेजने का कक्ष नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत जीवंत 'ज्ञान का केंद्र' है। यह वह स्थान है जहाँ एक विद्यार्थी दुनिया भर के महान विचारकों और वैज्ञानिकों के साथ वैचारिक संवाद स्थापित कर सकता है।
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पुस्तकें हैं मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र: डॉ. प्रभात ने एक मार्मिक सत्य को रेखांकित करते हुए कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी, सच्ची और निस्वार्थ मित्र होती हैं। मानव मित्र भले ही समय या परिस्थिति के कारण बदल जाएं, लेकिन एक अच्छी पुस्तक जीवन के हर कठिन मोड़ पर एक सच्चे मार्गदर्शक की तरह हमेशा साथ निभाती है।
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नियमित उपयोग का आह्वान: उन्होंने कटनी महाविद्यालय की छात्राओं को प्रेरित किया कि वे केवल अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकों तक ही स्वयं को सीमित न रखें, बल्कि साहित्य, इतिहास, और विज्ञान की ज्ञानवर्धक पुस्तकों का भी अध्ययन करें। उन्होंने पुस्तकालय जाने को एक अनिवार्य आदत के रूप में शामिल करने का प्रबल आह्वान किया।
ज्ञानवर्धन हेतु विविध एवं नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियों का सफल आयोजन राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक रोचक, सहभागी, और प्रासंगिक बनाने के लिए कटनी महाविद्यालय के पुस्तकालय विभाग द्वारा कई नवाचारी और बौद्धिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई थी कि छात्राएं पूर्ण ऊर्जा के साथ ज्ञान के इस उत्सव में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराएं।
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विशाल एवं ज्ञानवर्धक पुस्तक प्रदर्शनी (Book Exhibition): महाविद्यालय परिसर में एक आकर्षक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों और विविध ज्ञान क्षेत्रों की दुर्लभ एवं नवीनतम पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। छात्राओं ने इस प्रदर्शनी का गहन अवलोकन कर विश्व साहित्य के अथाह सागर की झलक पाई और नई पुस्तकों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
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ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता (Online Quiz): आधुनिक तकनीकी युग के अनुरूप छात्राओं के ज्ञान का सटीक परीक्षण करने के उद्देश्य से एक 'ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता' आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में सामान्य ज्ञान, पुस्तकालय विज्ञान और साहित्य से संबंधित उच्च स्तरीय प्रश्न पूछे गए, जिसमें कटनी की इन प्रतिभावान छात्राओं ने अपनी बुद्धिमत्ता के साथ भाग लिया।
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विश्लेषणात्मक पुस्तक समीक्षा गतिविधि (Book Review): छात्राओं में आलोचनात्मक सोच और गहन विश्लेषण क्षमता विकसित करने के लिए 'पुस्तक समीक्षा' की एक महत्वपूर्ण गतिविधि संपन्न कराई गई। इसमें छात्राओं ने अपनी पढ़ी हुई पुस्तकों के गुण-दोषों, उनमें निहित संदेशों, और समाज पर उन पुस्तकों के प्रभाव का विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत किया। इन बहुआयामी गतिविधियों में छात्राओं का उत्साह और निरंतर नया सीखने की ललक स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही थी।
पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा डॉ. रंगनाथन के अमूल्य योगदान से परिचय कार्यक्रम की वैचारिक श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष ने मंच का संचालन करते हुए मुख्य विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने महान शिक्षाविद् डॉ. एस. आर. रंगनाथन के प्रेरणादायी जीवन परिचय, उनके प्रारंभिक संघर्षों, और उनकी अकादमिक यात्रा से सभी उपस्थित छात्राओं को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैसे डॉ. रंगनाथन ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम के बल पर भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान को एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण विषय के रूप में स्थापित किया। पुस्तकालयाध्यक्ष ने डॉ. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित किए गए पुस्तकालय विज्ञान के पांच मूलभूत सिद्धांतों (Five Laws of Library Science) की चर्चा की, जिन्होंने पूरी दुनिया में पुस्तकालयों के प्रबंधन की दिशा ही बदल कर रख दी। अपने संबोधन के अंतिम चरण में पुस्तकालयाध्यक्ष ने छात्राओं से भावपूर्ण अपील की कि वे अपने निरंतर अध्ययन, गहन शोध कार्य और सर्वांगीण ज्ञानवर्धन के लिए महाविद्यालय के इस विशाल और अत्यंत समृद्ध पुस्तकालय का अधिकतम, नियमित और सार्थक उपयोग सुनिश्चित करें।
पठन-पाठन संस्कृति का व्यापक विकास और इस आयोजन का लक्ष्य इस संपूर्ण आयोजन का सबसे दूरगामी और सार्थक उद्देश्य महाविद्यालय की छात्राओं के बीच 'पठन-पाठन की संस्कृति' (Reading Culture) को अत्यंत मजबूती से विकसित करना था। आज के इस डिजिटल और सोशल मीडिया के युग में, जहां युवा पीढ़ी का ध्यान आसानी से भटक जाता है, ऐसे समय में उन्हें मुद्रित पुस्तकों की महक और उनके भीतर छिपे ज्ञान के अनंत भंडार के प्रति जागरूक करना सबसे बड़ा दायित्व है। यह विशेष कार्यक्रम इसी दिशा में कटनी महाविद्यालय का एक बेहद सार्थक कदम सिद्ध हुआ। इस गरिमामय आयोजन ने छात्राओं के मन में पुस्तकालय के प्रति एक नई और गहरी रुचि उत्पन्न की, और उन्हें समझाया कि उनके स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में अच्छी पुस्तकों की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक प्रबुद्ध नागरिक बनना है, और यह स्वाध्याय के बिना असंभव है।
महाविद्यालय परिवार की व्यापक उपस्थिति तथा आभार प्रदर्शन इस सफल और वैचारिक रूप से ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में कटनी के शासकीय कन्या महाविद्यालय का पूरा परिवार पूर्ण रूप से एकजुट नजर आया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक अधिकारी (टीचिंग स्टाफ), समर्पित अशैक्षणिक कर्मचारी (नॉन-टीचिंग स्टाफ) और बड़ी संख्या में छात्राएं शुरू से लेकर अंत तक पूरी तन्मयता, अनुशासन और गहरी रुचि के साथ उपस्थित रहीं। शिक्षकों और छात्राओं की इस प्रकार की सामूहिक सहभागिता यह प्रमाणित करती है कि कटनी का यह महाविद्यालय प्रशासन अपनी छात्राओं के निरंतर बौद्धिक विकास और उनके सर्वांगीण उत्थान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में, आयोजक मंडल द्वारा इस सफल आयोजन में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करने वाले सभी प्रतिभागियों, विद्वान वक्ताओं, और महाविद्यालय के सभी सदस्यों के प्रति अत्यंत विनम्रतापूर्वक हार्दिक आभार व्यक्त किया गया, जिसके साथ ही इस ज्ञान-यज्ञ का सफल समापन हुआ।
image source : https://katni.mpinfo.org
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