बुधवार, 12 अगस्त 2026 को कमिश्नर कार्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का आयोजन किया गया। इस विशेष बैठक की अध्यक्षता संभागायुक्त श्री कर्मवीर शर्मा और मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) श्री क्षितिज कुमार द्वारा संयुक्त रूप से की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु वन अधिकार अधिनियम (FRA) के अंतर्गत वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तित (परिवर्तित) करने की बहुप्रतीक्षित और अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया की प्रगति की गहन समीक्षा करना था। शासन के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में इस प्रक्रिया को समय-सीमा के भीतर पूर्ण करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि वन क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए यह संपरिवर्तन मील का पत्थर साबित होगा।

उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अधिकारियों की उपस्थिति इस वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) में संभाग के सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे इस विषय की गंभीरता और इसके क्रियान्वयन की व्यापकता का स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकता है। बैठक में विशेष रूप से विदिशा कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता उपस्थित रहे। उनके साथ ही राजगढ़ कलेक्टर श्री गिरीश कुमार मिश्रा, सीहोर कलेक्टर श्री बालागुरू के., और रायसेन कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक अमले के अतिरिक्त, संभाग के सभी जिलों के जिला वन अधिकारी (डीएफओ), अपर कलेक्टर एवं अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल हुए। सभी अधिकारियों को इस प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी तरीके से लागू करने के संबंध में शासन की मंशा से अवगत कराया गया।

संभागायुक्त श्री कर्मवीर शर्मा के प्रमुख निर्देश और एसओपी का पालन समीक्षा बैठक के दौरान संभाग आयुक्त श्री शर्मा ने अत्यंत कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए कि सभी जिलों में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की कार्यवाही बिना किसी विलंब के और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित की जाए। बैठक में इस बात पर विशेष और विस्तृत चर्चा की गई कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पट्टों की मान्यता लागू करने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी - SOP) का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए। व्यवस्थापन की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक खामी नहीं होनी चाहिए। संभागायुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि एफआरए (FRA) के तहत वितरित किए गए पट्टे मात्र कागज का टुकड़ा बनकर न रह जाएं, बल्कि एफआरए पट्टाधारियों को शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी और विकासात्मक योजनाओं का सीधा और अधिकतम लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।

दावा कार्य का सत्यापन और चरणबद्ध संपरिवर्तन प्रक्रिया संभागायुक्त श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वन ग्रामों में दावा कार्य की वर्तमान स्थिति का अत्यंत बारीकी से सत्यापन करना अनिवार्य है। सत्यापन की इस प्रक्रिया के उपरांत ही वनाधिकारी समिति के दावों को आधिकारिक रूप से मान्य किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन ग्राम को राजस्व ग्राम में संपरिवर्तित करने की यह प्रक्रिया एक चरणबद्ध प्रणाली (Step-by-step process) है, जिसे पूरी सावधानी और नियमबद्ध तरीके से पूरा किया जाना है। भूमि के रकबे (क्षेत्रफल) के निर्धारण के संबंध में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संदर्भ में जिला वन अधिकारियों (डीएफओ) द्वारा विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर संबंधित जिला कलेक्टरों को भेजा जाए। इसके अतिरिक्त, वन व्यवस्थापन संबंधी सभी कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग और समीक्षा समय-सीमा में की जाए ताकि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया बाधित न हो। वन अधिकार अधिनियम के तहत जिन व्यक्तियों को हक प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं से तत्काल लाभान्वित किया जाए।

सीएम हेल्पलाइन और समाधान ऑनलाइन की समीक्षा प्रशासनिक सुशासन और आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में भी संभागायुक्त श्री शर्मा ने कड़े कदम उठाए। बैठक के दौरान उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की अद्यतन स्थिति और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा के उपरांत संभागायुक्त ने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों के निराकरण में जिलों द्वारा दिखाई गई प्रगति पर अपना संतोष व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए यह भी निर्देशित किया कि इस दिशा में और अधिक सक्रियता की आवश्यकता है। संभागायुक्त ने सभी जिला कलेक्टरों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे 'समाधान ऑनलाइन' की वर्तमान स्थिति पर अपने-अपने विभागों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें और लंबित समस्याओं का तत्काल प्रभाव से निराकरण सुनिश्चित करें। आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

वन ग्रामों के संपरिवर्तन के संबंध में संभाग के आंकड़े मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) भोपाल, श्री क्षितिज कुमार ने बैठक के दौरान संभाग के अंतर्गत वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की प्रक्रियारत स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण और विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भोपाल संभाग के अंतर्गत कुल 83 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में संपरिवर्तित करने की प्रक्रिया जारी है। इन ग्रामों का जिलेवार विवरण इस प्रकार है:

  • भोपाल जिला: 14 वन ग्राम

  • राजगढ़ जिला: 02 वन ग्राम

  • विदिशा जिला: 05 वन ग्राम

  • रायसेन जिला: 13 वन ग्राम

  • सीहोर जिला: 49 वन ग्राम

संयुक्त दल (Joint Committee) का गठन एवं जमीनी कार्यवाही प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से प्रारंभिक तौर पर वन ग्रामों का एक संयुक्त दल गठित किया गया है। इस दल में वन विभाग के अधिकारी, राजस्व विभाग के अधिकारी और वन समितियों के सदस्यों को शामिल किया गया है। वर्तमान में यह संयुक्त दल वन ग्रामों की बाहरी सीमा का निर्धारण करने और अत्यंत सूक्ष्मता के साथ नक्शा तैयार करने की कार्यवाही कर रहा है। इसके साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए वन ग्रामों के सभी रिकॉर्ड और अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन (Digitization) किया जा रहा है। इसके समानांतर, जमीनी स्तर पर वस्तुस्थिति का आकलन करने के लिए ग्राउण्ड सर्वे (Ground Survey) की कार्यवाही भी निरंतर जारी है।

हितग्राहियों के लिए शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य वहां निवासरत लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके अंतर्गत एफआरए पट्टाधारियों को शासन की जिन महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ दिलाने की चर्चा की गई, उनकी सूची अत्यंत व्यापक है:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना: हितग्राहियों को पक्के और सुरक्षित आवास की सुविधा प्रदान करना।

  • कपिलधारा कूप निर्माण: कृषि और सिंचाई की सुविधा के लिए खेतों में कपिलधारा योजना के तहत कुओं का निर्माण करना।

  • भूमि सुधार और भूमि समतलीकरण: असमतल कृषि भूमि को खेती योग्य बनाने के लिए भूमि सुधार तथा मेढ़ बंधान के कार्य सुनिश्चित करना।

  • सिंचाई हेतु पंप एवं पाइप लाइन: कृषकों को खेतों में सिंचाई के लिए विद्युत एवं डीजल पंप की व्यवस्था तथा दूरस्थ जल स्रोतों से पानी लाने के लिए पाइप लाइन की सुविधा प्रदान करना।

  • किसान सम्मान निधि: पात्र किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु किसान सम्मान निधि योजना से जोड़ना।

  • किसान क्रेडिट कार्ड: कृषि कार्यों के लिए आसान और सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने हेतु किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी करना। इन सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से वन ग्रामों के निवासियों के आर्थिक और सामाजिक विकास के नए द्वार खुलेंगे।

वन्य जीव संरक्षण और अतिक्रमण की रोकथाम पर जोर बैठक के अंतिम चरण में संभाग आयुक्त श्री शर्मा ने पर्यावरणीय संतुलन और वन संपदा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वन्य जीवों (Wild Life) को संरक्षित करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विकास कार्यों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में वन भूमि पर किसी भी प्रकार का कोई नया अवैध अतिक्रमण (Encroachment) न होने पाए। वन संपदा और वन्य जीवों का संरक्षण प्रशासन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व है, और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष कुल मिलाकर, बुधवार को आयोजित इस उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विदिशा सहित पूरे संभाग में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को एक नई गति और दिशा प्रदान की गई है। वन ग्रामों का राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए सम्मानजनक जीवन, आर्थिक सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त करने की एक बड़ी पहल है। संभागायुक्त श्री कर्मवीर शर्मा और मुख्य वन संरक्षक श्री क्षितिज कुमार के नेतृत्व में प्रशासन इस महत्वपूर्ण कार्य को समय-सीमा के भीतर, पूर्ण पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि हितग्राहियों को जल्द से जल्द शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

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