आमला। पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के उद्देश्य से संचालित प्ररोहण-2026 (हरित आमला, हरित प्रदेश, हरित न्यायालय) अभियान का शुभारंभ शुक्रवार को आमला न्यायालय परिसर से हुआ। इस अवसर पर दोपहर 2 बजे आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक-5 के पार्षद राकेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे। पार्षद राकेश शर्मा ने कहा कि प्ररोहण-2026 अभियान हरित आमला, हरित प्रदेश और हरित न्यायालय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में वर्षों से किए जा रहे पौधारोपण और संरक्षण के प्रयास अन्य शासकीय कार्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

अधिवक्ता संघ आमला के उपाध्यक्ष रविशंकर पटवारी ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पौधे धरती का श्रृंगार हैं। केवल पौधारोपण कर औपचारिकता निभाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे भविष्य में वृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ियों को छाया, फल और शुद्ध वातावरण प्रदान करेंगे।

संघ के सहसचिव सी.एल. सोलंकी ने बताया कि न्यायालय परिसर में पिछले लगभग आठ वर्षों से लगातार पौधारोपण किया जा रहा है। इस सतत प्रयास का परिणाम है कि यहां लगाए गए अनेक पौधे अब विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में न्यायालय परिसर शासकीय परिसरों में सबसे अधिक हरियाली वाला परिसर बन चुका है। इसकी हरियाली और स्वच्छ वातावरण के पीछे न्यायाधीशों एवं अधिवक्ताओं की वर्षों की मेहनत और समर्पण है।

उन्होंने कहा कि न्याय प्राप्ति के लिए आने वाले पक्षकार जब इस हरे-भरे परिसर में प्रवेश करते हैं तो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का अनुभव होता है। वहीं यहां कार्यरत लोगों को भी शुद्ध और ताजगी भरा वातावरण निरंतर मिलता रहता है।

पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान नीम, पीपल, बादाम, आंवला, अशोक, हरसिंगार, कनेर एवं बेलपत्र सहित विभिन्न औषधीय एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। इन पौधों को स्वर्गीय तपेश कुमार दुबे द्वारा पूर्व में विकसित की गई "न्याय वाटिका" में लगाया गया।

अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के शेड के आसपास गमलों में तुलसी के पौधे भी लगाए जाएंगे। उन्होंने परिसर की हरियाली को बनाए रखने के लिए न्यायालय में स्थायी माली के पद की स्थापना की मांग भी उठाई।

वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र शर्मा ने पौधारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का भी हिस्सा है। शास्त्रों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।

कार्यक्रम में रवि देशमुख, मधुकर महाजन, दिनेश सोनी, शबाना खान, किरण जैसवाल, यशपाल ठाकुर, सुरेंद्र खातरकर, कल्पेश माथनकर, शिवम उपाध्याय सहित अनेक अधिवक्ताओं एवं नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पौधों के नियमित संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।