मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तथा अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जीतेन्द्र कुमार शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में, सोमवार, 27 जुलाई 2026 को कटनी जिले के ढीमरखेड़ा न्यायालय प्रांगण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यापक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में व्याप्त कुप्रथाओं एवं नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ जनचेतना फैलाना था। शिविर का सुचारू संचालन और अध्यक्षता न्यायाधीश पूर्वी तिवारी द्वारा की गई, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कानून की महत्ता, सामाजिक उत्तरदायित्व और आम जनता के कल्याण से जुड़ी विभिन्न विधिक योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विधिक साक्षरता शिविर की आवश्यकता और प्रासंगिकता

आज के दौर में जब समाज तेजी से बदल रहा है, न्याय और कानून की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुलभ बनाना न्यायपालिका का प्रमुख लक्ष्य है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कटनी के माध्यम से आयोजित यह शिविर इसी दिशा में एक सार्थक पहल है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, वादकारियों, युवाओं और वरिष्ठजनों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बताया कि विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन केवल एक औचारिकता नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम है ताकि वे अपने जीवन में न्यायसंगत और जागरूक निर्णय ले सकें।

नशा त्यागने और इसके दुष्प्रभावों पर व्यापक चर्चा

विधिक साक्षरता शिविर के दौरान उपस्थित नागरिकों और आम जनमानस को नशा मुक्ति के महत्व के बारे में गहराई से जागरूक किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नशा न केवल एक व्यक्ति के व्यक्तिगत स्वास्थ्य को पूरी तरह तबाह करता है, बल्कि यह उसके पूरे परिवार और अंततः संपूर्ण समाज के ताने-बाने को भी कमजोर कर देता है। शिविर में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई:

  • व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव: नशीले पदार्थों और मादक द्रव्यों का नियमित सेवन मानव शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे कि यकृत (Liver), फेफड़े और मस्तिष्क को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है, जिससे समय से पहले ही असाध्य बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं और व्यक्ति का जीवन संकट में पड़ जाता है।

  • पारिवारिक टूटन और आर्थिक संकट: नशे की लत के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार चरमरा जाती है। कमाए गए अधिकांश पैसे नशे पर खर्च हो जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं, और आपसी कलह व तनाव बढ़ने लगता है।

  • सामाजिक विघटन और अपराध: समाज में अपराधों, असामाजिक गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा मिलने में नशे की लत की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब युवा पीढ़ी नशे के जाल में फंसती है, तो समाज का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

  • सकारात्मक जीवनशैली का संकल्प: शिविर में उपस्थित सभी लोगों को यह दृढ़ संकल्प दिलाया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में किसी भी प्रकार के नशे का पूर्ण रूप से त्याग करें और एक स्वस्थ, अनुशासित, संस्कारी व प्रगतिशील जीवन अपनाकर समाज के विकास में अपना सकारात्मक योगदान दें।

सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन

नशा मुक्ति के संदेश के साथ-साथ इस शिविर में सड़क सुरक्षा (Road Safety) के अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को भी प्रमुखता से उठाया गया। आज के समय में देश भर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनके कारण होने वाली अकाल मौतों को रोकने के लिए नागरिकों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों को निम्नलिखित सख्त निर्देश व सुरक्षा सलाह दी गई:

  • हेलमेट का अनिवार्य उपयोग: दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल या स्कूटर) चलाते समय चालक और पीछे बैठने वाले दोनों व्यक्तियों द्वारा हमेशा मानक गुणवत्ता (ISI Mark) वाले हेलमेट का उपयोग करने की सख्त सलाह दी गई, ताकि दुर्घटना की स्थिति में सिर की गंभीर चोटों से बचा जा सके और जीवन की रक्षा हो सके।

  • शराब पीकर वाहन न चलाना (No Drink and Drive): यह बात अत्यंत कड़े शब्दों में रेखांकित की गई कि शराब या किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन करके कभी भी वाहन नहीं चलाना चाहिए। ऐसा करना न केवल कानूनन एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह वाहन चालक के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य निर्दोष लोगों की जान को भी खतरे में डालने के समान है।

  • यातायात नियमों के प्रति जागरूकता: शिविर में शामिल सभी लोगों से अपील की गई कि वे ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करें, तय गति सीमा में वाहन चलाएं और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें। साथ ही, अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों को भी यातायात नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने के लिए प्रेरित करें।

गणमान्य अधिवक्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

यह विधिक साक्षरता शिविर ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें न्यायपालिका के अधिकारियों के साथ-साथ बार एसोसिएशन (अधिवक्ता संघ) के कई प्रतिष्ठित सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्तागण और न्यायालयीन कर्मचारी पूरी सक्रियता और उत्साह के साथ उपस्थित रहे। इस गरिमामयी कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख महानुभावों के नाम निम्नलिखित हैं:

  • श्री राजेश पयासी: अध्यक्ष, अधिवक्ता संघ ढीमरखेड़ा

  • श्री राजकुमार पयासी: वरिष्ठ अधिवक्ता

  • श्री जयकिशोर शुक्ला: अधिवक्ता

  • श्री जय प्रकाश शुक्ला: अधिवक्ता

  • श्री शक्ति संजय सिंह: नायब नाज़िर

  • श्री शिवम उपाध्याय: अधिवक्ता एवं न्यायालयीन कर्मी

  • श्री अवधेश असाटी: अधिवक्ता

इन सभी गणमान्य अधिवक्ताओं और अधिकारियों ने शिविर के उद्देश्यों का पूर्ण समर्थन किया और आम जनता को मुफ्त विधिक सहायता, उनके कानूनी अधिकारों तथा शासन की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

निष्कर्ष और भविष्य की रूपरेखा

ढीमरखेड़ा न्यायालय प्रांगण में संपन्न हुआ यह विधिक साक्षरता शिविर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जागरूकता फैलाने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है। न्यायाधीश पूर्वी तिवारी और अन्य गणमान्य अतिथियों के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि न्यायपालिका केवल अदालती मुकदमों और विवादों का निपटारा ही नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने, कुरीतियों को दूर करने और नागरिकों को कानून के प्रति जागरूक करने में भी अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रकार के आयोजनों से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के आम नागरिकों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास प्रगाढ़ होता है और वे सामाजिक व कानूनी रूप से अधिक सशक्त बनते हैं।

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