सागर जिले की कानून व्यवस्था पर उठे सवाल: केसली थाने में निरीक्षक की कमी से बढ़ती चुनौतियां

मध्य प्रदेश के सागर जिले में पुलिस महकमे की प्रशासनिक प्राथमिकताएं इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में हैं। जिले की पुलिसिंग व्यवस्था में ऐसी अव्यवस्था देखने को मिल रही है, जिसने आम जनता से लेकर विभाग के भीतर तक सुगबुगाहट तेज कर दी है।

जिले के कुछ महत्वपूर्ण और निरीक्षक स्तर के थानों की कमान लंबे समय से उपनिरीक्षकों के हाथों में है, जबकि अनुभवी निरीक्षक विभिन्न शाखाओं और दफ्तरों में कागजी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अपराधियों से निपटने के लिए फील्ड पर अनुभवी अधिकारियों की जरूरत है या दफ्तरों की फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल पर खिसकाने की?

नए कप्तान के बावजूद जस की तस स्थिति

इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण देवरी विधानसभा क्षेत्र का केसली थाना है। यहां लंबे समय से निरीक्षक का पद खाली पड़ा है और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी के भरोसे चल रहा है।

आखिर किससे उम्मीद लगाए जनता?

क्षेत्रीय विधायक पंडित बृज बिहारी पटेरिया की दमदार छवि के बावजूद केसली थाने की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। साथ ही जिला पंचायत सागर के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह का यह गृह नगर है। 

हाल ही में जिले में नए पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने पदभार ग्रहण किया है। उनकी अनुशासनप्रिय छवि के बावजूद केसली क्षेत्र की जनता निराश है, क्योंकि एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

अनुभवी निरीक्षक 'लूप लाइन' में, जूनियर संभाल रहे मैदान

जिले में यह साफ देखा जा सकता है कि एक तरफ अपराध नियंत्रण के लिए अनुभवी नेतृत्व की कमी है, वहीं दूसरी तरफ निरीक्षकों को 'साइड पोस्टिंग' में डाल दिया गया है। जिले में इंस्पेक्टर साइबर शाखा में अटके हुए हैं और रक्षित केंद्र में अटैच होकर दिन काट रहे हैं।

बढ़ता अपराध और सुलगते सवाल

सागर जिला बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में है:

  • अवैध शराब की तस्करी तेजी से बढ़ी है।
  • मादक पदार्थों का कारोबार पैर पसार रहा है।
  • संदिग्ध गतिविधियां और आपसी रंजिश के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

इन संवेदनशील हालातों में जब थानों को अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है, तब जूनियर अधिकारियों के भरोसे व्यवस्था छोड़ देना समझ से परे है।

जनता को 'कप्तान' के एक्शन का इंतजार

थानों को अनुभवी नेतृत्व से दूर रखने को लेकर आमजन के बीच चर्चाएं हैं। क्या यह केवल प्रशासनिक सुस्ती है या फिर इसके पीछे कोई अंदरूनी खींचतान? नए एसपी अनुराग सुजानिया के लिए सागर जिले में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाना और थानों में सही अधिकारियों की सही जगह पोस्टिंग करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

अब देखना यह है कि क्या कप्तान साहब इस विसंगति को दूर करते हैं या फिर थानों का यह 'कामचलाऊ' ढर्रा ऐसे ही जारी रहेगा?