मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और विशेषकर अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। इसी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और इसे वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पर्यटन के क्षेत्र में एक नए और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत हुई है। बैतूल जिले के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक विकास की बयार लाने और जनजातीय समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने के महान लक्ष्य के साथ एक अनूठी पहल को धरातल पर उतारा गया है।
रविवार के दिन मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की महत्वाकांक्षी 'जनजातीय पर्यटन' (ट्राइबल टूरिज्म) परियोजना के अंतर्गत बैतूल जिले के ग्राम बज्जरवाड़ा में 3 नए और सर्वसुविधायुक्त ग्रामीण होमस्टे का अत्यंत भव्य तरीके से उद्घाटन किया गया। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने का एक साधन है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभर रही है।
नीचे इस पूरे कार्यक्रम, परियोजना के उद्देश्यों और अतिथियों के विचारों का विस्तृत और बिंदुवार विवरण प्रस्तुत किया गया है:
परियोजना का मुख्य उद्देश्य और क्रियान्वयन मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के दिशा-निर्देशों में संचालित इस 'जनजातीय पर्यटन' परियोजना को जमीन पर उतारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी 'बैक टू विलेज' नामक संस्था द्वारा निभाई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह अभिनव संस्था इस पूरी परियोजना को बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के कुल 5 गांवों में सुनियोजित तरीके से लागू कर रही है। इस परियोजना का सबसे मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य उन जनजातीय परिवारों के लिए आय का एक स्थायी और वैकल्पिक स्रोत तैयार करना है, जिनके पास खेती के लिए छोटे भूखंड हैं और जो आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं। होमस्टे के माध्यम से इन परिवारों को अपने ही घर में रहकर रोजगार का एक सम्मानजनक साधन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक स्तर ऊपर उठ सके।
उद्घाटन समारोह में उपस्थित गरिमामयी अतिथियों का विवरण बैतूल जिले के ग्राम बज्जरवाड़ा में आयोजित इस भव्य उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन नवनिर्मित होमस्टे का विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, भारत सरकार के केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के अतिरिक्त इस गौरवशाली अवसर पर कई अन्य विशिष्ट हस्तियां भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इनमें मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त श्री मोहन नागर, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त श्री मंगलसिंग धुर्वे, घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र की सम्मानित विधायक श्रीमती गंगा उइके और इस पूरी परिकल्पना को साकार करने वाली संस्था 'बैक टू विलेज' के संस्थापक श्री मनीष कुमार शामिल थे। इन सभी अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके का प्रेरणादायक उद्बोधन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने अत्यंत प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वर्तमान सरकार जनजातीय समाज के समग्र कल्याण और उत्थान के लिए पूरी तरह से संवेदनशील है। सरकार द्वारा लगातार ऐसी योजनाएं लाई जा रही हैं जो जनजातीय समुदाय के अनुकूल हों और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ सकें। ग्रामीण जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में ग्रामीण जीवन ही सबसे अधिक शुद्ध और प्रदूषण मुक्त है। शहरों की भागदौड़ और प्रदूषण से ऊब चुकी पूरी दुनिया आज शांति की तलाश में ग्रामीण संस्कृति की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। मंत्री महोदय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हमारी प्राचीन जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति के पीछे एक बहुत ही गहरा और तार्किक विज्ञान छिपा हुआ है। बज्जरवाड़ा में शुरू किए गए ये होमस्टे केवल रुकने का स्थान नहीं हैं, बल्कि ये जनजातीय जीवन के इस वैज्ञानिक संदेश और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर फैलाने का एक सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
विशिष्ट अतिथियों द्वारा साझा किए गए विचार और बहुमूल्य सुझाव कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी होमस्टे संचालकों का उत्साहवर्धन किया और महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
-
श्री मोहन नागर के विचार: मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर ने 'बैक टू विलेज' संस्था के शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए उनके द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही है, ऐसे दौर में प्रकृति के बेहद करीब रहने वाली हमारी जनजातीय जीवनशैली पूरे विश्व के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकती है। उन्होंने बैतूल जिले के अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरित किया कि वे भी इस लाभकारी मुहिम से जुड़ें और अपने घरों में होमस्टे का निर्माण करें।
-
विधायक श्रीमती गंगा उइके के सुझाव: घोड़ाडोंगरी की विधायक श्रीमती गंगा उइके ने होमस्टे संचालकों को व्यापारिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के अनुभव को और अधिक सुखद और यादगार बनाने के लिए नए नवाचार (इन्नोवेशन) किए जाने चाहिए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने सुझाव दिया कि होमस्टे परिसर के भीतर धीमी और मधुर आवाज में पारंपरिक जनजातीय संगीत बजाया जा सकता है, जिससे वहां आने वाले विदेशी और शहरी पर्यटकों को एक प्रामाणिक (Authentic) और शांतिपूर्ण माहौल मिल सके।
-
श्री मंगलसिंग धुर्वे की शुभकामनाएं: अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री मंगलसिंग धुर्वे ने अपने संबोधन में जनजातीय संस्कृति और विशेष रूप से पारंपरिक खान-पान के महत्व पर बहुत जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को स्थानीय और पारंपरिक भोजन परोस कर उनकी संस्कृति से रूबरू कराया जा सकता है। उन्होंने सभी होमस्टे स्वामियों को उनके इस नए और उत्साहजनक सफर के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
महिलाओं को मिला मालिकाना हक: सशक्तिकरण की एक अनूठी मिसाल इस पूरी परियोजना का सबसे क्रांतिकारी और सकारात्मक पहलू महिला सशक्तिकरण से जुड़ा है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा बनाए गए कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, बज्जरवाड़ा में शुरू किए गए इन सभी होमस्टे का पूर्ण मालिकाना हक (Ownership) संबंधित परिवार की महिला सदस्य के नाम पर ही रहेगा। इस दूरदर्शी फैसले ने बैतूल जिले की ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। अब ये महिलाएं अपने दैनिक घरेलू कामकाज और परिवार की जिम्मेदारियों को बिना किसी भी तरह से प्रभावित किए, सम्मानजनक तरीके से अपनी आजीविका कमा रही हैं। वे अब घर की मुखिया के साथ-साथ एक सफल उद्यमी भी बन गई हैं।
पलायन पर लगी रोक: शहरों से वापस गांव लौट रहे हैं पुरुष इस होमस्टे परियोजना का एक और बहुत बड़ा और सकारात्मक सामाजिक असर यह देखने को मिला है कि रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर चुके बैतूल के ग्रामीण पुरुष अब वापस अपने गांव लौट रहे हैं। शहरों में मजदूरी करने की बजाय, वे अब अपने ही गांव में रहकर अपनी पत्नियों के साथ होमस्टे के संचालन और प्रबंधन में हाथ बंटा रहे हैं। सबसे खुशी की बात यह है कि वे अब बाहर के शहरों की तुलना में अपने घर और परिवार के बीच रहकर अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। यह 'रिवर्स माइग्रेशन' ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है।
संस्थापक की अपील: शहरों की चकाचौंध से बचें, अपनी संस्कृति को सहेजें कार्यक्रम के दौरान 'बैक टू विलेज' के संस्थापक श्री मनीष कुमार ने अपनी संस्था के विजन को स्पष्ट करते हुए बताया कि उनकी भविष्य की योजना बज्जरवाड़ा गांव के हर एक परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस पर्यटन परियोजना के साथ जोड़ने की है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से एक भावुक और गंभीर अपील की कि वे बड़े शहरों की बनावटी चकाचौंध और आधुनिकता से अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों। उन्होंने समझाया कि जो पर्यटक शहरों से या विदेशों से आ रहे हैं, वे हमारी ग्रामीण जीवनशैली, हमारे शुद्ध पारंपरिक भोजन और हमारी अनूठी संस्कृति से ही आकर्षित होकर यहां खिंचे चले आ रहे हैं। इसलिए, यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपनी इन जड़ों और परंपराओं को पूरी शिद्दत के साथ सहेज कर रखें, क्योंकि यही हमारी असली पूंजी है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश: 'उत्तरदायी पर्यटन' की मिसाल बना आयोजन कार्यक्रम के अंतिम चरण और समापन अवसर पर प्रयास ग्राम पर्यटन समिति के अध्यक्ष श्री पवन परते ने मंच से सभी माननीय अतिथियों, अधिकारियों और भारी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों का हृदय से आभार व्यक्त किया। अपने धन्यवाद ज्ञापन में उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गर्व करने वाली बात साझा की। उन्होंने बताया कि इस पूरे भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान कहीं भी, किसी भी रूप में 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक' का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया। उनका यह छोटा सा लेकिन महत्वपूर्ण कदम पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी गहरी चिंता और 'उत्तरदायी पर्यटन' (Responsible Tourism) के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दर्शाता है। वास्तव में, पर्यावरण के प्रति यही जिम्मेदारी इस पूरी 'जनजातीय पर्यटन' परियोजना की मुख्य आत्मा है। अंत में, इस पूरे कार्यक्रम का सफल और सुव्यवस्थित मंच संचालन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के घोड़ाडोंगरी प्रखंड के समन्वयक श्री संतोष सिंह राजपूत द्वारा किया गया।
image source : https://betul.mpinfo.org

Continue With Google
Comments (0)