आमला। जल संरक्षण और पानी बचाने के बड़े-बड़े दावों के बीच नगर पालिका आमला की लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने स्थित सार्वजनिक नल पिछले कई दिनों से लगातार बह रहा है, जिससे प्रतिदिन हजारों लीटर पेयजल व्यर्थ बर्बाद हो रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह नल नगर पालिका परिसर के सामने ही लगा है, बावजूद इसके अब तक किसी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध लेना जरूरी नहीं समझा।
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 45 दिन पहले ही नगर पालिका द्वारा पुराने नल को हटाकर नया नल लगाया गया था। लेकिन नल की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि कुछ ही दिनों में वह फिर खराब हो गया और लगातार पानी बहने लगा। इससे न केवल पेयजल की बर्बादी हो रही है बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि एक ओर नगर पालिका जल संकट और पानी की कमी का हवाला देकर लोगों से पानी बचाने की अपील करती है, वहीं दूसरी ओर उसकी आंखों के सामने हजारों लीटर पानी रोजाना नालियों में बह रहा है। यदि समय रहते खराब नल को सुधार दिया जाता तो पानी की इस बर्बादी को रोका जा सकता था।
लगातार बहते पानी के कारण आसपास का क्षेत्र भी गीला और गंदा बना हुआ है। राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भी इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब नगर पालिका कार्यालय के सामने की स्थिति यह है तो शहर के अन्य क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी किस प्रकार हो रही होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संबंधित विभाग से मांग की है कि खराब नल को तत्काल बदलकर जल की बर्बादी रोकी जाए तथा भविष्य में गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग करने वाले जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाए।
जनता का सवाल है कि जब जल संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था ही पानी की बर्बादी रोकने में गंभीर नहीं है, तो आम नागरिकों से जल बचाने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
Continue With Google
Comments (0)