मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाली 'नागद्वारी' यात्रा अगस्त 2026 में पुनः प्रारंभ होने जा रही है। जिसे 'मध्यप्रदेश का अमरनाथ' भी कहा जाता है, इस सुप्रसिद्ध नागद्वारी गुफा की यात्रा और उसके साथ आयोजित होने वाले नागद्वारी मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने नागद्वारी मंदिर तक के दुर्गम ट्रैकिंग मार्ग का सघन निरीक्षण किया।

कठिन मार्ग का पैदल भ्रमण और तैयारियों का जायजा शुक्रवार को कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र और मंदिर मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया। कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ नागद्वारी के कठिन और दुर्गम मंदिर मार्ग का पैदल भ्रमण करते हुए जलगली, नागफनी, कालाझाड़, चिंतामन, चित्रशाला, स्वर्गद्वार, पश्चिमद्वार, नागद्वारी मंदिर और काजरी जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मार्ग सुधार, पेयजल व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।

कलेक्टर के कड़े निर्देश: सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मेला अवधि में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मेला क्षेत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए:

  • समयबद्ध कार्य: सभी मूलभूत सुविधाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण कर ली जाएं।

  • मार्ग सुधार: श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए ट्रैकिंग मार्गों का तत्काल सुधार किया जाए।

  • समन्वय: पुलिस, स्वास्थ्य, वन, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग आपस में समन्वय के साथ कार्य करें ताकि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहें।

  • सुविधाएं: विश्राम स्थलों, पर्यटक सुविधाओं और दिशा-निर्देश के लिए संकेतक बोर्ड (Signage Boards) की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

धार्मिक आस्था और पर्यटन का महासंगम कलेक्टर श्री मिश्रा ने बताया कि नागद्वारी मेला मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पचमढ़ी क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करना है।

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक दल इस संयुक्त निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • पुलिस अधीक्षक श्री साई कृष्ण एस. थोटा।

  • उप संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ऋषभा नेताम।

  • मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं अध्यक्ष महादेव मेला समिति श्री हिमांशु जैन।

  • एसडीएम पिपरिया एवं सचिव महादेव मेला समिति श्री आकिब खान।

  • साथ ही लोक निर्माण, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, वन और होमगार्ड विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

प्रशासन की यह सक्रियता यह सुनिश्चित करने के लिए है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का यह केंद्र अपनी सुव्यस्थित व्यवस्थाओं के लिए याद किया जाए। आने वाले अगस्त माह में यह यात्रा अपनी पूरी भव्यता के साथ शुरू होगी, जिसके लिए जिला प्रशासन ने अभी से ही व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है।

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