मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने, उन्हें आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने और कृषि को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्य से 'कृषक कल्याण वर्ष' का विशेष आयोजन किया जा रहा है। सरकार के इसी लोक-कल्याणकारी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए नरसिंहपुर जिले में प्रशासनिक स्तर पर व्यापक प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसी तारतम्य में नरसिंहपुर की कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के कुशल मार्गदर्शन और गरिमामयी प्रेरणा से जिले के चीचली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पुआरिया में शुक्रवार को एक विशाल एवं अत्यंत महत्वपूर्ण 'कृषक संगोष्ठी' (किसान सम्मेलन) का सफ़ल आयोजन संपन्न हुआ।

इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, जैविक खादों और शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से सीधे रूबरू कराना था, ताकि वे अपने पारंपरिक तौर-तरीकों में सुधार कर खेती की लागत को कम कर सकें और बेहतर मुनाफा कमा सकें।


कृषि और सभी संबद्ध (एलाइड) विभागों की योजनाओं का हुआ महा-संगम

ग्राम पुआरिया में आयोजित इस वृहद कृषक संगोष्ठी में 'सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन' (आत्मा - ATMA) परियोजना के अंतर्गत कृषि विभाग सहित उससे जुड़े सभी प्रमुख एलाइड विभागों की विकासात्मक योजनाओं, तकनीकी गतिविधियों और अनुदान प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारियां संयुक्त रूप से प्रदान की गईं। संगोष्ठी में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख विभागों ने सहभागिता दर्ज की और अपनी योजनाओं का स्टॉल व प्रदर्शन किया:

  • कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK): किसानों को फसलों की सुरक्षा, मिट्टी की जांच और संतुलित खाद के उपयोग की वैज्ञानिक विधियां समझाई गईं।

  • पशुपालन एवं डेयरी विभाग: दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुओं की नस्ल सुधारने और उन्हें मौसमी बीमारियों से बचाने की सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

  • उद्यानिकी विभाग (Horticulture): पारंपरिक फसलों के स्थान पर फल, फूल और साग-भाजी की खेती अपनाकर अतिरिक्त आय सृजित करने के लिए प्रेरित किया गया।

  • कृषि अभियांत्रिकी विभाग (Agricultural Engineering): खेती के काम को आसान और आधुनिक बनाने के लिए उन्नत कृषि यंत्रों, ट्रैक्टरों और उन पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी (अनुदान) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

  • मत्स्य पालन विभाग: पानी के संचयन के साथ-साथ तालाबों में मछली पालन व्यवसाय शुरू कर आर्थिक सुदृढ़ता प्राप्त करने के रास्ते सुझाए गए।

इस संगोष्ठी में इन सभी संबंधित विभागों के जिला और विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, क्षेत्र की विभिन्न आदर्श गौशालाओं के संचालक, ग्राम पुआरिया व आसपास के क्षेत्रों के सरपंच, जनपद सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बहुत बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषकगण मुस्तैदी से मौजूद रहे।


कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र (बिंदुवार विवरण)

संगोष्ठी के दौरान कृषि क्षेत्र के जाने-माने वैज्ञानिकों और विभिन्न विभागों के तकनीकी विशेषज्ञों ने मंच से उपस्थित किसानों को संबोधित किया और उनकी समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करते हुए मूल्यवान एवं समसामयिक सलाह दी:

  • डॉ. आशुतोष शर्मा (वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र): उन्होंने आगामी खरीफ फसलों के सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को पूर्व-तैयारियों के संबंध में महत्वपूर्ण सलाह दी। डॉ. शर्मा ने मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए अंधाधुंध रासायनिक खादों के उपयोग से बचने की हिदायत दी और संतुलित उर्वरक प्रबंधन (Balanced Fertilizer Usage) की बारीकियां समझाईं।

  • डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव (वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र): उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिक समय में श्रम और समय की बचत के लिए उन्नत कृषि यंत्रों (Modern Agricultural Implements) का उपयोग कितना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कल्टीवेटर, सीड्रिल और हार्वेस्टर जैसी मशीनों के सही संचालन की जानकारी दी।

  • श्री आर.पी. झारिया (परियोजना संचालक, आत्मा): उन्होंने राज्य सरकार की 'ई-विकास प्रणाली' के बारे में बताते हुए किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के फायदे बताए। इसके साथ ही उन्होंने समन्वित कृषि प्रणाली (Integrated Farming), फसलों के विविधिकरण (Crop Diversification) यानी एक ही फसल पर निर्भर न रहकर अलग-अलग फसलें उगाने और पूरी तरह से रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाने पर विस्तार से प्रकाश डाला।

  • श्री के.पी. सिंह (वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी): उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और खेतों की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए 'नरबाई प्रबंधन' (पैरा या फसल अवशेष न जलाने की तकनीक) पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने किसानों को नरबाई जलाने से होने वाले नुकसान बताए और कृषि विभाग की विभिन्न विभागीय योजनाओं की कड़ियों को समझाते हुए शत-प्रतिशत लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

  • डॉ. महेन्द्र सिंह पाल (पशुपालन एवं डेयरी विभाग): उन्होंने पशुधन को किसानों का सच्चा एटीएम बताते हुए पशुओं के समयबद्ध टीकाकरण (Vaccination), उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों और कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) की नवीन तकनीकों के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया।

  • श्रीमती सीमा केवट (उद्यानिकी विभाग): उन्होंने किसानों को केवल परंपरागत अनाज उत्पादन तक सीमित न रहकर अपनी भूमि के एक हिस्से पर उन्नत किस्म की साग-भाजी (सब्जियों) और औषधीय व फलदार पौधों का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया।


बायो रिसोर्स यूनिट का सजीव निरीक्षण: जीवामृत और बीजामृत की शक्ति को जाना

कृषक संगोष्ठी के मुख्य सत्र के समापन के पश्चात, उपस्थित सभी कृषकों और अतिथियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के उद्देश्य से ग्राम पुआरिया में ही सफलतापूर्वक संचालित की जा रही 'बायो रिसोर्स यूनिट' (BRC) का स्थलीय निरीक्षण और भ्रमण कराया गया।

  • संचालक श्री कुलदीप कौरव की अनूठी पहल: इस अत्याधुनिक एवं पूरी तरह जैविक बायो रिसोर्स यूनिट का कुशल संचालन स्थानीय प्रगतिशील युवा श्री कुलदीप कौरव द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने पूरी यूनिट का भ्रमण कराते हुए किसानों का मार्गदर्शन किया।

  • प्राकृतिक घटकों का जीवंत अवलोकन: निरीक्षण के दौरान बीआरसी के संचालक द्वारा उपस्थित किसानों को देसी गाय के गोबर एवं गौमूत्र के वैज्ञानिक मिश्रण से निर्मित होने वाले विभिन्न प्राकृतिक घटकों जैसे 'जीवामृत' और 'बीजामृत' को बनाने की लाइव विधि का अवलोकन कराया गया।

  • फसलों में उपयोग और कीट नियंत्रण की विधि: किसानों को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया गया कि किस प्रकार बीजामृत का उपयोग कर बोआई से पहले बीजोपचार (Seed Treatment) किया जाता है ताकि फसलों में शुरुआती बीमारियां न लगें। साथ ही खड़ी फसलों में पोषण और कीट नियंत्रण के लिए जीवामृत का छिड़काव व उपयोग किस मात्रा में और कैसे किया जाना चाहिए, इसकी पूरी गाइडलाइन किसानों को दी गई।


आत्मनिर्भरता की ओर नरसिंहपुर के किसानों के बढ़ते कदम

संगोष्ठी के अंत में कृषि अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया कि वे 'कृषक कल्याण वर्ष' के इस सुनहरे अवसर का पूरा लाभ उठाएं। नरसिंहपुर जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह से किसानों की सेवा में तत्पर है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और प्राकृतिक खेती के इन नुस्खों को अपने खेतों में लागू करेंगे, तो यकीनन खेती की लागत आधी हो जाएगी और भूमि की उपजाऊ क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। कार्यक्रम के अंत में स्थानीय पंचायत और किसानों ने इस ज्ञानवर्धक आयोजन के लिए जिला प्रशासन और मुख्य रूप से कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया।

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