नीमच जिले में 'प्रशासन आपके द्वार' अभियान के अंतर्गत आज एक अत्यंत सकारात्मक और अनुकरणीय पहल देखने को मिली। आम तौर पर सरकारी आयोजनों और दौरों के दौरान देखा जाता है कि अधिकारी अपने-अपने पृथक शासकीय वाहनों के काफिले के साथ गंतव्य तक पहुँचते हैं, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। नीमच के कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के नेतृत्व में जिले के समस्त विभाग प्रमुखों ने शासकीय वाहनों का त्याग कर एक ही यात्री बस में सामूहिक यात्रा की और ग्राम कंजार्डा के लिए रवाना हुए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शासन की मितव्ययता (बचत) को बढ़ावा देना और प्रशासन में टीम भावना का संचार करना है।

सामूहिक यात्रा और मितव्ययता का संदेश

नीमच कलेक्ट्रेट परिसर से आज सुबह एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। जब कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के साथ अपर कलेक्टर श्री बी एस कलेश, सीईओ जिला पंचायत श्री अमन वैष्णव, वन मंडलाधिकारी श्री एस के अटोदे एवं जिले के अन्य सभी प्रमुख अधिकारी एक ही बस में सवार होकर निकले, तो यह चर्चा का विषय बन गया। यह मात्र एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह प्रशासन द्वारा मितव्ययता का एक बड़ा संदेश था। अक्सर सरकारी दौरों में पेट्रोल-डीजल और वाहनों के रखरखाव पर जो अनावश्यक व्यय होता है, उसे कम करने की दिशा में यह एक सार्थक कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के एक साथ बस में यात्रा करने से न केवल ईंधन की बचत हुई, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के बीच संवाद और तालमेल का एक बेहतर वातावरण भी तैयार हुआ।

रात्रि चौपाल और जनसमस्या निवारण शिविर की रूपरेखा

नीमच प्रशासन द्वारा ग्राम कंजार्डा में आयोजित इस जिला स्तरीय रात्रि चौपाल और जनसमस्या निवारण शिविर का उद्देश्य ग्रामीण स्तर की जटिल समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना है। प्रशासन ने इस बार शिविर को केवल शिकायतों के पंजीकरण तक सीमित न रखते हुए, समाधान को प्राथमिकता दी है। शिविर में राजस्व विभाग, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पेयजल, पेंशन और खाद्यान्न आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों के स्टॉल स्थापित किए गए हैं। इन स्टॉलों पर संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी स्वयं उपस्थित रहकर आवेदनों का त्वरित निस्तारण कर रहे हैं। ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ी राहत है कि उन्हें अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

प्रशासन की अंतिम छोर तक पहुँच

कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने इस अभियान के बारे में स्पष्ट करते हुए कहा कि 'प्रशासन आपके द्वार' कोई महज सरकारी नारा नहीं है, बल्कि यह नीमच जिले के निवासियों के प्रति शासन की अटूट प्रतिबद्धता है। इस अभियान का मूल मंत्र 'अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन को पहुँचाना' है। अक्सर देखा जाता है कि कई ग्रामीण सुदूर क्षेत्रों में रहने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं या अपनी समस्याओं को उचित मंच तक नहीं पहुँचा पाते। ऐसे में प्रशासन खुद चलकर जब गाँवों में पहुँचता है, तो आम जनता का विश्वास तंत्र और प्रशासन के प्रति गहरा होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे ग्रामीणों की शिकायतों को पूरी संवेदनशीलता और धैर्य के साथ सुनें।

हितग्राहियों के लिए योजनाओं का लाभ

केवल समस्याओं का निराकरण ही नहीं, बल्कि इस शिविर के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। शिविर में आए जरूरतमंदों का मौके पर ही सत्यापन कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है। चाहे वह पेंशन का मामला हो, खाद्यान्न पर्ची का वितरण हो या स्वास्थ्य संबंधी सहायता, प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे। अधिकारियों का कहना है कि शिविर में आने वाले हर आवेदन पर गंभीरता से काम किया जाएगा और यदि कोई समस्या ऐसी है जिसका मौके पर समाधान संभव नहीं है, तो उसे एक निश्चित समय-सीमा के भीतर हल किया जाएगा।

प्रशासन की कार्यशैली में आया बदलाव

नीमच जिले में कलेक्टर के नेतृत्व में संचालित इस अभियान ने प्रशासनिक कार्यशैली में सकारात्मक परिवर्तन के संकेत दिए हैं। जनसुनवाई की परम्परा को अब गाँवों तक ले जाकर प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता और प्रशासन की ताकत जनता की संतुष्टि में निहित है। ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। ग्राम कंजार्डा के निवासियों का कहना है कि इतने बड़े अधिकारियों को एक साथ अपने बीच देखकर उन्हें अपनी बात रखने का साहस और अवसर मिला है।

भविष्य की दिशा

'प्रशासन आपके द्वार' अभियान के तहत की गई यह कवायद केवल एक दिवसीय आयोजन नहीं है, बल्कि यह नीमच जिले की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनने जा रही है। जिला प्रशासन की योजना है कि इस प्रकार के शिविरों का आयोजन जिले के अन्य सुदूर अंचलों में भी किया जाए ताकि पूरी प्रशासनिक मशीनरी जनता के बीच रहकर काम करे। टीम भावना और मितव्ययता के साथ शुरू की गई यह बस यात्रा प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। आमजन अब उम्मीद कर रहे हैं कि इसी तरह की संवेदनशीलता के साथ अन्य विभागों के कार्य भी सुगम होंगे।

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