मध्य प्रदेश में पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' ने जनभागीदारी का एक नया अध्याय लिखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह अभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहकर एक विराट वैश्विक जन आंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। 30 जून 2026 को संपन्न हुए इस महाअभियान ने न केवल प्रदेश की जल संरचनाओं का कायाकल्प किया, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लगभग 7 करोड़ परिवारों तक पहुँचकर जल संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी प्रसारित किया।

जनभागीदारी का डिजिटल इतिहास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दृढ़ संकल्प से शुरू हुए इस अभियान को सोशल मीडिया पर अभूतपूर्व समर्थन मिला। डिजिटल युग की सार्थकता सिद्ध करते हुए सरकार ने ट्विटर (X), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स का प्रभावी उपयोग किया।

  • डिजिटल पहुँच: अभियान से जुड़ी जागरूकता सामग्री, लघु फिल्में और इन्फोग्राफिक्स के माध्यम से कुल 6 करोड़ 95 लाख 74 हजार 820 से अधिक लोगों तक पहुंच सुनिश्चित हुई।

  • सक्रिय हैशटैग: #जल_गंगा_संवर्धन_अभियान, #जल_है_तो_कल_है, #WaterConservation और #SaveWater जैसे हैशटैग्स ने इस मुहीम को प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकालकर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।

रिकॉर्ड स्तर पर जल संरक्षण कार्य: 10,514 करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सतत मॉनिटरिंग और विशेष डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से राज्य भर में जल संरक्षण के कार्यों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। इस महाअभियान के तहत 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख 63 हजार से अधिक जल संरचनाओं के निर्माण एवं जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण किया गया।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • भू-जल संवर्धन: रिकॉर्ड समय में 67,708 खेत-तालाब, 225 अमृत सरोवर और 97,614 कूप रिचार्ज संरचनाएं तैयार की गईं।

  • प्राचीन स्रोतों का पुनरुद्धार: प्रदेश भर में 10,000 से अधिक कुओं, नदियों और प्राचीन बावड़ियों को न केवल अतिक्रमण मुक्त कराया गया, बल्कि उनका सौंदर्यीकरण कर उन्हें फिर से जीवंत किया गया।

इन ठोस प्रयासों की बदौलत मध्य प्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। इस क्रम में, खंडवा जिले ने जल संचयन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री की सक्रिय सहभागिता और श्रमदान

अभियान की सफलता का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की व्यक्तिगत सक्रियता रही। उन्होंने स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर श्रमदान किया और समाज के हर वर्ग को प्रेरित किया।

  • प्रमुख पड़ाव: 19 मार्च 2026 को इंदौर से तीसरे चरण की शुरुआत, धार में देवी सागर तालाब का गहरीकरण, उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा और भोपाल में 'सदानीरा समागम' जैसे आयोजनों ने जनता में व्यापक उत्साह का संचार किया। राजगढ़ में अभियान का भव्य समापन समारोह इस जन-आंदोलन की सफलता का साक्षी बना।

निरंतरता और भविष्य की राह

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि 'जल है तो कल है' के संकल्प के साथ जल संरक्षण के कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। अभियान के समापन के साथ ही पर्यावरण को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए 'एक पेड़ माँ के नाम' पौधरोपण अभियान का भी शंखनाद किया गया। साथ ही, 1 जुलाई से 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन' का भव्य शुभारंभ करके सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार और समाज एक साथ मिलकर किसी कार्य को हाथ में लेते हैं, तो वह न केवल एक योजना, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक शक्तिशाली जन आंदोलन बन जाता है। यह अभियान मध्य प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला एक ऐतिहासिक प्रयास है।

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