सतना | मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लागू करने की संभावनाओं और इसके विविध आयामों पर आम नागरिकों के विचार जानने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया संचालित की जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को सतना जिला पंचायत कार्यालय में एक भव्य जन-परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करना था, ताकि इस जटिल और संवेदनशील विषय पर एक संतुलित राय तैयार की जा सके।
बैठक की गरिमामयी उपस्थिति इस उच्च स्तरीय जन-परामर्श बैठक में प्रदेश शासन की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता में सतना के महापौर योगेश ताम्रकार, स्पीकर राजेश चतुर्वेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल, उपाध्यक्ष सुस्मिता सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष बद्री विशाल पाठक, जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेन्द्र सिंह, श्रीधर उरमलिया, हरीशकांत त्रिपाठी और एकता सिंह सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, नगर निगम के पार्षद, प्रबुद्ध नागरिक, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे। उच्च स्तरीय समिति की ओर से सदस्य अनूप नायर ने पूरे संवाद का नेतृत्व किया।
समान नागरिक संहिता: कानूनी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य बैठक के दौरान उच्च स्तरीय समिति के सदस्य अनूप नायर ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। राज्य सरकार इसी संवैधानिक दायित्व के तहत इस दिशा में आगे बढ़ रही है। नायर ने कहा, "हमारी समिति का प्राथमिक उद्देश्य किसी भी जल्दबाजी में निर्णय लेना नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी समुदायों, वर्गों और हितधारकों की भावनाओं को गहराई से समझना है।" उन्होंने बैठक में मौजूद लोगों को इस बात के लिए आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी सुझावों का वैज्ञानिक और कानूनी रूप से परीक्षण किया जाएगा।
विवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन पर विस्तृत चर्चा संवाद के दौरान चर्चा केवल सतही नहीं रही, बल्कि इसमें उन बिंदुओं पर गहराई से बात हुई जो सीधे आम आदमी के जीवन को प्रभावित करते हैं। बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई:
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विवाह और विवाह विच्छेद: विवाह की प्रक्रिया और विवाह विच्छेद (तलाक) के नियमों में एकरूपता पर विचार।
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भरण-पोषण: विवाह विच्छेद के उपरांत महिलाओं और आश्रितों के भरण-पोषण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के सुझाव।
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उत्तराधिकार: संपत्तियों के बंटवारे और उत्तराधिकार के कानूनों में लैंगिक समानता तथा स्पष्टता लाने की आवश्यकता।
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दत्तक ग्रहण: बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी के लिए समान मानक तय करने पर चर्चा।
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लिव-इन रिलेशनशिप: आधुनिक समय में बढ़ते लिव-इन संबंधों के कानूनी स्वरूप और सुरक्षा मानकों पर प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने अनुभव साझा किए।
जन-जागरूकता और संवाद पर जोर बैठक में सम्मिलित प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे कानून का लाभ तभी मिल सकता है जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसकी समझ पहुंचे। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि:
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कानूनी प्रक्रियाओं को आम नागरिकों के लिए सरल और सुगम बनाया जाना चाहिए।
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कानून के ड्राफ्ट के साथ ही उसकी व्यावहारिक कठिनाइयों का निराकरण पहले किया जाए।
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समाज के सभी वर्गों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या भय न फैले।
डिजिटल माध्यम से सुझावों का स्वागत उच्च स्तरीय समिति के सदस्य अनूप नायर ने बताया कि जो नागरिक बैठक में उपस्थित नहीं हो सके, वे भी अपनी राय देने से वंचित न रहें। इसके लिए राज्य शासन ने एक विशेष पोर्टल ucc.mp.gov.in विकसित किया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पोर्टल का उपयोग करें और अपने बहुमूल्य सुझाव साझा करें। सतना और मैहर जिले के नागरिकों से प्राप्त ये सुझाव समिति की अंतिम अनुशंसा तैयार करने में आधारभूत भूमिका निभाएंगे।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सशक्त उदाहरण यह जन-परामर्श बैठक केवल एक औपचारिक सभा नहीं थी, बल्कि यह सतना और मैहर जिले के निवासियों की सक्रिय भागीदारी का प्रमाण थी। जिस उत्साह के साथ समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया और सुझाव दिए, वह इस बात को दर्शाता है कि प्रदेश के नागरिक अपने भविष्य के कानूनों को लेकर कितने जागरूक हैं। अंत में, उपस्थित अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने वाला कदम बताया।
यह पूरी प्रक्रिया भविष्य में प्रदेश के लिए तैयार होने वाली उस व्यापक अनुशंसा का हिस्सा बनेगी, जो जनभावनाओं और सामाजिक अपेक्षाओं के सामंजस्य से निर्मित होगी। समिति इन सभी सुझावों को संकलित कर आगामी कार्ययोजना तैयार करेगी, जिससे देश और प्रदेश में एक समावेशी कानूनी ढांचा विकसित किया जा सके।
Image Source: https://satna.mpinfo.org

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